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नेपाल के 75वें प्रजातंत्र दिवस पर भारत की निर्णायक भूमिका का स्मरण

काठमांडू/विशेष रिपोर्ट।
नेपाल आज अपना 75वाँ प्रजातंत्र दिवस अत्यंत गौरव, श्रद्धा और लोकतांत्रिक उत्साह के साथ मना रहा है। फागुन 7, 2007 साल को निरंकुश राणा शासन के अंत और लोकतंत्र की स्थापना की ऐतिहासिक स्मृति में पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
इस ऐतिहासिक परिवर्तन में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक रही है। 1950-51 में जब नेपाल राणा शासन की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब भारत की मध्यस्थता से हुए ‘दिल्ली समझौते’ ने संवैधानिक राजशाही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव रखी।
जब नेपाल के राजा त्रिभुवन ने राणा शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए नेपाल छोड़ा, तब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें शरण दी। इसके बाद भारत की सक्रिय पहल से हुआ दिल्ली समझौता नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना का आधार बना।
शहीदों के बलिदान को नमन
नेपाल के महान शहीद —
दशरथ चन्द
धर्मभक्त माथेमा
गंगाला श्रेष्ठ
शुक्रराज शास्त्री
ने हँसते-हँसते राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनके त्याग और जनता के जनआन्दोलन ने निरंकुश शासन को समाप्त कर लोकतंत्र की नींव रखी।
राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय समारोह
आज प्रातः काठमांडू के टुंडिखेल सैनिक मंच पर राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल की उपस्थिति में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया जा रहा है।
राष्ट्रपति पौडेल ने अपने संदेश में कहा कि 2007 साल की क्रांति ने मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और जनता की संप्रभुता की आधारशिला रखी। उन्होंने सभी ज्ञात-अज्ञात वीरों को नमन करते हुए स्थायी शांति, सुशासन और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भारत-नेपाल संबंध: लोकतंत्र से विकास तक
भारत नेपाल का प्रमुख विकास साझेदार रहा है।
नेपाल का बड़ा विदेशी व्यापार भारत के साथ होता है।
तराई क्षेत्र में सड़क निर्माण, रेल संपर्क और आधारभूत संरचना विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
नेपाली सेना को प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग भी भारत-नेपाल संबंधों का अहम स्तंभ है।
1951 में राणा शासन के अंत से लेकर संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना तक, भारत ने हर चरण में नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा को मजबूती देने में सहयोग दिया है।
क्यों है यह दिन ऐतिहासिक?
फागुन 7 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना, जनसंकल्प और बलिदान की अमर गाथा है।
इसी क्रांति की पृष्ठभूमि में आज का संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य और वर्तमान संविधान स्थापित हुआ।
नेपाल का 75वाँ प्रजातंत्र दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनःप्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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