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SDM आवास के सामने चोरी से मचा हड़कंप, व्यापारियों का बाजार बंद कर विरोध

सिद्धार्थनगर / बांसी
जनपद सिद्धार्थनगर के बांसी कस्बे में उस समय हड़कंप मच गया जब उप जिलाधिकारी (SDM) बांसी और पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) बांसी के आवास के ठीक सामने स्थित एक प्रतिष्ठित व्यापारी की दुकान में चोरी की घटना सामने आई। घटना के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कस्बे की कई दुकानों को बंद कर विरोध दर्ज कराया गया।
 क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका बांसी अध्यक्ष पद के पूर्व प्रत्याशी एवं प्रतिष्ठित व्यापारी विष्णु जयसवाल उर्फ सोनू जयसवाल की किराना दुकान को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया।
पीड़ित व्यापारी के अनुसार—
विभिन्न कंपनियों की स्कीम के माध्यम से प्राप्त लगभग 100 ग्राम सोना
करीब 1 किलो चांदी
मोबाइल फोन
दुकान में लगा सीसीटीवी कैमरा और डीवीआर सिस्टम
चोर अपने साथ ले गए।
हालांकि चोरी गए सामान की सटीक कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है और पुलिस द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।
व्यापारियों में आक्रोश
घटना संवेदनशील स्थान पर होने के कारण व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारियों के आवास के सामने ही चोरी हो रही है तो आम बाजार की सुरक्षा कैसी होगी?
विरोध स्वरूप कई व्यापारियों ने बाजार बंद कर नाराजगी जताई और पुलिस से शीघ्र खुलासे की मांग की।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली बांसी पुलिस मौके पर पहुंची।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए।
पुलिस क्षेत्राधिकारी रोहिणी यादव भी मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।

जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर ने किया विद्यालय का निरीक्षण, प्रधानाध्यापक से मांग स्पष्टीकरण

सिद्धार्थनगर। 24 फरवरी 2026/जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी.एन. द्वारा पीएम श्री कम्पोजिट, विद्यालय, सोनखर, विकास खण्ड बांसी तथा मॉडल प्राइमरी स्कूल सूपाराजा का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा बच्चों से पढ़वाया गया। जिसमें कुछ बच्चे पढ़ पाये, कुछ नही। बच्चे ड्रेस पहने थे। बच्चों के न पढ़ पाने पर जिलाधिकारी ने प्रधानाध्यापक गीता वर्मा का स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने साफ-सफाई व्यवस्था ठीक कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी द्वारा पीटीएम रजिस्टर, निपुण तालिका, शिक्षक डायरी, साप्ताहिक आकलन ट्रैकर, मिड-डे मील रजिस्टर आदि को देखा गया। मॉडल प्राइमरी स्कूल सूपाराजा में प्रधानाध्यापक जया साहनी का रजिस्टर पर हस्ताक्षर था किन्तु मौके पर उपस्थित नही थी। जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए शो-का नोटिस निर्गत करने का निर्देश दिया।

मदद चाहिए? कृपया पहले मरने का कष्ट करें

भारत में लोकतंत्र पूरी तरह जीवित है, बस नागरिक का जीवित रहना थोड़ा असुविधाजनक माना जाने लगा है। यदि आपकी पेंशन अटकी है, इलाज के पैसे नहीं हैं, सड़क टूटी पड़ी है या न्याय वर्षों से लंबित है, तो सबसे बड़ी गलती यही है कि आप अभी तक ज़िंदा हैं। जीवित व्यक्ति आवेदन देता है, दफ्तरों के चक्कर काटता है, निवेदन करता है और बदले में “कल आइए”, “साहब मीटिंग में हैं”, “फाइल ऊपर गई है” या “कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी” जैसे अमर वाक्य प्राप्त करता है। व्यवस्था भी क्या करे, जीवित आदमी में इमरजेंसी वाली चमक नहीं होती, न मीडिया की ब्रेकिंग बनता है, न ट्वीट योग्य संवेदना जगाता है।

