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सलोंन में माहे रमजान के पहले दिन से रोजा इफ्तार का दौर जारी, मौला बक्स कॉलोनी में भव्य आयोजन

सलोंन, रायबरेली। नगर पंचायत सलोंन में पवित्र माहे रमजान की शुरुआत के साथ ही रोजा इफ्तार का दौर लगातार जारी है। पहले ही दिन से विभिन्न वार्डों में इफ्तार कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है, जहां रोजेदारों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दे रहे हैं।

मौला बक्स कॉलोनी में आयोजित हुआ रोजा इफ्तार कार्यक्रम

मिल्कियाना पूर्वी वार्ड स्थित मौला बक्स कॉलोनी में अख्तर सलमानी और अकबर सलमानी (ओमान) की ओर से भव्य रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। इस मौके पर रोजेदारों के लिए खजूर, फल, शरबत और विभिन्न व्यंजनों की विशेष व्यवस्था की गई थी।

इफ्तार के समय सभी ने सामूहिक रूप से रोजा खोला और रमजान की फजीलत पर चर्चा की।

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की रही मौजूदगी

इस मुबारक अवसर पर समाजसेवी एवं पूर्व चेयरमैन प्रत्याशी मोहम्मद इरफान सिद्दीकी, सभासद मो. फिरोज इद्रीसी, पूर्व सभासद इसरार हैदर (रानू), सभासद शरीफ (गड्डी), मो. जैद मेवाती, रईस इद्रीसी, आजम मेवाती, तनवीर सलमानी, नदीम मेवाती, पापा सलमानी, अशरफ कुरैशी, सैफ इद्रीसी और आफाक मछली वाले सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।

इफ्तार के बाद अदा की गई नमाज, अमन-चैन की मांगी दुआ

इफ्तार के बाद सभी ने सामूहिक रूप से नमाज अदा की और मुल्क में अमन, शांति और तरक्की के लिए दुआएं मांगीं। वक्ताओं ने कहा कि रमजान का महीना सब्र, त्याग और इंसानियत का पैगाम देता है।

रोजा इफ्तार जैसे आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द बढ़ता है, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान है।

टीएफआई के आह्वान पर टेट अनिवार्यता के विरोध में 26 फरवरी को धरना देंगे शिक्षक, बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक करेंगे पैदल मार्च

सिद्धार्थनगर। टीएफआई (Teachers Federation of India) के आह्वान पर गुरुवार को टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में जनपद में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह धरना अपराह्न एक बजे से बीएसए कार्यालय परिसर में शुरू होगा, जिसके बाद शिक्षक कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च करेंगे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे।

टीएफआई का आह्वान: टेट (TET)अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होंगे शिक्षक

टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने बताया कि, “आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है। ऐसे में अब उन पर टेट अनिवार्यता लागू करना नियमों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए शिक्षकों को राहत प्रदान करनी चाहिए।”

बीएसए कार्यालय परिसर में धरना, कलेक्ट्रेट तक निकलेगा पैदल मार्च

धरना कार्यक्रम के तहत जनपद भर के शिक्षक गुरुवार को अपराह्न एक बजे बीएसए कार्यालय परिसर में एकत्रित होंगे। यहां से शिक्षक शांतिपूर्ण ढंग से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे।

कलेक्ट्रेट में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिसमें टेट अनिवार्यता समाप्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी।

शिक्षकों से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील

राधेरमण त्रिपाठी ने जनपद के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें। उनका कहना है कि यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी की सहभागिता आवश्यक है।

टेट अनिवार्यता विवाद: क्या है पूरा मामला?

शिक्षकों का तर्क है कि आरटीई एक्ट से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने उस समय की निर्धारित शैक्षिक योग्यता और चयन प्रक्रिया के अनुसार नौकरी पाई थी। ऐसे में बाद में टेट की अनिवार्यता लागू करना उनके साथ अन्याय है।

लगातार तीसरे दिन काली पट्टी बांध शिक्षकों ने किया शैक्षिक कार्य- 26 को देंगे जिलाधिकारी को ज्ञापन

सिद्धार्थनगर। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का विरोध लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। खेसराहा विकास खंड के विभिन्न विद्यालयों में अध्यापकों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के निर्णय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने इसे अपने अनुभव और सेवा के साथ अन्याय बताते हुए निर्णय वापस लेने की मांग की है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष इंद्रसेन सिंह ने बताया कि तीन दिनों से शिक्षक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते हुए शांतिपूर्ण विरोध जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक टीईटी की अनिवार्यता समाप्त नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

