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मेडिकल कॉलेज के छात्रों पर मारपीट का आरोप, ज्वेलर्स की दुकान पर हंगामे से नगर में तनाव

सिद्धार्थनगर।
जिला मुख्यालय स्थित नगर पालिका परिषद के सामने शुक्रवार की शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ज्वेलर्स व्यापारी ने माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के कुछ छात्रों पर दुकान में घुसकर मारपीट व अभद्रता करने का आरोप लगाया।

घटना के बाद नगर के व्यापारियों में दहशत और नाराजगी का माहौल देखा गया।
घटना शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच की बताई जा रही है। पीड़ित के अनुसार, मेडिकल कॉलेज से जुड़े कुछ छात्र अपने अन्य साथियों के साथ श्री धन लक्ष्मी ज्वेलर्स नामक दुकान पर पहुंचे, जहां कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया और मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पीड़ित व्यापारी का पक्ष


पीड़ित व्यापारी पंकज वर्मा पुत्र झिनक वर्मा, निवासी वार्ड नंबर-24, पूरब पड़ाव, ने बताया कि वह बीते तीन वर्षों से नगर पालिका परिषद के सामने ज्वेलरी की दुकान संचालित कर रहे हैं।
उनका कहना है कि विवाद के दौरान उनके साथ-साथ दुकान में मौजूद कर्मचारियों से भी अभद्रता की गई। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय उनकी बुजुर्ग माता, जो दुकान पर मौजूद थीं, उनके साथ भी दुर्व्यवहार हुआ।
पूर्व विवाद से जुड़ा होने की आशंका
पीड़ित व्यापारी का कहना है कि यह मामला 29 जनवरी 2026 को मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद से जुड़ा हो सकता है। उस समय भी उनके स्टाफ के साथ कहासुनी और मारपीट का आरोप लगाया गया था, जिसकी सूचना थाने में दी गई थी। हालांकि उस मामले में कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई थी।
व्यापारियों में रोष


घटना के बाद नगर के व्यापारियों में रोष व्याप्त है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि बाजार क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं होंगी, तो व्यापारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। व्यापारियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का पक्ष


इस संबंध में क्षेत्राधिकारी सदर ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। तहरीर प्राप्त होने और तथ्यों की जांच के बाद कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनकर और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है।
जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट


फिलहाल मामला जांचाधीन बताया जा रहा है। प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें किस पक्ष की क्या भूमिका रही।

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