गृहकलह से टूटा घर: मां ने मासूम संग नहर में लगाई छलांग, बच्ची की मौत
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के अर्री ग्राम पंचायत स्थित कपसिहवा टोले पठानडीह में रविवार को एक दर्दनाक घटना ने हर आंख नम कर दी।
26 वर्षीय शहीदुन्निशा, जिसकी शादी को अभी एक साल भी ठीक से नहीं बीता था, अपनी दो माह की दुधमुंही बच्ची को सीने से लगाए घर से निकली। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह कदम उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा और भयावह फैसला बन जाएगा।
घर से करीब एक किलोमीटर दूर बह रही सरयू नहर के किनारे पहुंचकर उसने बच्ची के साथ पानी में छलांग लगा दी। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने मां-बेटी को डूबते देखा तो शोर मचाया और दौड़कर दोनों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मां को गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोहरतगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
एक साल पहले बसा था घर, अब मातम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शहीदुन्निशा की शादी कपसिहवा निवासी मो. मुस्तकीन से हुई थी, जो दुबई में रहकर कमाई करते हैं। गांव में वह ससुराल पक्ष के साथ रह रही थी।
बताया जा रहा है कि बीते दिनों घरेलू बात को लेकर ससुराल में कहासुनी और विवाद हुआ था। उसी तनाव से क्षुब्ध होकर उसने यह कदम उठाया — ऐसी प्रारंभिक जानकारी सामने आई है।
वहीं, मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट और नहर में धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
गांव में सन्नाटा, लोगों के मन में सवाल
जिस घर में दो माह पहले किलकारियां गूंजी थीं, आज वहां मातम पसरा है।
एक मां जिंदा है — लेकिन उसकी गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई।
यह घटना कई सवाल खड़े करती है —
क्या घरेलू विवाद इतना गहरा हो सकता है कि मां अपनी मासूम के साथ मौत चुन ले?
क्या परिवारों में संवाद और सहानुभूति की कमी ऐसे हादसों को जन्म दे रही है?
क्या दहेज और मानसिक दबाव अब भी बेटियों की जिंदगी को तोड़ रहे हैं?
संवेदनशील अपील
घरेलू विवाद का समाधान संवाद, समझ और कानून के सहारे ही संभव है।
कोई भी महिला यदि प्रताड़ना या मानसिक तनाव से गुजर रही है, तो उसे चुप न रहकर परिवार, समाज या प्रशासन से मदद लेनी चाहिए।
एक पल का आवेश एक पूरी जिंदगी छीन सकता है — यह घटना उसी की कड़वी मिसाल बन गई है।
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