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मथुरा में सन्नाटा: किसान ने पहले परिवार खत्म किया, फिर खुद भी बुझा दी जिंदगी की लौ

दीवार पर आखिरी संदेश, डायरी और वीडियो से खुल रहे दर्द के पन्ने — हर एंगल से जांच में जुटी पुलिस


मथुरा | महावन तहसील | खप्परपुर गांव
मथुरा जिले के महावन तहसील क्षेत्र के खप्परपुर गांव में मंगलवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक किसान और उसके पूरे परिवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने गांव को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय मनीष अपनी पत्नी सीमा (30) और तीन मासूम बच्चों — प्रियांशी (6), हनी (5) और ढाई वर्षीय प्रतीक — के साथ गांव में रहता था। मंगलवार सुबह जब घर से कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों को शक हुआ।
बताया जा रहा है कि दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज देने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला तो ग्रामीणों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देख सभी सन्न रह गए।
अंदर क्या मिला?
सूत्रों के अनुसार —
मनीष का शव फर्श पर पड़ा मिला
पत्नी और दो बच्चों के शव बिस्तर पर पाए गए
एक बच्ची का शव चारपाई पर मिला
प्रथम दृष्टया पत्नी के सिर पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं, जबकि बच्चों की मौत गला दबाए जाने की आशंका जताई जा रही है। वहीं मनीष की हथेली काली पड़ी होने की बात सामने आई है, जिससे करंट लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
हालांकि मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
दीवार, डायरी और वीडियो — क्या है सच?
घटनास्थल से दीवार पर लिखा एक संदेश मिला है, जिसमें कथित तौर पर परिवार सहित अपनी मर्जी से जान देने की बात लिखी गई है।
इसके अलावा एक डायरी में कुछ लोगों पर प्लॉट की रकम बकाया होने का जिक्र बताया जा रहा है। एक वीडियो भी पुलिस के कब्जे में है, जिसमें मृतक ने कथित तौर पर मानसिक और आर्थिक तनाव की बात कही है।
पुलिस इन सभी तथ्यों की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के पीछे असली कारण क्या था।
पुलिस क्या कह रही है?
स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि —
“मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। सुसाइड नोट, डायरी और वीडियो की सत्यता की भी पड़ताल होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट की जाएगी।”
बड़ा सवाल
क्या आर्थिक दबाव इस त्रासदी की वजह बना?
क्या पारिवारिक तनाव था?
या इसके पीछे कोई और कारण?
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सामाजिक संदेश
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या ग्रामीण इलाकों में मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव को समय रहते पहचाना और संभाला जा पा रहा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में चुप रहने की बजाय संवाद और मदद लेना जरूरी है।

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