फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
28 फरबरी 2026 को आसमान में दिखेगी ग्रहों की परेड, 28 फरवरी की शाम एक साथ नजर आएंगे 6 ग्रह

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यदि आप ग्रहों, उपग्रहों और चांद और सितारों की दुनिया में दिलचस्पी रखते हैं, तो 28 फरवरी की शाम अपनी नजरें आसमान की ओर टिका लीजिए। इस दिन हमारे सौर मंडल के छह ग्रह—बुध (Mercury), शुक्र (Venus), शनि (Saturn), अरुण (Uranus), बरुण(Neptune),और बृहस्पति(Jupiter) , लगभग एक ही कतार में दिखाई देंगे।

क्या होता है ग्रहीय संरेखण या प्लैनेटरी परेड (Planetary Parade)

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह वह खगोलीय स्थिति है जब सौर मंडल के कई ग्रह एक ही समय में आकाश के लगभग एक ही हिस्से में, एक काल्पनिक रेखा (क्रांतिवृत्त Ecliptic) के आसपास दिखाई देते हैं। खगोल वैज्ञानिक रूप से इसका अर्थ है कि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा लगभग एक ही समतल (plane) में करते हैं।

पृथ्वी से देखने पर वे उसी मार्ग पर एक कतार या चाप (arc) में दिखाई देते हैं। यही दृष्टि-आधारित संरेखण (line-of-sight alignment) होता है, वास्तव में ग्रह अंतरिक्ष में एक सीधी रेखा में पास-पास नहीं होते; वे करोड़ों किलोमीटर दूर अपनी-अपनी कक्षाओं में रहते हैं।

कितने ग्रह हों तो “परेड” कहा जाता है?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 3 या अधिक ग्रह एक साथ दिखाई दें तो सामान्यत: इसे “प्लैनेटरी परेड” कहा जाता है।

4–5 ग्रह नग्न आँखों से दिख जाएँ तो यह अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है।

6 या उससे अधिक ग्रहों का एक साथ दृश्य होना और भी कम बार होता है।

कैसे और कहाँ देखें?

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह अद्भुत खगोलीय नजारा सूर्यास्त के लगभग 30 मिनट बाद शुरू होगा। आपको बस एक ऐसी जगह ढूंढनी है जहाँ से पश्चिमी क्षितिज (Western Horizon) साफ दिखाई दे।

बिना टेलिस्कोप के (नग्न आंखों से): शुक्र, बृहस्पति, बुध और शनि को आप बिना किसी उपकरण के देख पाएंगे। उस दौरान शुक्र ग्रह और बृहस्पति ग्रह की चमक अन्य साथी ग्रहों के मुक़ाबले सबसे ज्यादा दिखाई देगी। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अरुण ग्रह को देखने के लिए किसी अच्छी टेलिस्कोप/दूरबीन या किसी विशेष बिनाकुलर की जरूरत होगी, जबकि नेपच्यून को केवल किसी शक्तिशाली टेलिस्कोप से ही देखा जा सकेगा।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान आकाश में चांद का भी साथ होगा और इस शाम चांद भी 92% चमक के साथ बृहस्पति के बेहद करीब (लगभग 4°) पर नजर आएगा, जो इस दृश्य को और भी खूबसूरत बना देगा।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार की खगोलीय घटना को खगोल विज्ञान की भाषा में प्लैनेटरी अलाइनमेंट’ या ग्रहीय संरेखण भी कहा जाता है, हालाँकि यह एक ‘प्लैनेटरी अलाइनमेंट’ या ग्रहीय संरेखण तो है, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं जैसे कि समय की कमी इस दौरान बुध (Mercury) और शुक्र (Venus) सूर्यास्त के लगभग तुरंत बाद क्षितिज के नीचे डूब जाएंगे। इसलिए आपके पास इन्हें देखने के लिए बहुत कम समय होगा।

मंगल (Mars) कहाँ है? 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मंगल इस समय सूर्य की दूसरी ओर होने के कारण इस ‘परेड’ का हिस्सा नहीं बनेगा।

