40 दिन की तपस्या के बाद उमड़ा आस्था का सागर महा अभय शंकर साहब की भव्य झांकी यात्रा से गूंजा सिद्धार्थनगर
उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर।
आस्था, इतिहास और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब भारतीय एकलव्य पार्टी के तत्वावधान में पूज्य कुल देवता, द्रविण शिरोमणि, विश्व धनुर्धर प्रविण शिरोमणि महा अभय शंकर साहब जी की भव्य झांकी यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निकाली गई।
40 दिनों तक चले अभय चालीसा पाठ, साधना और धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात यह विशाल यात्रा मुख्यालय के प्रमुख मार्गों से होकर जिला जेल के सामने स्थित बीएसए ग्राउंड में पहुंची, जहां भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि समाज अपने महापुरुषों के प्रति गहरी आस्था और सम्मान रखता है।
इतिहास और परंपरा की विरासत
अनुयायियों का मानना है कि महा अभय शंकर साहब जी ने समाज में साहस, सेवा, आत्मसम्मान और संगठन की भावना का संचार किया। उनकी प्रेरणा ने समाज को भयमुक्त, संगठित और आत्मगौरव से परिपूर्ण जीवन जीने का मार्ग दिखाया।
इसी ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखते हुए हर वर्ष आयोजित होने वाली यह झांकी यात्रा अब एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का कार्य कर रही है।
सांसद की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महापुरुषों के आदर्श समाज को नई दिशा देते हैं और हमें उनके बताए साहस, सेवा और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलकर समाज को सशक्त बनाना चाहिए। उन्होंने आयोजन की भव्यता और अनुशासन की सराहना की।
सामाजिक एकता की मिसाल
कार्यक्रम में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्गों की ऐतिहासिक भागीदारी रही। पूरा वातावरण भक्ति गीतों, जयकारों और उत्साह से गूंजता रहा। अनुशासन और संगठन की शक्ति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की।
प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
राधेश्याम सिंह निषाद,
सुरेश सिंह निषाद,
दीपक सिंह निषाद,
राजू सिंह निषाद,
कोडाई सिंह निषाद,
रामचंद्र निषाद,
संदीप निषाद,
तोलन सिंह निषाद,
लोटा राम निषाद सहित अन्य गणमान्य लोग।
आस्था से आत्मगौरव तक
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना, संगठन और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की प्रेरणा बनकर उभरा। अनुयायियों ने संकल्प लिया कि वे महापुरुष के विचारों को आगे बढ़ाते हुए समाज में एकता, सेवा और आत्मसम्मान की भावना को सशक्त करेंगे।
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