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आगरा पुलिस को अमेरिकी एजेंसी से मिला डाटा:,शास्त्रीपुरम में पकड़े गए ठगों के अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर से जुड़ा मामला

आगरा पुलिस को अमेरिकी एजेंसी से मिला डाटा:,शास्त्रीपुरम में पकड़े गए ठगों के अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर से जुड़ा मामला

आगरा। आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र में शास्त्रीपुरम में पकड़े गए ठगों के अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर से जुड़े मामले में पुलिस पीड़ितों से जुड़ा डाटा मिल गया है। अमेरिकी एजेंसी से मिले इस डाटा को पुलिस अब कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। आगरा में गत मार्च माह में पुलिस ने फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा किया था। पुलिस ने रेड कर संचालक समेत 7 लोगों को अरेस्ट किया था। ये लोग आगरा में बैठकर अमेरिका के नागरिकों को कॉल कर ठगते थे। पुलिस का आईटी सेल काफी समय से मामले की जांच कर रहा था। इनको जोइपर साफ्टवेयर के जरिए पकड़ा गया। ये लोग वोइप एप के जरिए कॉल करते थे। ताकि पुलिस जल्दी पकड़ न पाए। यह कॉल सेंटर शास्त्रीपुरम के सेक्टर-सी में संचालित हो रहा था। सेंटर पर युवक डेस्कटॉप के मॉनिटर स्क्रीन पर दिखाए गए इंटरनेशनल (यूएस) मोबाइल नंबरों पर हेडफोन लगाकर जोइपर साफ्टवेयर के माध्यम से वोइप पर कॉल करते मिले थे। पुलिस ने कॉल सेंटर तो बंद करा दिया था, लेकिन पीड़ित नहीं मिले थे। अमेरिकी एजेंसी एचएसआई (होम लेंड सिक्योरिटी इंवेस्टीगेशन) ने एक पीड़ित का डाटा आगरा पुलिस को भेजा है। पुलिस यह दस्तावेज कोर्ट में पेश करेगी। कॉल सेंटर ने लोन के नाम पर अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों ठगी की है। पुलिस ने दूतावास के जरिए अमेरिकी एजेंसी से संपर्क किया था। कॉल सेंटर संचालक अनुराग प्रताप सिंह ने सेंटर का रजिस्ट्रेशन डियोसा एसेट के नाम से कराया था। पूछताछ के पुलिस ने दावा किया था, कि आरोपी अब तक करोड़ों रुपए की ठगी का कर चुके हैं। रोजाना करीब 1 लाख रुपए के हिसाब से हर महीने 30 लाख का फ्रॉड करते थे। यह फर्जीवाड़ा 2021 से चल रहा था। बिटकॉइन के माध्यम से 3-4 लोगों को डिटेल भेजकर अमेरिकी लोगों से पैसा लेते थे। आरोपी युवक कॉल सेंटर संचालक अनुराग प्रताप के लिए काम करते थे। कॉल सेंटर संचालक ने ही उन्हें इसकी ट्रेनिंग दी थी कि विदेशी नागरिकों की निजी जानकारी कैसे एकत्र की जा सकती है।
कॉल सेंटर संचालक के संपर्क में 2-3 विदेशी नागरिक थे। ये लोग स्काइप आईडी के जरिए नंबर भेजते थे। उन नंबरों पर यहां से उनकी सोशल सिक्योरिटी और गुप्त सूचनाएं प्राप्त की जाती थीं। इसके बाद यह सारी जानकारी लिंक्ड-इन एप्प के जरिए 2-3 विदेशी नागरिकों की आईडी पर भेज दी जाती थी। इसके बदले प्रति व्यक्ति 30 से 40 डॉलर कमीशन गिफ्ट वाउचर के रूप में उसको भेजा जाता था।
आरोपियों में कॉल सेंटर संचालक अनुराग प्रताप सिंह समेत शिवम सागर उर्फ सिम्मू निवासी बाई का बाजार थाना सिकन्दरा, आशीष एस लाल निवासी आवास विकास कालोनी सिकन्दरा, अभिषेक चाहर निवासी बृज द्वारिका कालोनी पश्चिमपुरी, अभ्युदय फौजदार निवासी जनकपुरी कॉलोनी थाना शाहगंज, विलियमदास निवासी कृष्णा कॉलोनी देवरी रोड थाना सदर बाजार,यश पाराशर उर्फ शुभम पाराशर निवासी आवास विकास कॉलोनी शामिल थे।

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