क्या यह सभी ग्रह, हक़ीकत में एक साथ होंगे

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरी से ये ग्रह केवल पृथ्वी से देखने पर एक लाइन में दिखते हैं, अंतरिक्ष में ये एक-दूसरे से करोड़ों किलोमीटर दूर अपनी कक्षाओं में होते हैं।

कैसे देख सकते हैं?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि देखने के लिए ऊंचाई वाली जगह चुनें, यदि सामने ऊंची इमारतें या पेड़ हैं, तो आप नीचे स्थित ग्रहों (बुध और शनि) को नहीं देख पाएंगे। साथ ही मौसम का हाल ख़्याल रखना ही होता है कि इसके लिए आसमान का साफ और बादल रहित होना अनिवार्य है। और कई प्रमुख समस्याओं में से एक जोकि है प्रकाश प्रदूषण इसीलिए इस लाइट पोल्यूशन से भी बचें ,शहर की तेज लाइटों से दूर अंधेरी जगह पर यह नजारा और भी साफ एवं स्पष्ट दिखेगा।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर आप पहली बार ग्रहों को पहचान रहे हैं, तो थोड़ा सा मुश्किल भी हो सकता है,

क्या क्या दिखाई देगा?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यदि आकाश साफ रहता है, तो इन छह ग्रहों में से केवल चार ग्रहों को ही नग्न आंखों/ (साधारण आंखों) से देखा जा सकेगा। साथ ही यूरेनस ( अरूण ग्रह) और नेपच्यून ( बरुण ग्रह) को देखने के लिए किसी अच्छी दूरबीन (टेलीस्कोप) या (विशेष बिनाकुलर) की आवश्यकता होगी। सच तो यही है कि यहाँ तक कि बुध (Mercury) को देख पाना भी कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, जो लोग इन ग्रहों को एक कतार में देखना चाहते हैं, उन्हें 28 फरवरी को सूर्यास्त के लगभग 25 से 30 मिनट बाद पश्चिम दिशा के आकाश की तरफ़ देखना चाहिए। लेकिन अगर आपको और भी अधिक स्पष्ट एवं सार्थक नज़ारा देखना है तब एक शर्त है कि इसके लिए साफ आसमान, पश्चिमी क्षितिज का स्पष्ट दृश्य और बेहतर अवलोकन के लिए किसी अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप या विशेष बिनाकुलर का होना जरूरी है।

इन छह ग्रहों में से चार ग्रह सूर्य के अत्यंत निकट होंगे, जो शाम के उजाले में केवल थोड़े समय के लिए ही दिखाई देंगे, या संभवतः कुछ को साधारण आंखों से बिल्कुल भी दिखाई न दें। शुक्र और बुध क्षितिज (धरती की रेखा) के सबसे करीब होंगे, उनके बाद शनि ग्रह और बरुण ग्रह का स्थान होगा। जबकि अरुण ग्रह और बृहस्पति ग्रह आकाश में काफी ऊंचाई पर स्थित होंगे। इस कारण तीन से अधिक ग्रहों को एक साथ देख पाना एक कठिन चुनौती हो सकती है। क्योंकि अरुण ग्रह बिना दूरबीन के दिखाई ही नहीं देता है।

यह खगोलीय घटना कितनी दुर्लभ है?

