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फौजी प्रवीण तोमर को मिला राष्ट्रीय गौरव अवार्ड

बागपत। विवेक जैन। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम दिवस पर दिल्ली के रोहिणी में स्थित टेक्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीस में भारत गौरव अवार्ड समारोह-2026 का शानदार आयोजन किया गया। इस मौके पर बागपत के वाजिदपुर गांव के रहने वाले फौजी प्रवीण तोमर के कार्यों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय गौरव अवॉर्ड- 2026 से पुरस्कृत किया गया और उनके कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई। फौजी प्रवीण तोमर जेसलमेर राजस्थान में तैनात है और देश की सेवा में लगे हुए है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर व ऑपरेशन पुलवामा में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। हर कोई व्यक्ति उनके कार्यों की सराहना कर रहा है और उनसे प्रेरणा लेने की बात कह रहा है। उन्हें राष्ट्रीय गौरव अवार्ड- 2026 से पुरस्कृत होने पर उन्हें अनेक लोगों ने बधाई दी है। इस मौके पर कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव परमवीर चक्र विजेता, एडवोकेट कूमर इंद्रनील कॉर्डिनेटर, डॉ भरत झा कनवेनर, जतिन राणा को-कनवेनर, डीएफएस के पूर्व चीफ व तीन बार के राष्ट्रपति पदक विजेता डॉ धर्मपाल भारद्वाज, इंटरनेशनल अवार्डी व महामहिम राष्ट्रपति व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित सीनियर जर्नलिस्ट विपुल जैन समेत काफी लोग मौजूद रहे।

माघ मेला देखकर लौट रहे युवकों पर कहर, अज्ञात वाहन की टक्कर से एक की मौत, दूसरा गंभीर घायल

सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के कोतवाली बंसी क्षेत्र में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। माघ मेला बंसी देखकर घर लौट रहे मोटरसाइकिल सवार दो युवक अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए, जिसमें एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना का पूरा विवरण
यह हादसा 1 फरवरी 2026, दिन रविवार की रात लगभग 10:30 बजे हुआ। जानकारी के अनुसार, दोनों युवक माघ मेले की रौनक देखकर मोटरसाइकिल से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार से आए अनियंत्रित अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी और चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया।
मृतक व घायल की पहचान
हादसे में इंद्रेश (20 वर्ष), पुत्र सुकी प्रसाद लोधी की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
वहीं उसके चचेरे भाई सतीश कुमार लोधी (19 वर्ष), पुत्र सुरेश कुमार लोधी गंभीर रूप से घायल हो गए।
दोनों युवक कोतवाली जोगिया क्षेत्र के ग्राम सनौरा, जनपद सिद्धार्थनगर के निवासी बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की तत्परता
हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी और दोनों युवकों को इलाज के लिए अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों ने इंद्रेश को मृत घोषित कर दिया।
घायल का इलाज जारी
घायल सतीश कुमार की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली बंसी पुलिस मौके पर पहुँची और मृतक के परिजनों को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
फिलहाल पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी हुई है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है। मामले में विधिक कार्रवाई जारी है।
गांव में शोक का माहौल
जैसे ही हादसे की खबर गांव पहुँची, परिवार में कोहराम मच गया। एक ही परिवार के दो युवकों के हादसे का शिकार होने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से 60 वर्षीय अधेड़ की मौत, आरोपी फरार

सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के थाना मोहाना क्षेत्र में रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में 60 वर्षीय अधेड़ की मौत हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में ही घायल ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
मृतक की पहचान अब्दुल रशीद (60 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय अब्दुल रऊफ, निवासी बर्डपुर नंबर–5, हरडिहवा, थाना मोहाना, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:30 बजे अब्दुल रशीद अपने घर से अमवा चौराहा की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार बाइक सवार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही बाइक सवार मौके से फरार हो गया।
हादसे में गंभीर रूप से घायल अब्दुल रशीद को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल सीएचसी पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक बताते हुए उन्हें माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज, सिद्धार्थनगर रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में भी स्थिति गंभीर बनी रहने पर डॉक्टरों ने घायल को बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर भेजा, लेकिन गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है और फरार बाइक सवार की तलाश की जा रही है।
इस हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है और ग्रामीणों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों पर रोक लगाने की मांग की है।

कंपोजिट विद्यालय विशुनपुर में चला कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान

