सिद्धार्थनगर में बारिश का असर: राप्ती-बूढ़ी राप्ती समेत नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की पैनी नजर डीएम-एसपी ने बांसी और ककरही पहुंचकर लिया जायजा, सिंचाई विभाग को बंधों की लगातार निगरानी के निर्देश
सिद्धार्थनगर में बारिश का असर: राप्ती-बूढ़ी राप्ती समेत नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की पैनी नजर
डीएम-एसपी ने बांसी और ककरही पहुंचकर लिया जायजा, सिंचाई विभाग को बंधों की लगातार निगरानी के निर्देश
सिद्धार्थनगर, 26 सितंबर 2026। जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच प्रशासन ने नदियों और तटबंधों की निगरानी तेज कर दी है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने शनिवार को राप्ती नदी के बांसी क्षेत्र और बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही क्षेत्र का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नदी के बढ़ते जलस्तर और तटबंधों की स्थिति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।
लीड | जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट
लगातार बारिश के कारण सिद्धार्थनगर से होकर गुजरने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर की 26 सितंबर शाम 4 बजे की दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के मुताबिक कई स्थानों पर जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे है, लेकिन कूड़ा नदी के आलमनगर गेज पर जलस्तर 87.20 मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित खतरे के स्तर 87.20 मीटर के बराबर है। वहीं बूढ़ी राप्ती के ककरही गेज पर जलस्तर 85.60 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के स्तर 85.65 मीटर से महज 5 सेंटीमीटर नीचे है।
ऐसे में प्रशासन ने निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।
मौके पर पहुंचे डीएम और एसपी
भारी बारिश के बीच जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने नदी तटों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद संबंधित विभागीय अधिकारियों से जलस्तर और तटबंधों की स्थिति की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बंधों की लगातार निगरानी की जाए और किसी भी संभावित समस्या की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दी जाए।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि बारिश और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
डीएम की लोगों से अपील
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जिले के लोगों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। नदी, तटबंध और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचें।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर तत्काल प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है।
| 26 सितंबर शाम 4 बजे की प्रमुख स्थिति
बांसी राप्ती: 82.91 मीटर — खतरे के स्तर से 1.99 मीटर नीचे
ककरही बूढ़ी राप्ती: 85.60 मीटर — खतरे के स्तर से सिर्फ 0.05 मीटर नीचे
परसौहन बूढ़ी राप्ती: 93.99 मीटर — खतरे के स्तर से 1.56 मीटर नीचे
मुंडेरवा बूढ़ी राप्ती: 89.48 मीटर — खतरे के स्तर से 1.31 मीटर नीचे
कूड़ा नदी आलमनगर: 87.20 मीटर — खतरे के स्तर के बराबर
उसका कूड़ा नदी: 81.40 मीटर — खतरे के स्तर से 2.12 मीटर नीचे
घोंघी लोटन: 84.50 मीटर — खतरे के स्तर से 2.50 मीटर नीचे
तेलार नाला: 86.80 मीटर — खतरे के स्तर से 0.70 मीटर नीचे
जमुआर नाला: 81.25 मीटर — खतरे के स्तर से 3.64 मीटर नीच
बारिश के बीच नदी किनारे पहुंचे डीएम-एसपी, जलस्तर और तटबंधों की स्थिति का लिया जायजा। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जरूरत होने पर ही घर से निकलने की अपील की।
खतरे के स्तर तक पहुंचा कूड़ा नदी का जलस्तर और ककरही में खतरे के निशान से महज 5 सेंटीमीटर नीचे पानी होने के कारण प्रशासन की निगरानी अहम हो गई है। हालांकि, सभी गेजों की स्थिति एक जैसी नहीं है और कई स्थानों पर जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे दर्ज किया गया है।
सत्यपाल सिंह कौशिक को कंटेंट लेखन, स्क्रिप्ट लेखन का लंबा अनुभव है। वर्तमान में कौशिक जी FT NEWS DIGITAL में डिजिटल मीडिया सह- संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
