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ड्यूटी से लौटते कर्मचारी की दर्दनाक सड़क हादसे में मौत, परिवार ने प्रशासन से मुआवज़े और न्याय की लगाई गुहार

सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के थाना जोगिया उदयपुर क्षेत्र से एक हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ सिद्धार्थनगर महोत्सव में ड्यूटी कर लौट रहे एक कर्मचारी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल एक परिवार का सहारा छीन लिया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारी सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम गंगवाल निवासी कर्मचारी दिनांक 30 जनवरी 2026 को नौगढ़–कपिलवस्तु महोत्सव में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद घर लौट रहा था। बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान ही उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी, जिस पर उसने उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर समय से पहले घर जाने का फैसला किया।
शाम लगभग 7 बजकर 45 मिनट के आसपास, वह अपनी स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल से जब सोतरीया कस्बे से आगे पुल के पास पहुँचा, तभी सामने से आ रही एक अज्ञात मोटरसाइकिल ने तेज रफ्तार और लापरवाही से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कर्मचारी सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया।


 अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
हादसे के बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए घायल कर्मचारी को तत्काल जिला अस्पताल पहुँचाया। लेकिन गंभीर चोटों के चलते डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर गांव पहुँची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके असमय निधन से पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे रह गए हैं। परिवार का कहना है कि अब उनके सामने रोज़ी-रोटी और बच्चों के भविष्य का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
परिजनों की आंखों में आंसू और दिल में सवाल है कि


अगर वह ड्यूटी पर तैनात था,


अगर उसके पास लिखित आदेश मौजूद हैं,


और अगर तबीयत खराब होने पर वह अनुमति लेकर घर लौट रहा था,


तो फिर उसके परिवार को अब तक कोई ठोस सरकारी सहयोग क्यों नहीं मिला?

 संगठन का बड़ा दावा

मृतक के संगठन के अध्यक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सिद्धार्थनगर महोत्सव के दौरान इससे पहले भी एक कर्मचारी के साथ हादसा हुआ था, उस समय प्रशासन की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक किसी भी पीड़ित परिवार को ठोस मदद नहीं मिल सकी।
संगठन का यह भी दावा है कि मृतक के पास लिखित दस्तावेज और प्रमाण मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि वह पांच दिवसीय सिद्धार्थनगर महोत्सव में विधिवत रूप से ड्यूटी पर तैनात था। इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि ड्यूटी लिखित रूप से नहीं लगाई गई थी।

 प्रशासन के सामने खड़े सवाल

इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था है?
हादसे की स्थिति में पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता क्यों नहीं मिलती?
क्या केवल फाइलों में दर्ज आदेश ही किसी कर्मचारी की मेहनत और ड्यूटी को साबित करते हैं?

 परिवार और संगठन की मांग

परिवार और संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि—
मृतक को ड्यूटी के दौरान मृत कर्मचारी माना जाए
पीड़ित परिवार को सरकारी मुआवज़ा दिया जाए
बच्चों की शिक्षा और परिवार की आजीविका की जिम्मेदारी ली जाए
हादसे के जिम्मेदार अज्ञात वाहन चालक की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए

 न्याय की आस

यह मामला अब केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि यह उन सैकड़ों कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान का सवाल बन गया है, जो आयोजनों और सरकारी कार्यक्रमों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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