सिद्धार्थनगर,खेसरहा। जिले के विकास खंड खेसरहा अंतर्गत कंपोजिट विद्यालय विशुनपुर मुस्तहकम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य स्कूली बच्चों के माध्यम से समाज में कुष्ठ रोग के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना और समय पर उपचार के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान सीएचसी खेसरहा की एएनएम राजेश श्रीवास्तव ने विद्यालय के बच्चों को कुष्ठ रोग (Leprosy) के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि कुष्ठ रोग एक संक्रमणजनित लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है और सरकार द्वारा इसका उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

कुष्ठ रोग के लक्षणों की दी जानकारी

एएनएम ने बच्चों को बताया कि यदि शरीर पर ऐसे सफेद या तांबे रंग के धब्बे दिखाई दें जिनमें सुन्नपन हो, या हाथ-पैरों में झनझनाहट और संवेदना में कमी महसूस हो, तो यह कुष्ठ रोग का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवानी चाहिए।

भ्रम दूर करने पर जोर

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कुष्ठ रोग छूने मात्र से नहीं फैलता और मरीजों से भेदभाव करना गलत है। समय पर इलाज मिलने से रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

राजेश श्रीवास्तव ने बच्चों से अपील की कि वे अपने गांव और घर में यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण देखें तो उसे छिपाएं नहीं, बल्कि सीएचसी खेसरहा या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर जांच और इलाज कराएं।

बच्चों ने दिखाई रुचि

विद्यालय के छात्रों ने इस जागरूकता कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और स्वास्थ्य से जुड़े कई प्रश्न भी पूछे। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की पहल सराहनीय

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ रोग उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जागरूकता के माध्यम से ही इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

इस दौरान शिक्षक महेश विश्वकर्मा, निर्मल, सुजीता, सत्यपाल, अनुराधा रसोइया शंकर तथा अन्य लोग उपस्थित रहे

बुलेट बाइक चोरी… लेकिन जीपीएस ने खोल दी पोल! चोर के घर पहुँची पुलिस

(विशेष रिपोर्ट)
शहर में बाइक चोरी की वारदातें आम होती जा रही हैं, लेकिन इस बार चोर की एक छोटी-सी गलती ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। कीमती बुलेट बाइक चोरी कर खुद को सुरक्षित समझने वाला चोर यह भूल गया कि बाइक में GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगा हुआ है — और यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
चोरी के बाद मालिक ने दिखाया समझदारी का परिचय
बाइक चोरी होने की जानकारी मिलते ही मालिक घबराया नहीं। उसने तुरंत अपने मोबाइल में मौजूद GPS ऐप को खोला और बाइक की लोकेशन ट्रैक करना शुरू कर दिया।
स्क्रीन पर दिख रही लोकेशन धीरे-धीरे एक खास जगह पर स्थिर हो गई, जिससे साफ हो गया कि बाइक कहीं छिपाई नहीं गई, बल्कि किसी के घर पर खड़ी है।
पुलिस और मालिक साथ-साथ पहुँचे लोकेशन पर
बिना देरी किए बाइक मालिक ने पुलिस को सूचना दी। GPS से मिली सटीक लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम बाइक मालिक को साथ लेकर मौके पर पहुँची।
जैसे ही पुलिस ने बताए गए पते पर दबिश दी, वहां चोरी की गई बुलेट बाइक खड़ी मिली, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई।
 घर के दरवाजे पर पुलिस… चोर के उड़ गए होश
अचानक पुलिस को सामने देखकर आरोपी घबरा गया। उसके पास न तो कोई जवाब था और न ही भागने का मौका।
पुलिस ने मौके से बाइक बरामद कर आरोपी को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी है।
कानूनी कार्रवाई जारी
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ चोरी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किसी बड़े बाइक चोरी गिरोह से तो नहीं जुड़ा है।
टेक्नोलॉजी ने अपराधियों की बढ़ाई मुश्किल
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि GPS और आधुनिक तकनीक अपराधियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वाहन खरीदते समय GPS, लॉकिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों को जरूर अपनाएं।

“सड़क सुरक्षा की शपथ से गूंजा सिद्धार्थनगर, विधायक श्यामधनी राही ने कहा— नियमों का पालन ही जीवन की रक्षा”


सिद्धार्थनगर।
जनपद में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया गया सड़क सुरक्षा माह 2026 शुक्रवार को अपने समापन पर पहुंच गया। समापन समारोह का आयोजन कार्यालय सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी, सिद्धार्थनगर में किया गया, जहां जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति देखने को मिली।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदर विधायक एवं कपिलवस्तु विधानसभा से माननीय श्यामधनी राही जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि
“सड़क पर थोड़ी-सी लापरवाही पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे सकती है। हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों का पालन करना मजबूरी नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा है।”