26 फरवरी को देंगे ज्ञापन: इंद्रसेन सिंह 

उन्होंने आगे बताया कि 26 फरवरी को शिक्षक बीएससी ग्राउंड से पैदल मार्च निकालते हुए जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। यदि इसके बाद भी सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा दिल्ली कूच कर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

अनुभव के आधार पर मिले छूट: नीरज मिश्रा 

वहीं शिक्षक नीरज मिश्रा ने कहा कि वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों को अनुभव के आधार पर छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टीटी अनिवार्य करना उचित नहीं है। सरकार को शिक्षकों के अनुभव का सम्मान करना चाहिए।

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और इसे प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

 

Siddharthnagar district: साइबर फ्रॉड के 40 हजार रुपये पुलिस ने कराए वापस, जोगिया उदयपुर पुलिस की बड़ी सफलता

सिद्धार्थनगर। डॉ अभिषेक महाजन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर के आदेश के क्रम में साइबर अपराध एवं साइबर क्राइम रिकवरी/लीन के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना जोगिया उदयपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।

अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के कुशल निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी बांसी शुभेंदु सिंहके पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई।

एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

दिनांक 04.02.2026 को थाना जोगिया उदयपुर क्षेत्र के लखनापार निवासी मनोज कुमार द्वारा एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि यूपीआई आईडी गलत अंकित हो जाने के कारण उनके खाते से 40,000 रुपये की गलत ट्रांजेक्शन हो गई थी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना जोगिया उदयपुर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

साइबर सेल की सक्रियता से पूरी धनराशि हुई रिकवर

थानाध्यक्ष अभय सिंह के नेतृत्व में उ0नि0 अवधेश यादव (प्रभारी साइबर सेल) एवं साइबर सेल टीम द्वारा तकनीकी जांच की गई। तत्पर प्रयासों के परिणामस्वरूप फ्रॉड की गई पूरी धनराशि 40,000 रुपये आवेदक के खाते में सफलतापूर्वक वापस करा दी गई।

इस कार्रवाई से पीड़ित को बड़ी राहत मिली है तथा आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

सराहनीय कार्य करने वाली टीम

श्री अभय सिंह – थानाध्यक्ष, थाना जोगिया उदयपुर

उ0नि0 अवधेश यादव – प्रभारी साइबर सेल

कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए सेनजीत निषाद

का0 विकास कुमार गोंड

का0 मृत्युंजय गुप्ता

का0 अजीत यादव

साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए पुलिस की अपील

पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत एनसीआरपी पोर्टल या नजदीकी थाना पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि को रिकवर कराया जा सके।

सिद्धार्थनगर: शंकराचार्य प्रकरण पर कांग्रेस ने जिला कलेक्टरेट को सौंपा ज्ञापन, मांगी उच्चस्तरीय जांच

सिद्धार्थनगर | 25 फरवरी 2026  | FT News Digital


सिद्धार्थनगर में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार और प्रताड़ना को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को सिद्धार्थनगर जिला कलेक्टरेट में ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष काजी सुहेल अहमद ने प्रधानमंत्री और जिलाधिकारी को प्रेषित इस ज्ञापन में पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घटना और आरोप
ज्ञापन के अनुसार, कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य और उनके शिष्यों को स्नान से रोका गया और उनके साथ आए बच्चों की चोटी खींच कर अपमानित किया गया।
साथ ही शंकराचार्य जी, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज होने की खबरें मिली हैं।
प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी
ज्ञापन सौंपने के मौके पर जिला कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे:
काजी सुहेल अहमद, कृष्णबहादुर सिंह, सुदामा प्रसाद, सतीश चन्द्र त्रिपाठी, शौकत भाभी, होरी लाल श्रीमान, डॉ. प्रमोद कुमार, आलोक कुमार, अनिल सिंह, भान मनिहार, राजन श्रीवास्तव, रितेश त्रिपाठी।
जिलाध्यक्ष काजी सुहेल अहमद ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में अत्यंत उच्च आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
राष्ट्रीय और संवैधानिक परिप्रेक्ष्य
धार्मिक स्वतंत्रता: संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के तहत नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक कार्यों का संचालन करने का अधिकार है।
कानून बनाम धार्मिक गरिमा: किसी भी आरोप की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, लेकिन धार्मिक पदाधिकारियों की गरिमा का सम्मान भी लोकतंत्र का हिस्सा है।
राष्ट्रीय विमर्श: मामला अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक कार्रवाई के संतुलन पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।
कांग्रेस की मांग
काजी सुहेल अहमद ने जिला कलेक्टरेट को सौंपे गए ज्ञापन में कहा:
पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अगर किसी स्तर पर अवैध या अनावश्यक प्रताड़ना हुई हो तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।
भविष्य में ऐसे धार्मिक अवसरों पर प्रशासनिक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
प्रशासनिक स्थिति
मामला जांचाधीन है और पुलिस/जिलाधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

