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भारी भरकम बजट में पुरानी पेंशन पर चुप्पी, कर्मचारियों में निराशा और रोष

केंद्र सरकार के वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत वर्ष 2026–27 के लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये के बजट को विकासोन्मुख और व्यापक बताया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा — पुरानी पेंशन योजना (OPS) — इस बजट से नदारद दिखी। इसी बात को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश का माहौल है।

यह बात राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद बस्ती मंडल के मंडल अध्यक्ष अरुण कुमार प्रजापति ने कही। उन्होंने कहा कि बजट में हर क्षेत्र के लिए प्रावधान किए गए, लेकिन कर्मचारियों के बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा मानी जाने वाली पुरानी पेंशन पर न तो कोई चर्चा हुई और न ही किसी प्रकार का बजटीय संकेत मिला।

लंबे समय से चल रही है आर-पार की लड़ाई”

अरुण कुमार प्रजापति ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर संघर्षरत हैं। कई चरणों में आंदोलन, ज्ञापन और प्रदर्शन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी संगठनों ने इस लड़ाई को और व्यापक रूप से एकजुट होकर लड़ने का निर्णय लिया है।

सरकार से पुनर्विचार की अपील

मंडल अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से अपील की कि कर्मचारियों के भविष्य और बुढ़ापे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाए और ऐतिहासिक निर्णय लिया जाए।

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