विधायक श्यामधनी राही ने आम नागरिकों, वाहन चालकों और युवाओं को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाते हुए नियमों के पालन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर है और प्रशासन के साथ-साथ जनता की भागीदारी से ही दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
इस अवसर पर सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी चम्पा लाल ने सड़क सुरक्षा माह के दौरान किए गए जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी और बताया कि पूरे माह जनपद में वाहन जांच, जागरूकता अभियान और यातायात नियमों के प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को सतर्क किया गया।
कार्यक्रम में
कमल किशोर (अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग),
विजय कुमार गंगवार (सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपी रोडवेज),
अमरेश यादव (प्रभारी यातायात),
मुजफ्फर हुसैन सिद्दीकी (यात्री कर अधिकारी),
सुरेंद्र कुमार (मोटर वाहन निरीक्षक)
सहित परिवहन विभाग के समस्त अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
समापन समारोह के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि सड़क सुरक्षा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसमें हर नागरिक की सहभागिता जरूरी है।

मिशन पैदल भारत यात्रा पैरों से नाप रहे हैं भारत, दिलों को जोड़ रहे हैं सनोज कुमार कुशवाहा

सिद्धार्थनगर / कुशीनगर।
आज के दौर में जहाँ लोग सुविधाओं के आदी हो चुके हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के एक युवक ने भारत को जानने और जोड़ने के लिए ऐसा रास्ता चुना है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। यह कहानी है सनोज कुमार कुशवाहा की—जो पैरों से भारत नाप रहे हैं और दिलों को जोड़ने का काम कर रहे हैं।
सनोज कुमार कुशवाहा, निवासी धर्मपुर पर्वत, जनपद कुशीनगर, ने
21 अक्टूबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश से एक असाधारण यात्रा की शुरुआत की।
इस यात्रा का नाम है—
“मिशन पैदल भारत यात्रा”


28 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर, वो भी पैदल
अब तक सनोज कुमार


28,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी


29 राज्यों


सैकड़ों जिलों और हजारों गांवों
को पूरी तरह पैदल तय कर चुके हैं।
वर्तमान समय में वे उत्तर प्रदेश के 26 जनपदों की यात्रा पर हैं और हर जिले में भारतीय संस्कृति, आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दे रहे हैं।
सिर्फ यात्रा नहीं, भारत को समझने का मिशन
सनोज कुमार कहते हैं कि यह यात्रा केवल दूरी तय करने के लिए नहीं है।
इसका असली उद्देश्य है—
भारत की संस्कृति और सभ्यता को करीब से समझना
अलग-अलग राज्यों की भाषा, खान-पान और परंपराओं को जानना
लोगों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करना
यात्रा के दौरान वे लोगों के घरों में रुकते हैं, उनके साथ भोजन करते हैं और आम जनजीवन को बहुत नजदीक से देखते-समझते हैं।
किताब में सहेज रहे हैं भारत की आत्मा
इस ऐतिहासिक यात्रा के अनुभवों को
सनोज कुमार एक किताब के रूप में लिख रहे हैं।
इस पुस्तक का नाम होगा—
“भारतीय संस्कृति (Indian Culture)”
इस किताब में भारत के हर कोने से जुड़ी
संस्कृति, जीवनशैली, परंपराएं और अनुभव
सरल भाषा में दर्ज किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भारत को और गहराई से समझ सकें।


सुविधाएँ कम, हौसला बेहद बड़ा
सनोज कुमार की यात्रा किट बहुत साधारण है—
कुछ कपड़े, जरूरी दवाइयाँ और कैंप लगाने का सामान।
सुविधाएँ सीमित हैं, लेकिन हौसला और उद्देश्य बहुत विशाल।
उन्होंने बताया कि इस पूरी यात्रा के दौरान


प्रशासन का सहयोग


आम लोगों का स्नेह
उन्हें लगातार मिलता रहा है।
सिद्धार्थनगर में हुआ भव्य स्वागत
आज जनपद सिद्धार्थनगर के
नगर पालिका परिषद क्षेत्र, गांधीनगर वार्ड में
सनोज कुमार कुशवाहा का भव्य स्वागत किया गया।
स्थानीय नागरिकों ने फूल-मालाओं से उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर नगर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अद्भुत यात्रा की सराहना की और युवक का उत्साह बढ़ाया।
आगे की योजना
उत्तर प्रदेश के शेष जनपदों की यात्रा पूरी करने के बाद
सनोज कुमार कुछ समय का विश्राम करेंगे।
इसके बाद वे आगे की यात्राओं की योजना बनाएंगे, ताकि
भारत को जोड़ने का यह मिशन लगातार आगे बढ़ता रहे।
FT News DParagraphigital विशेष
सनोज कुमार कुशवाहा की यह पदयात्रा हमें यह सिखाती है कि—