“10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच गूंजी नवजात की किलकारी: एग्जाम सेंटर में नाबालिग छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म, मचा हड़कंप”

धार (मध्य प्रदेश) से स्पेशल रिपोर्ट
10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच परीक्षा केंद्र में नाबालिग छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म — हड़कंप, आश्चर्य और संवेदनशील मोड़
धार जिले के पीथमपुर थाना सेक्टर-1 के एक परीक्षा केंद्र में मंगलवार को एक ऐसा नजारा सामने आया, जिसे देखकर वहाँ मौजूद हर किसी के चेहरे पर आश्चर्य, चिंता, और सहानुभूति के भाव उभर आए।
10वीं बोर्ड परीक्षा दे रही एक नाबालिग छात्रा को गणित का पेपर देते समय अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। दर्द से परेशान होकर वह परीक्षा केंद्र के शौचालय की ओर चली गई — और इसी बीच वहाँ ही एक नवजात को जन्म दे दिया।


घटना का क्रम — किस तरह हुआ सब कुछ?
 सुबह करीब परीक्षा शुरू: छात्रा ने 10वीं बोर्ड का गणित का पेपर देना शुरू किया।
 ताकि कुछ घंटे के बाद… दर्द अचानक शुरू: पेट में तेज दर्द की शिकायत होने पर छात्रा बिना किसी को पहले बताए शौचालय की ओर चली गई।
 फिर वहीँ जन्म: थोड़ी ही देर में उसने एक बच्चे को जन्म दिया — समूचा परीक्षा केंद्र एकाएक हक्का-बक्का रह गया। 

परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों ने तुरंत 108 एंबुलेंस बुलाई और नाबालिग छात्रा व नवजात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पीथमपुर तक ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने पुष्टि की कि दोनों (जन्म देने वाली छात्रा और नवजात) फिलहाल *स्वस्थ और चिकित्सकीय निगरानी में हैं। �

जाँच में खुलासा — क्या हुआ असल में?
पुलिस ने छात्रा से पूछताछ की तो एक गंभीर और संवेदनशील तथ्य सामने आया — उसने बयान दिया कि उसके जीवन में पिछले दो वर्षों से एक युवक मौजूद था, जिसके साथ उसके सम्बन्ध रहे, और इसी से वह गर्भवती थी।
उस युवक के खिलाफ पुलिस ने कानूनी कार्रवाई (POCSO समेत) दर्ज कर मामला आगे जांच के लिए भेज दिया है। �

थाने की उप निरीक्षक चांदनी सिंगार ने बताया कि मामले की हर वैधानिक (कानूनी) पहलू से जांच की जा रही है, और आरोपी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 


परीक्षा-केंद्र में हड़कंप!
जैसे ही यह खबर फैल गई कि एक छात्रा ने जन्म दिया है, परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाएँ, छात्रों और पर्यवेक्षकों में हड़कंप मच गया। कुछ अभिभावक चिंतित नजर आए, तो कुछ स्टाफ सदस्यों ने तत्काल हरकत में आकर राहत कार्य शुरू किया।

एक शिक्षक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया,
“हम सभी के लिए यह स्थिति बिल्कुल असामान्य थी… हमें आशंका थी कि बच्ची को कोई स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन अस्पताल से जानकारी मिली कि दोनों स्वस्थ हैं।”

कानूनी और सामाजिक संवेदनाएँ
यह केवल एक विचित्र घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर संदेश है — खासकर जब नाबालिगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और संरक्षण की बात सामने आती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मामले अक्सर POCSO (पहुँचनीय बच्चों से यौन शोषण का कानून) के दायरे में आते हैं, और बच्चों की सुरक्षा तथा मनोवैज्ञानिक समर्थन महत्वपूर्ण होता है।

समाप्ति बयान
धार जिले के इस परीक्षा केंद्र की घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि हमारा समाज, अभिभावक, विद्यालय और प्रशासन मिलकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कैसी देख-रेख कर रहे हैं। एक तरफ़ जहां शिक्षा के लिए परीक्षा है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों के प्रति सतर्कता और समर्थन की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