लेकिन जैसे ही कोई हादसा होता है, एक मौत, एक आत्महत्या, एक वायरल वीडियो और व्यवस्था में करंट दौड़ जाता है। जहां फाइल महीनों से धूल खा रही थी, वहां एम्बुलेंस से तेज़ फैसले दौड़ने लगते हैं। नेता संवेदना व्यक्त करते हैं, अधिकारी दौरा करते हैं, जांच बैठती है, मुआवजा घोषित होता है और नौकरी का आश्वासन भी मिल जाता है। जो काम जीवित व्यक्ति वर्षों में नहीं करा पाया, वह मृतक कुछ घंटों में कर दिखाता है। जीते जी इलाज के लिए पचास हजार नहीं मिलते, मरने के बाद पांच लाख का मुआवजा मिल जाता है। जीते जी सड़क नहीं बनती, हादसे के बाद रातों-रात डामर बिछ जाता है; जीते जी सुनवाई नहीं होती, मौत के बाद विशेष जांच दल बैठ जाता है। मानो प्रशासन का मौन सूत्र हो, रोकथाम महंगी है, मुआवजा सस्ता पड़ता है।

संवेदनाएं भी अब मानो सरकारी कैलेंडर से संचालित होती हैं। घटना के दो घंटे बाद ट्वीट, छह घंटे बाद दौरा, चौबीस घंटे बाद मुआवजा, अड़तालिस घंटे बाद नई खबर और पुरानी फाइल बंद। धीरे-धीरे नागरिकों के बीच यह धारणा घर करती जा रही है कि जीवित इंसान समस्या है और मृत इंसान “मामला” बन जाता है। यह व्यंग्य जरूर है, पर यदि इसे पढ़कर हँसी नहीं आती तो शायद इसलिए कि सच इसके बहुत करीब खड़ा है।

विद्युत विभाग के पूर्व कर्मी द्वारा किया गया जालसाजी, अब जबरन धन उगाही पर ऊतारु

कुशीनगर। जनपद के पश्चिमी छोर पर स्थित खोठ्ठा बाजार में एक विद्युत कर्मी द्वारा पहले जालसाजी करके फंसाया और अब जबरन धन उगाही कर ऊतारु है।

कनेक्शन के नाम पर 2500 रुपए हड़पे 

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुशीनगर जनपद के मोतीचक खंड अन्तर्गत स्थित ग्राम सभा बरवा बावन निवासी ब्यासमुनी उपाध्याय की पत्नी ज्योति उपाध्याय को 2016 में विद्युत विभाग कर्मी सदानंद यादव द्वारा यह बताया गया कि आपके राशनकार्ड पर मात्र 2500 रुपये के पंजीकरण खर्च पर विद्युत कनेक्शन हो जाएगा और आपका बिल भी नहीं आएगा. महिला ने विद्युत कर्मी की बातों पर विश्वास करके 2500 रुपये दे दिया गया. विद्युत कर्मी सदानंद ने महिला के घर में मीटर लगा दिया और बताया कि यह कनेक्शन गरीब परिवार के लिए है इसलिए इसके कागजात नहीं दिए जाते।

9 वर्षों बाद ठगी का पता चला

9 वर्षों बाद इस फरवरी माह में विभागीय जांच के दौरान महिला को ज्ञात हुआ कि विद्युत कर्मी सदानंद यादव ने धोखा देकर 2500 रुपये ऐंठ लिए और विश्वास दिलाने के लिए फर्जी तरीके से बिजली मीटर लगा दिया।

20 हजार में बिल माफ कराने का दावा

धोखाधड़ी का खुलासा होने पर ज्योति ने विद्युत कर्मी से नाराजगी व्यक्त की तो वह कहा कि जेई साहब से बात करके मामले को खत्म करवा देगा.