भारत को जानने के लिए बड़ी गाड़ियों की नहीं


बल्कि बड़े हौसले और सच्चे इरादों की जरूरत होती है।
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं,
बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने और जोड़ने का जीवंत प्रयास है।

कपिलवस्तु विधानसभा को बड़ी सौगात: PWD द्वारा 54 सड़कों की मरम्मत को स्वीकृति

सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई गति देते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने क्षेत्र की 54 जर्जर सड़कों के सामान्य मरम्मत कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इस फैसले को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही ने इस स्वीकृति पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति विधानसभा क्षेत्र की जनता की ओर से हृदय से आभार व्यक्त किया है।

ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ

विधायक श्यामधनी राही ने बताया कि इन सड़कों की मरम्मत से ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से

विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने में सुविधा

मरीजों को अस्पताल पहुंचने में राहत

व्यापारिक गतिविधियों में तेजी

किसानों को फसल ढुलाई में सहूलियत

मिलेगी। लंबे समय से जर्जर सड़कों की मरम्मत की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने गंभीरता से पूरा किया है।

इन प्रमुख संपर्क मार्गों को मिली स्वीकृति

स्वीकृत मार्गों में पकड़ी उदयपुर–छोटकी हरैया, हरेपा सात प्राथमिक विद्यालय–तरकुलहा, पीकापार–परसा, बर्डपुर, ककरहवा, नौगढ़, बरगदी चौराहा, सगरहवा, सेमरी, बहोरवा, कंचनिया दक्षिणी, बैजनाथपुर, टुगौरा, कुसम्ही, मधुबनवा, बरोहिया खालसा, काकोरी, केवलपुर, जयपुर संपर्क मार्ग, धोबहा, चौहानडीह, सजनापार, दैजौली, छितरापार, नौखनिया, फुलवरिया, लोधपुरवा, जगदीशपुर खुर्द–डिहवा, अहिरनडीह, बसहिलिया, पिछौरा, कोल्हुआ दाता सहित कुल 54 मार्ग शामिल हैं।

इन मार्गों की मरम्मत से दूरस्थ गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ेंगे।

सरकार गांव–गरीब–किसान को दे रही प्राथमिकता

विधायक राही ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब और किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है। सड़क कनेक्टिविटी मजबूत कर विकास को धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी स्वीकृत मार्गों पर शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू होगा, जिससे आमजन को राहत मिलेगी।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों की बदहाली से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी। मरम्मत कार्य शुरू होने से क्षेत्र में विकास कार्यों को नई रफ्तार मिलेगी और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियां मजबूत होंगी।

धूमधाम से मनी रविदास जयंती

कपिलवस्तु विधानसभा के विकासखंड लोटन अंतर्गत ग्राम सभा हरिगांव में संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती धूमधाम से मनाई गई जिसके मुख्य अतिथि सांसद जगदंबिका पाल रहे। संत रविदास जयंती पर सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि, संत शिरोमणि गुरु रविदास एक महान समाज सुधारक, कवि और ईश्वर के अनन्य भक्त थे उन्होंने समानता, सामाजिक समरसता और मानव जाति की एकता का संदेश दिया उनका एक प्रसिद्ध वाक्य “मन चंगा तो कठौती में गंगा”, उनके द्वारा रचित यह प्रसिद्ध वाक्य मन की पवित्रता को ही सच्ची भक्ति मानता है कार्यक्रम को पूर्व जिला अध्यक्ष लाल जी त्रिपाठी उर्फ लाल बाबा ने भी अपने संबोधन में महान संत रविदास पर अपनी शुभकामनाएं लोगों को दिया तथा कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेंद्र पांडे ने किया इस अवसर पर लालबेनी,चंद्रमणि चौरसिया ,रामकुमार, राजेंद्र सीताराम, डॉक्टर नंदकुमार ,रमेश ,अब्दुल सलाम ,कृष्ण चंद्र सिंह ,मोनी सिंह ,मनोज कुमार ,घनश्याम साहनी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे

पाकिस्तान के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान

अरविंद जयतिलक

(वरिष्ठ पत्रकार)

पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा। लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है। उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं। वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी। इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है। याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।