लखनऊ में कारोबारी की मौत: बेटे अक्षत प्रताप सिंह पर हत्या का आरोप, पुलिस जांच जारी

स्थान: Lucknow
थाना: आशियाना | जांच एजेंसी: Uttar Pradesh Police
घटना की तिथि: 20 फरवरी (तड़के) | मामला दर्ज: 21 फरवरी


राजधानी लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र के सेक्टर-एल में रहने वाले 49 वर्षीय कारोबारी मानवेंद्र सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस ने उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, 21 फरवरी को मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की सूचना आशियाना थाने में दी गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ और घर की तलाशी के दौरान मामला हत्या का प्रतीत हुआ।
क्या है आरोप?
पुलिस के प्रारंभिक बयान के अनुसार, 20 फरवरी की तड़के पिता-पुत्र के बीच पढ़ाई और करियर को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान अक्षत प्रताप सिंह ने घर में रखी लाइसेंसी राइफल से गोली चलाई, जिससे मानवेंद्र सिंह की मृत्यु हो गई।
पुलिस का कहना है कि घटना के बाद शव को छिपाने का प्रयास किया गया। घर की तलाशी में प्लास्टिक ड्रम से शव का हिस्सा बरामद हुआ। अन्य हिस्सों की बरामदगी शहर के अलग क्षेत्र से की गई।
जांच में अब तक क्या सामने आया?
वारदात घर की ऊपरी मंजिल पर होने की आशंका।
हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश के संकेत।
फॉरेंसिक टीम द्वारा मौके से नमूने एकत्र।
लाइसेंसी हथियार को कब्जे में लेकर बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया।
आसपास के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच जारी।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
परिवार की स्थिति
घटना के समय घर में मौजूद अन्य सदस्य सदमे में हैं। पुलिस के अनुसार, परिवार को आवश्यक सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
आधिकारिक बयान
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विश्लेषण और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
महत्वपूर्ण सूचना (डिस्क्लेमर)
यह समाचार उपलब्ध पुलिस जानकारी और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

आज शाम परसा रेलवे क्रॉसिंग पर वीडियो वायरल

आज शाम परसा रेलवे क्रॉसिंग पर वीडियो वायरल
ट्रेन 55075 (गोरखपुर से बढ़नी पैसेंजर) शाम करीब 4:40 बजे परसा पहुंची


सिद्धार्थनगर।
आज (तारीख) शाम लगभग 4:40 बजे, जनपद के परसा रेलवे क्रॉसिंग पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे फाटक खुला होने और ट्रेन के करीब आने से पहले गति रोकने की घटना दिखाई दे रही है। वीडियो में मौजूद लोगों का दावा है कि ट्रेन नंबर 55075, जो गोरखपुर जंक्शन से बरहनी के लिए चलने वाली पैसेंजर ट्रेन है, फाटक पर पहुंची थी और फाटक समय पर बंद नहीं था।
इस वायरल वीडियो के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों ने ट्रेन के निकट आने पर देखा कि फाटक खुला पड़ा था। उन्होंने मौके पर जाकर कथित तौर पर गेटमैन को जगाया, जिसके बाद आनन-फानन में फाटक बंद किया गया और फिर ट्रेन को सुरक्षित रूप से आगे भेजा गया।
ट्रेन 55075 का पूरा समय सारिणी
रेलवे टाइमटेबल के अनुसार ट्रेन संख्या 55075 (गोरखपुर – बढनी पैसेंजर)
गोरखपुर जंक्शन से प्रतिदिन सुबह लगभग 11:00 बजे रवाना होती है और
लगभग 01:46 बजे परसा स्टेशन पर पहुँचती है जहाँ यह लगभग 2 मिनट के लिये रुकती है।
इसके बाद यह ट्रेन लगभग 02:20 बजे बरहनी स्टेशन पर पहुँचती है।


यह समय सारिणी यह दर्शाती है कि ट्रेन परसा पर करीब 01:46-01:48 बजे के बीच रुकती है। �
हालांकि वायरल वीडियो में शाम 4:40 बजे दिखाया गया है, हो सकता है ट्रेन का वास्तविक रनिंग-स्टेटस उस दिन देरी या विशेष स्थिति के कारण बदल गया हो।


आधिकारिक पुष्टि शेष
इस पूरे मामले को लेकर संबंधित रेलवे विभाग से संपर्क किया गया है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ है। विभाग की ओर से पुष्टि मिलते ही खबर अपडेट की जाएगी।
पत्रकारिता का नजरिया
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय स्रोतों के दावों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या विभाग पर दोषारोपण का उद्देश्य नहीं है। यदि जांच में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो उचित विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

