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रिश्तों को रौंदने वाले बेटे को उम्रकैद

DNA बना सबसे बड़ा गवाह, बरेली कोर्ट का सख्त संदेश
बरेली | 16 मार्च (संवाददाता)
रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले एक बेहद संवेदनशील मामले में बरेली की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पुत्र को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला भमोरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक युवक पर अपनी ही माता के साथ गंभीर आपराधिक कृत्य करने का आरोप लगाया गया था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटना के समय आरोपी के नशे में होने तथा पीड़िता को धमकाने जैसे आरोप भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
नोट: आरोपों की पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
गवाह पलटे, लेकिन विज्ञान बना आधार
सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए, जिससे मामला जटिल होता नजर आया।
लेकिन जांच में सामने आई DNA रिपोर्ट को अदालत ने निर्णायक साक्ष्य मानते हुए कहा कि:
“वैज्ञानिक साक्ष्य परिस्थितियों में सच्चाई स्थापित करने में सक्षम होते हैं।”
अदालत का फैसला
अपर सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए:
आजीवन कठोर कारावास
✔ ₹22,000 का अर्थदंड
की सजा सुनाई।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड में से ₹20,000 पीड़िता को प्रदान किए जाएं।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसले में न्यायालय ने कहा कि:
पारिवारिक संबंध किसी अपराध को कम नहीं करते
गवाहों के बदलते बयान के बावजूद न्याय साक्ष्यों पर आधारित होता है
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला कई स्तर पर एक स्पष्ट संदेश देता है:
कानून के सामने कोई भी अपराधी नहीं बच सकता
वैज्ञानिक जांच (DNA) न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाती है
संवेदनशील मामलों में अदालत का रुख सख्त रहेगा


मामला: भमोरा थाना क्षेत्र, बरेली
निर्णय: 16 मार्च 2026
सजा: उम्रकैद + ₹22,000 जुर्माना
मुख्य आधार: DNA साक्ष्य

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