सिद्धार्थनगर का बेटा अब अंतरराष्ट्रीय मैदान में दिव्यांगता को ताकत बनाकर सागर ठठेर ने किया कमाल, श्रीलंका में भारत की ओर से खेलेंगे टी-20
“सिद्धार्थनगर का बेटा करेगा भारत का प्रतिनिधित्व – श्रीलंका में टी-20 खेलेंगे सागर ठठेर”

उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर मे
जब हौसले बुलंद हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। इसका जीता-जागता उदाहरण बने हैं सिद्धार्थनगर के अनूपनगर मोहल्ला निवासी सागर ठठेर। पैर से दिव्यांग होने के बावजूद सागर ने अपने जुनून और मेहनत के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा जिला आज गर्व महसूस कर रहा है।

सागर ठठेर का चयन भारत की रिहैबिलिटेशन क्रिकेट टीम में हुआ है और वह अब श्रीलंका में आयोजित टी-20 क्रिकेट श्रृंखला में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारतीय टीम तीन मैचों की श्रृंखला खेलने के लिए श्रीलंका जाएगी, जिसका पहला मुकाबला 3 अप्रैल को खेला जाएगा। इससे पहले सागर 1 अप्रैल को चेन्नई में भारतीय टीम के साथ जुड़ेंगे।
मेहनत ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
सागर ठठेर को टीम में ऑलराउंडर के रूप में शामिल किया गया है। वह दाहिने हाथ के मध्यक्रम बल्लेबाज होने के साथ-साथ मध्यम गति के गेंदबाज भी हैं। हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश की ओर से खेलते हुए उन्होंने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा और भारतीय टीम में जगह बनाई।
गली क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मैदान तक का सफर
सागर को बचपन से ही क्रिकेट से लगाव था। शुरुआत में वह मोहल्ले में साथियों के साथ गली क्रिकेट खेला करते थे। लेकिन सपने बड़े थे और हौसला उससे भी बड़ा। पढ़ाई के लिए लखनऊ जाने के बाद उन्होंने पैरा क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और लगातार मेहनत करते हुए आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए।
पढ़ाई और खेल दोनों में आगे
सागर ठठेर वर्तमान में लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है।
एथलेटिक्स में भी लहरा चुके हैं परचम
सागर सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि पैरा एथलेटिक्स में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में वह स्वर्ण और रजत पदक जीत चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी भाग ले चुके हैं।
जिले में गर्व और प्रेरणा का माहौल
सागर ठठेर के भारतीय टीम में चयन से सिद्धार्थनगर जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। लोग इसे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहे हैं कि यदि मेहनत और लगन हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
सागर की सफलता यह संदेश देती है कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि हौसले के सामने छोटी सी चुनौती है। उनके इस सफर ने न सिर्फ सिद्धार्थनगर बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।
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