गोरखपुर में रेजिडेंट डॉक्टर से छेड़छाड़ का आरोप

गोरखपुर (मुख्यमंत्री का गृह जनपद)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। All India Institute of Medical Sciences, Gorakhpur में तैनात नागालैंड की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने तीन युवकों पर छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणी और नस्लीय उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
पीड़िता के अनुसार, रविवार 22 फरवरी की रात लगभग 8 बजे वह शहर के एक मॉल से लौट रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार तीन युवकों ने कथित रूप से करीब डेढ़ किलोमीटर तक उनका पीछा किया। आरोप है कि रास्ते भर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं और एम्स गेट नंबर-2 के पास गलत तरीके से छूने की कोशिश की गई। शोर मचाने पर आरोपी मौके से फरार हो गए।
संगठन ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़िता ने मामले की शिकायत North East Federation of All India Resident Doctors (NAFORD) से भी की है। संगठन ने इसे नस्लीय और लैंगिक उत्पीड़न का गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई
गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ के अनुसार, पीड़िता की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज की जांच में एक संदिग्ध बाइक चिन्हित की गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
मुख्यमंत्री के गृह जनपद में इस तरह की घटना ने महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषकर स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत महिला डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने त्वरित और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।


FTन्यूज़ इस प्रकरण पर सतत नजर बनाए हुए है। आधिकारिक पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण बना औपचारिकता?

नौगढ़ में “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम पर सवाल


सिद्धार्थनगर। शासन की मंशा जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त कर 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने की है, वहीं जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की पोल खुलती दिखाई दे रही है। विकास खण्ड नौगढ़ के सभागार में आयोजित “पोषण भी, पढ़ाई भी” प्रशिक्षण कार्यक्रम में अव्यवस्था के आरोप सामने आए हैं।
दूर-दराज़ क्षेत्रों से प्रशिक्षण के लिए पहुंचीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण के नाम पर केवल एक दिन औपचारिक सत्र आयोजित किया गया, जबकि शेष दिनों में न तो प्रशिक्षक उपस्थित रहे और न ही समुचित व्यवस्था दिखाई दी।
मंगलवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई कार्यकत्रियों को सभागार में प्रवेश तक नहीं मिला। इसके विरोध में उन्होंने प्रशिक्षण स्थल के बाहर बैठकर रोष जताया। कार्यकत्रियों का कहना है कि विभागीय ग्रुप में प्रशिक्षण संबंधी निर्देश जारी थे, इसके बावजूद मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था।
योजना का उद्देश्य क्या है?
“पोषण भी, पढ़ाई भी” वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित न रखकर उन्हें प्री-स्कूल शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना है।
ईसीसीई (ECCE) मॉडल के तहत खेल-आधारित शिक्षण पद्धति पर कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर ढंग से हो सके। इस प्रशिक्षण के लिए शासन द्वारा स्टेशनरी, भोजन, प्रशिक्षण स्थल किराया तथा दूर से आने वाली कार्यकत्रियों के टीए आदि मदों में बजट आवंटित किया जाता है।
ऐसे में यदि प्रशिक्षण ही व्यवस्थित रूप से न हो, तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।
कार्यकत्रियों की पीड़ा
प्रदर्शन कर रहीं कार्यकत्रियों ने मीडिया को बताया कि:
पिछले तीन दिनों में केवल एक दिन प्रशिक्षण हुआ।
अन्य दिनों में प्रशिक्षक उपस्थित नहीं रहे।
मंगलवार को कई कार्यकत्रियों को सभागार में प्रवेश नहीं दिया गया।
दूरस्थ क्षेत्रों से आने के बावजूद समय और संसाधनों की बर्बादी हुई।
प्रशिक्षण न होने से उनके नियमित कार्य भी प्रभावित हुए।
धूप में बैठकर विरोध जता रहीं कार्यकत्रियों ने मांग की कि प्रशिक्षण पारदर्शी और पूर्ण रूप से कराया जाए, ताकि शासन की मंशा धरातल पर पूरी हो सके।
प्रशासनिक पक्ष की प्रतीक्षा
हालांकि, इस संबंध में जिला कार्यक्रम विभाग का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका था। विभागीय प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की सक्रियता की चर्चा अक्सर होती रही है। ऐसे में कार्यक्रम विभाग पर लगे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से बच्चों और कार्यकत्रियों तक पहुंच सके।

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