दूसरे दिन सदानंद ने ज्योति को बताया कि विभागीय गड़बड़ी के कारण ऐसा हो गया. आपका बिल सवा लाख के लगभग है. साहब 20000 रुपये में पूरा बिल माफ करके नया कनेक्शन दे देंगे. इस बात का विश्वास दिलाने के लिए कर्मी द्वारा 15 फरवरी को एक आनलाइन विद्युत कनेक्शन का मैसेज महिला के ह्वाट्सएप पर भेज कर बताया कि साहब कनेक्शन कर दिए हैं, अब आप फ़ौरन बीस हजार रुपये दे दिजिए ताकि आपका दूसरा मीटर लग जाए. महिला द्वारा धन की व्यवस्था करके देने का आश्वासन दिया गया. जब महिला द्वारा धन की व्यवस्था ना होने की बात कही गई तो उक्त कर्मी बिगड़ गया और घर पहुंच कर कहा कि आप 500 रुपये दीजिए नहीं तो बिजली का कनेक्शन काट देंगे. स्थिति को देखते हुए महिला ने सदानंद को आनलाइन 500 रुपये दे दिए।

विद्युतकर्मी स्थाई कर्मचारी नहीं है 

स्थानीय विद्युत केंद्र पर जाने के बाद महिला को ज्ञात हुआ कि उक्त विद्युत कर्मी सदानंद यादव अब विभाग का नियमित कर्मचारी नहीं है फिर भी विभाग के कर्मियों से जान पहचान बना कर अपना उल्लू सीधा करता रहता है।

विद्युत अभियंता से की गई शिकायत 

 इस सम्बन्ध में बात करने के लिए जब स्थानीय विद्युत अभियंता महेंद्र प्रसाद से उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि विभागीय व्यस्तता के कारण वह अभी नहीं मिल सकते।

रिपोर्ट: अजीत प्रताप सिंह 

सिद्धार्थनगर में फिल्म के विरोध में उभरा आक्रोश, राज्यपाल के नाम प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर में फिल्म “Yadav Love Story” को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। बुधवार को बड़ी संख्या में यादव समाज के लोग कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए फिल्म पर रोक लगाने की मांग की।


धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि फिल्म की विषयवस्तु समाज विशेष की भावनाओं को आहत कर सकती है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन समाप्त किया गया।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
फिल्म “Yadav Love Story” के प्रदर्शन/प्रसारण पर तत्काल रोक।
फिल्म निर्माण से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक जांच।
भविष्य में सामाजिक समरसता बनाए रखने हेतु प्रशासनिक निगरानी।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
धरना-प्रदर्शन में सुभाष चंद्र यादव, नासिर, सुनील यादव पहलवान, चंद्रमणि यादव, कमलेश यादव, संजीत, चंद्रहास यादव, अनूप कुमार यादव, प्रमोद कुमार, संदीप पटवा, मनीष कुमार, उमेश यादव, ईश्वर यादव, जसवंत, राकेश यादव, धीरज यादव, शिवकुमार, रितेश गुप्ता, कमलेश कुमार, महेश यादव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
बताया गया कि चकबंदी विभाग के एसओसी ललित मिश्रा को ज्ञापन सौंपा गया, जिसे प्रशासन तक अग्रसारित किया गया है।
प्रशासन की स्थिति
जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित बिंदुओं की विधिक समीक्षा की जा रही है। किसी भी फिल्म पर रोक या आपराधिक कार्रवाई का निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रचलित कानूनों के तहत ही लिया जाता है।


यह समाचार धरना-प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर प्रकाशित किया जा रहा है। फिल्म के निर्माताओं या संबंधित पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रशासन ने आमजन से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी

सिद्धार्थनगर। टीईटी (TET) अनिवार्यता के खिलाफ टीएफआई के निर्देश पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय महिला शिक्षक संघ सहित अन्य संगठन हाथों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं।

22 फरवरी को चला ट्विटर अभियान 

22 तारीख को संगठनों के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर शिक्षक-शिक्षिकाओं ने वृहद ट्विटर अभियान चलाया था। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष इंद्रसेन सिंह ने बताया कि, राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सभी अध्यापकों ने 22 को ट्विटर अभियान चलाया था और 23 से लेकर 25 फरवरी तक सभी शिक्षक हाथों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे।

26 फरवरी को देंगे ज्ञापन: इंद्रसेन सिंह 

इंद्रसेन सिंह ने बताया कि,”उसके बाद फिर सभी शिक्षक 26 फरवरी को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करेंगें। वहां से पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपेंगे। यदि फिर भी टीईटी अनिवार्यता को अध्यादेश लाकर समाप्त नहीं किया गया। तब मार्च के मध्य में आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए शिक्षक दिल्ली कूच करेंगे।”