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को भारत में सूर्यास्त लगभग 6:20 PM (स्थान के अनुसार थोड़ा अलग) पर होगा। ग्रहों को देखने का सबसे अच्छा समय 6:45 PM से 7:15 PM के बीच होगा क्योंकि इसके बाद बुध ग्रह और शुक्र ग्रह और कुछ ही देर बाद में शनि ग्रह भी,क्षितिज से नीचे चले जाएंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मौसम साफ होने पर सामान्यतः अधिकांश रातों में भी कम से कम एक चमकदार ग्रह देखा जा सकता है। या अलग अलग समय में दो भी हो सकते हैं, या कुछ यूं कहें कि आमतौर पर सूर्यास्त के आसपास दो या तीन ग्रह भी दिखाई दे जाते हैं, जोकि उनकी स्थिति एवं समय पर निर्भर करता है कि कब कौनसा ग्रह दिखाई देगा, लेकिन कभी कभार ही बिना किसी खगोलीय उपकरण के चार या पांच चमकदार ग्रहों को एक साथ देखा जा सकता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चार या पांच ग्रहों का नग्न आंखों (साधारण आंखों) से दिखने वाला स्पष्ट एवं दृश्य संरेखण (Alignment) कई वर्षों में एक बार ही घटित होता है।

वैसे तो समय समय पर ज़्यादातर 

मंगल, बृहस्पति और शनि ग्रह अक्सर रात के आकाश में दिखाई देते हैं। लेकिन जब शुक्र और बुध भी उनके साथ जुड़ जाते हैं, तो चार या पांच ग्रहों का यह मिलन अपने आप में कुछ विशेष हो जाता है। क्योंकि शुक्र और बुध, पृथ्वी की तुलना में सूर्य के बहुत करीब परिक्रमा करते हैं और उनकी कक्षाएं भी छोटी व तेज होती हैं।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शुक्र ग्रह को उन कुछ महीनों के दौरान और भी स्पष्ट देखा जा सकता है जब वह आकाश में सूर्य से सबसे दूर होता है, और यह सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से कुछ पहले दिखाई देता है। वहीं बुध, जोकि मात्र 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है, या यूं कहें कि बुद्ध ग्रह का वर्ष,पृथ्वी के लगभग 88 दिनों के बराबर होता है,आमतौर पर यह सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से पहले केवल दो सप्ताह या कभी-कभी केवल कुछ दिनों के लिए ही दिखाई देता है।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगली ऐसी खगोलीय घटना अक्टूबर 2028 के अंत में घटित होगी, जब सूर्योदय से पहले पांच ग्रह एक साथ दिखाई देंगे। इसके बाद, फरवरी 2034 के अंत में, पांच ग्रह फिर से सूर्यास्त के बाद दिखाई देंगे, हालांकि उस दौरान भी शुक्र और बुध को उतना स्पष्ट देख पाना कुछ चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्या सभी 6 ग्रह नग्न आंखों से दिखाई देंगे?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सभी छह ग्रह नग्न आंखों से नहीं दिखाई देंगे।

नग्न आंखों से तेज़ चमक वाले ग्रह: शुक्र, बृहस्पति, शनि, और कभी-कभी बुध देख पाए जाते हैं। यूरेनस और नेप्च्यून के लिए टेलीस्कोप या दूरबीन की ज़रूरत पड़ेगी ही।

क्या होता है दूरी का भ्रम

(Optical Illusion): खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूरी सौर प्रणाली में भौतिक रूप से एक सीधी रेखा में होने जैसा नहीं होगा, लेकिन पृथ्वी से देखने वाले के दृष्टिकोण से ये लगभग एक विस्तृत रेखा या एक साथ दिखाई देंगे, यह एक दृष्टि-प्रतिबद्ध संरेखण (line-of-sight alignment) है।

क्या होगा धरती पर इसका असर।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सही ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान, इसीलिए सबसे पहले ठीक से जानें उसके बाद ही मानें, और अंधविश्वासों से रखें पूरी दूरी और नहीं होनी चाहिए कोई भी मजबूरी, साथ ही अंधविश्वासों से नाता तोड़ें और विज्ञान से नाता जोड़ें क्योंकि खगोल विज्ञान में किसी भी ग्रहों के पार्श्व प्रभाव धरती पर किसी तरह का विपरीत प्रभाव नहीं डालते (जैसे भूकंप, मौसम में बदलाव या मनोवैज्ञानिक प्रभाव)। एवं इसका कोई भी अनिष्टकारक एवम् अलौकिक प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले लोगों पर कभी भी नहीं होता है।

Views: 107

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *