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“10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच गूंजी नवजात की किलकारी: एग्जाम सेंटर में नाबालिग छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म, मचा हड़कंप”

धार (मध्य प्रदेश) से स्पेशल रिपोर्ट
10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच परीक्षा केंद्र में नाबालिग छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म — हड़कंप, आश्चर्य और संवेदनशील मोड़
धार जिले के पीथमपुर थाना सेक्टर-1 के एक परीक्षा केंद्र में मंगलवार को एक ऐसा नजारा सामने आया, जिसे देखकर वहाँ मौजूद हर किसी के चेहरे पर आश्चर्य, चिंता, और सहानुभूति के भाव उभर आए।
10वीं बोर्ड परीक्षा दे रही एक नाबालिग छात्रा को गणित का पेपर देते समय अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। दर्द से परेशान होकर वह परीक्षा केंद्र के शौचालय की ओर चली गई — और इसी बीच वहाँ ही एक नवजात को जन्म दे दिया।


घटना का क्रम — किस तरह हुआ सब कुछ?
 सुबह करीब परीक्षा शुरू: छात्रा ने 10वीं बोर्ड का गणित का पेपर देना शुरू किया।
 ताकि कुछ घंटे के बाद… दर्द अचानक शुरू: पेट में तेज दर्द की शिकायत होने पर छात्रा बिना किसी को पहले बताए शौचालय की ओर चली गई।
 फिर वहीँ जन्म: थोड़ी ही देर में उसने एक बच्चे को जन्म दिया — समूचा परीक्षा केंद्र एकाएक हक्का-बक्का रह गया। 

परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों ने तुरंत 108 एंबुलेंस बुलाई और नाबालिग छात्रा व नवजात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पीथमपुर तक ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने पुष्टि की कि दोनों (जन्म देने वाली छात्रा और नवजात) फिलहाल *स्वस्थ और चिकित्सकीय निगरानी में हैं। �

जाँच में खुलासा — क्या हुआ असल में?
पुलिस ने छात्रा से पूछताछ की तो एक गंभीर और संवेदनशील तथ्य सामने आया — उसने बयान दिया कि उसके जीवन में पिछले दो वर्षों से एक युवक मौजूद था, जिसके साथ उसके सम्बन्ध रहे, और इसी से वह गर्भवती थी।
उस युवक के खिलाफ पुलिस ने कानूनी कार्रवाई (POCSO समेत) दर्ज कर मामला आगे जांच के लिए भेज दिया है। �

थाने की उप निरीक्षक चांदनी सिंगार ने बताया कि मामले की हर वैधानिक (कानूनी) पहलू से जांच की जा रही है, और आरोपी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 


परीक्षा-केंद्र में हड़कंप!
जैसे ही यह खबर फैल गई कि एक छात्रा ने जन्म दिया है, परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाएँ, छात्रों और पर्यवेक्षकों में हड़कंप मच गया। कुछ अभिभावक चिंतित नजर आए, तो कुछ स्टाफ सदस्यों ने तत्काल हरकत में आकर राहत कार्य शुरू किया।

एक शिक्षक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया,
“हम सभी के लिए यह स्थिति बिल्कुल असामान्य थी… हमें आशंका थी कि बच्ची को कोई स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन अस्पताल से जानकारी मिली कि दोनों स्वस्थ हैं।”

कानूनी और सामाजिक संवेदनाएँ
यह केवल एक विचित्र घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर संदेश है — खासकर जब नाबालिगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और संरक्षण की बात सामने आती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मामले अक्सर POCSO (पहुँचनीय बच्चों से यौन शोषण का कानून) के दायरे में आते हैं, और बच्चों की सुरक्षा तथा मनोवैज्ञानिक समर्थन महत्वपूर्ण होता है।

समाप्ति बयान
धार जिले के इस परीक्षा केंद्र की घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि हमारा समाज, अभिभावक, विद्यालय और प्रशासन मिलकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कैसी देख-रेख कर रहे हैं। एक तरफ़ जहां शिक्षा के लिए परीक्षा है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों के प्रति सतर्कता और समर्थन की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

यूपी बोर्ड परीक्षा में सेंध! फर्जी एडमिट कार्ड से चार गिरफ्तार, गोरखपुर में ‘सॉल्वर गैंग’ का खुलासा

गोरखपुर | FT News Digital विशेष रिपोर्ट
Gorakhpur के थाना पिपराइच क्षेत्र में यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान कथित रूप से फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि वे कूटरचित एडमिट कार्ड और आधार कार्ड के जरिए वास्तविक परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे।
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई। पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी चौरी-चौरा के पर्यवेक्षण और प्रभारी निरीक्षक पिपराइच के नेतृत्व में चेकिंग के दौरान संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया।
परीक्षा केंद्र पर खुलासा कैसे हुआ?
घटना 23 फरवरी 2026 की बताई जा रही है। थाना पिपराइच क्षेत्र स्थित महाराणा प्रताप कृषक इंटर कॉलेज में यूपी बोर्ड परीक्षा चल रही थी। परीक्षा के दौरान दस्तावेजों की जांच में कथित रूप से गड़बड़ी सामने आई। पुलिस के अनुसार, कुछ युवक वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा देते पाए गए।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ के बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से कथित रूप से फर्जी एडमिट कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं।
किन धाराओं में मुकदमा?
प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना पिपराइच में मुकदमा अपराध संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं एवं परीक्षा अध्यादेश 2024 के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार अभियुक्त (पुलिस के अनुसार)
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान निम्न रूप में बताई गई है:
अभिषेक चौहान (निवासी थाना शाहपुर क्षेत्र)
सौरभ कुमार (निवासी थाना शाहपुर क्षेत्र)
करन सोनकर (निवासी थाना गोरखनाथ क्षेत्र)
सूरज कुमार (निवासी थाना एम्स क्षेत्र)
(नोट: सभी अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों की जांच जारी है। न्यायालय में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपित निर्दोष माने जाते हैं।)
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में भी परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
विश्लेषण
यूपी बोर्ड जैसी बड़ी परीक्षा में इस तरह की कथित अनियमितता न केवल शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि मेहनत से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ भी अन्याय है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक संगठित सॉल्वर गैंग की ओर इशारा कर सकता है।
FT News Digital इस प्रकरण की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है।

लखनऊ में कारोबारी की मौत: बेटे अक्षत प्रताप सिंह पर हत्या का आरोप, पुलिस जांच जारी

स्थान: Lucknow
थाना: आशियाना | जांच एजेंसी: Uttar Pradesh Police
घटना की तिथि: 20 फरवरी (तड़के) | मामला दर्ज: 21 फरवरी


राजधानी लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र के सेक्टर-एल में रहने वाले 49 वर्षीय कारोबारी मानवेंद्र सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस ने उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, 21 फरवरी को मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की सूचना आशियाना थाने में दी गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ और घर की तलाशी के दौरान मामला हत्या का प्रतीत हुआ।
क्या है आरोप?
पुलिस के प्रारंभिक बयान के अनुसार, 20 फरवरी की तड़के पिता-पुत्र के बीच पढ़ाई और करियर को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान अक्षत प्रताप सिंह ने घर में रखी लाइसेंसी राइफल से गोली चलाई, जिससे मानवेंद्र सिंह की मृत्यु हो गई।
पुलिस का कहना है कि घटना के बाद शव को छिपाने का प्रयास किया गया। घर की तलाशी में प्लास्टिक ड्रम से शव का हिस्सा बरामद हुआ। अन्य हिस्सों की बरामदगी शहर के अलग क्षेत्र से की गई।
जांच में अब तक क्या सामने आया?
वारदात घर की ऊपरी मंजिल पर होने की आशंका।
हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश के संकेत।
फॉरेंसिक टीम द्वारा मौके से नमूने एकत्र।
लाइसेंसी हथियार को कब्जे में लेकर बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया।
आसपास के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच जारी।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
परिवार की स्थिति
घटना के समय घर में मौजूद अन्य सदस्य सदमे में हैं। पुलिस के अनुसार, परिवार को आवश्यक सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
आधिकारिक बयान
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विश्लेषण और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
महत्वपूर्ण सूचना (डिस्क्लेमर)
यह समाचार उपलब्ध पुलिस जानकारी और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।