सिद्धार्थनगर: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 321 जोड़े विवाह बंधन में बंधे

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत रविवार को रतन सेन डिग्री कॉलेज परिसर में भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया। इस आयोजन में 384 पंजीकृत जोड़ों में से 321 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। पूरे परिसर में उत्सव और उल्लास का माहौल देखने को मिला, जहां 321 नवदम्पतियों ने एक साथ अपने नए जीवन की शुरुआत की।

अलग-अलग समुदायों के जोड़ों का धार्मिक रीति-रिवाज से विवाह

इस सामूहिक विवाह समारोह में 229 हिंदू, 65 बौद्ध और 27 मुस्लिम समुदाय के जोड़ों का विवाह उनके-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया।

हिंदू जोड़ों का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडितों द्वारा कराया गया।

मुस्लिम समुदाय के जोड़ों का निकाह मौलाना द्वारा संपन्न हुआ।

बौद्ध समुदाय के जोड़ों का विवाह धर्माचार्यों की उपस्थिति में कराया गया।

इस अवसर पर बांसी, मिठवल, खेसरहा एवं नगरीय क्षेत्र बांसी के लाभार्थी जोड़े शामिल हुए।

जनप्रतिनिधियोंने दीप प्रज्ज्वलन कर किया शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद जगदंबिका पाल, विधायक बांसी जय प्रताप सिंह, विधायक शोहरतगढ़ विनय वर्मा, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने दीप प्रज्ज्वलन और गणेश पूजन के साथ किया। सभी अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद दांपत्य जीवन की कामना की।

प्रत्येक वधू को 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

जिलाधिकारी ने बताया कि प्रत्येक वधू के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 60 हजार रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई है।

इसके अतिरिक्त—

लगभग 25 हजार रुपये की गृहस्थी सामग्री

15 हजार रुपये बारात स्वागत मद में व्यय

नवविवाहित जोड़ों को साड़ी, सूट का कपड़ा, चांदी की पायल-बिछिया, डिनर सेट, कूकर, ट्रॉली बैग, सीलिंग फैन, प्रेस, बिस्तर, कंबल, गद्दा, सूखे मेवे सहित अन्य आवश्यक घरेलू सामग्री वितरित की गई।

रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ने की घोषणा

सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब परिवारों की बेटियों की शादी को सम्मानजनक ढंग से संपन्न कराने का सशक्त माध्यम बनी है। उन्होंने नवदम्पतियों को रोजगार एवं प्लेसमेंट से जोड़ने तथा इच्छुक युवाओं को ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोजगार से जोड़ने की घोषणा भी की।

विधायक जय प्रताप सिंह और विनय वर्मा ने कहा कि यह योजना बिना भेदभाव सभी वर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है।

जिला पंचायत अध्यक्ष शीतल सिंह एवं भाजपा जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान ने भी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए इसे सरकार की जनकल्याणकारी पहल बताया।

सामूहिक विवाह योजना: गरीब परिवारों के लिए सहारा

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को बेटी की शादी में आर्थिक सहायता प्रदान कर सामाजिक सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है। सिद्धार्थनगर में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और एकता का उदाहरण बना।

नेपाल में दर्दनाक बस हादसा: त्रिशूली नदी में समाई यात्रियों से भरी बस, 18 की मौत

काठमांडू/पोखरा (नेपाल)।
नेपाल में एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। नेपाल के पोखरा-काठमांडू मार्ग पर चल रही एक यात्री बस काठमांडू के पास स्थित त्रिशूली नदी में गिर गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 27 अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बस पोखरा से काठमांडू की ओर जा रही थी। दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, हालांकि स्थानीय प्रशासन के अनुसार हादसा तीखे मोड़ पर बस के अनियंत्रित होने की वजह से हुआ हो सकता है। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर नदी में गिरी बस से यात्रियों को बाहर निकाला।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मृतकों में महिला और पुरुष यात्री शामिल हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार एक विदेशी पर्यटक, जो स्विट्जरलैंड से था, उसके भी हादसे में प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। आधिकारिक पहचान और विस्तृत सूची जारी की जानी बाकी है।
नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के सटीक कारणों—चालक की लापरवाही, ब्रेक फेल या सड़क की स्थिति—की पड़ताल की जा रही है।
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में संकरे और घुमावदार रास्तों के कारण सड़क हादसों की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और परिवहन कंपनियों से सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है।
स्थिति अपडेट:
मृतक: 18 (प्रारंभिक जानकारी)
घायल: 27
राहत-बचाव कार्य: जारी
जांच: प्रारंभ
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन और प्रारंभिक आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम आंकड़ों में परिवर्तन संभव है।)

“ट्रेन चोरी मामले में वांछित आरोपी गिरफ्तार, पिछले 4 वर्षों में 8 मुकदमे दर्ज होने का दावा”

प्रयागराज।
जीआरपी प्रयागराज ने ट्रेनों में कथित चोरी की घटनाओं से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति पर पिछले चार वर्षों में आठ मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों के सामान चोरी करने के मामलों में वांछित था। हालांकि इन मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा किया जाना शेष है।
जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक आरोपी को विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुसार की जाएगी।
पुलिस का यह भी कहना है कि ट्रेन यात्राओं के दौरान यात्रियों की लापरवाही कई बार अपराधियों को अवसर प्रदान करती है।
पुलिस की अपील
जीआरपी ने यात्रियों से अपील की है कि:
✔ कीमती सामान सुरक्षित रखें
✔ अटैची को चेन से बांधें
✔ मजबूत लॉक का प्रयोग करें
✔ संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत जीआरपी/आरपीएफ को दें
कानूनी स्थिति स्पष्ट
यह उल्लेखनीय है कि किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है। गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है।

पूर्वजों की धरती से जुड़ने कलानाखोर पहुंचे ऑस्ट्रेलियाई परिवार, भारतीय संस्कृति से हुए प्रभावित

खेसरहा (सिद्धार्थनगर)। खेसरहा विकासखंड के कलनाखोर गांव स्थित राम पियारी देवी सरोजिनी सिंह उ0मा0 विद्यालय में उस समय भावुक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से दो दंपति अपने पूर्वजों की मिट्टी से जुड़ने यहां पहुंचे। विद्यालय के प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया से आए दिनेश चंद्रा, उनकी पत्नी चंद्रा पोन्टी तथा उनके समधी रिचर्ड और समधन देवीना ने गांव की ऐतिहासिक विरासत को नजदीक से देखा और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।

गिरमिटिया मजदूर से जुड़ी है भावनात्मक कहानी

प्रधानाचार्य ने बताया कि, दिनेश चंद्रा के पूर्वज मूल रूप से कलनाखोर गांव के निवासी थे। ब्रिटिश शासनकाल में वे गिरमिटिया मजदूर के रूप में मजदूरी करने ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। विदेश में बसने के बावजूद उन्होंने अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया।

दिनेश चंद्रा के पूर्वजों ने अपने बच्चों को भारत की ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और सभ्यता के बारे में बताया करते थे। उन्हीं प्रेरणादायक बातों से प्रभावित होकर वे अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के साथ पूर्वजों की जन्मभूमि देखने भारत पहुंचे।

भारतीय संस्कृति से हुए प्रभावित 

विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराएं और आध्यात्मिकता विश्व में अद्वितीय हैं।

उन्होंने गांव के अतिप्राचीन राम जानकी मंदिर का दर्शन किया और उसके जीर्णोद्धार में सहयोग करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर है।

ऐतिहासिक विरासत को संजोने का संदेश

विदेश से आए मेहमानों ने गांव के बुजुर्गों से बातचीत कर अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीणों में भी उत्साह और गर्व का माहौल देखा गया।

प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह ने कहा कि, “यह क्षण गांव और विद्यालय के लिए ऐतिहासिक है। इससे नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा मिलेगी।”

गांव में बना उत्सव जैसा माहौल

ऑस्ट्रेलिया से आए मेहमानों के स्वागत में ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में अभिनंदन किया। लोगों ने इसे गांव के लिए गौरव का विषय बताया।

यह यात्रा न केवल एक परिवार की भावनात्मक वापसी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि चाहे लोग दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न बस जाएं, अपनी मातृभूमि और संस्कृति से जुड़ाव हमेशा बना रहता है।

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