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24 घंटे में चोरी का खुलासा: जोगिया उदयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, शातिर चोर गिरफ्तार

सिद्धार्थनगर, 16 अप्रैल 2026। जनपद के थाना जोगिया उदयपुर पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए चोरी की घटनाओं का महज 24 घंटे के भीतर सफल खुलासा कर दिया। पुलिस टीम ने एक शातिर चोर और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी का सामान और नकदी बरामद की है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देश पर, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार एवं क्षेत्राधिकारी बाँसी सुबेन्दू सिंह के नेतृत्व में थानाध्यक्ष अभय सिंह की टीम ने यह सफलता हासिल की। पुलिस ने मुकदमा संख्या 48/2026 धारा 305(A) बीएनएस में वांछित अभियुक्त जितेन्द्र (24 वर्ष), निवासी ग्राम हरैया, थाना जोगिया उदयपुर को एक बाल अपचारी के साथ पकड़ी रोड के पास गिरफ्तार किया।

बरामद हुआ सामान:

पुलिस ने आरोपियों के पास से सरसों तेल, रिफाइंड तेल, चाय पत्ती, सॉस सहित कुल दर्जनों सामान के पैकेट और ₹7130 नगद बरामद किए।

🗣️ पूछताछ में खुलासा:

गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि वे जोगिया क्षेत्र की दुकानों से चोरी कर सामान को सस्ते दामों पर राहगीरों को बेच देते थे और उसी से अपने खर्च चलाते थे। घटना के दिन भी वे चोरी का सामान बेचने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।

पुलिस टीम को मिली सराहना:

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक जानार्दन यादव, हेड कांस्टेबल श्रीनंद यादव, हेड कांस्टेबल हेमंत सिंह और कांस्टेबल राजाराम राजभर की अहम भूमिका रही।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर उन्हें न्यायालय भेज दिया है। इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

बिहार में सियासत का नया अध्याय: सम्राट चौधरी होंगे मुख्यमंत्री, एनडीए ने सौंपा नेतृत्व

Samrat Chaudhary is the new CM: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के बाद एनडीए गठबंधन ने भी उन्हें अपना नेता घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि वे बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

यह फैसला उस समय लिया गया जब मंगलवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।

सम्राट चौधरी का पहला बयान

नेतृत्व मिलने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के अनुरूप काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” और नीतीश कुमार के “समृद्ध बिहार” के सपनों को मिलकर साकार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार से उन्हें प्रशासन चलाने की महत्वपूर्ण सीख मिली है।

बदलता बिहार का सियासी समीकरण

करीब तीन दशकों तक बिहार की राजनीति लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन अब राज्य को एक नया चेहरा मिलने जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि पहली बार बीजेपी को बिहार जैसे बड़े हिन्दी भाषी राज्य में मुख्यमंत्री पद मिला है, जहां वह अब तक सहयोगी भूमिका में ही रही थी।

राजनीतिक विरासत और मजबूत पकड़

सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे और कुशवाहा समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते थे।

यही विरासत सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान देती है।

सियासी सफर: आरजेडी से बीजेपी तक

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है—

1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश

2000 में आरजेडी से विधायक बने

बाद में जेडीयू और फिर बीजेपी का दामन थामा

2023 में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने

2024 में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली

उनका यह लंबा अनुभव अब मुख्यमंत्री के रूप में नई भूमिका में नजर आएगा।

नई जिम्मेदारी, बड़ी चुनौती

सम्राट चौधरी के सामने अब बिहार को विकास की नई दिशा देने की चुनौती होगी। गठबंधन राजनीति, सामाजिक संतुलन और विकास के वादों को जमीन पर उतारना उनकी प्राथमिकता होगी।

नीतीश कुमार के 20 साल की सत्ता का अंत 

करीब 20 वर्षों तक शासन करने के बाद अब नीतीश कुमार की सत्ता का अंत हो गया है। वह अब राज्यसभा सांसद की कमान संभालेंगे। बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ चेहरे का नहीं, बल्कि एक नई दिशा का संकेत माना जा रहा है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अब राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

अनुदेशकों के लिए बड़ी सौगात: 17 हजार मानदेय कैबिनेट से मंजूर, विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

लखनऊ/उत्तर प्रदेश: प्रदेश सरकार द्वारा अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर 17 हजार रुपये किए जाने के कैबिनेट फैसले के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे अनुदेशकों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

विक्रम सिंह ने जताया आभार, कहा,सरकार ने समझी हमारी पीड़ा

इस महत्वपूर्ण निर्णय पर अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षामंत्री संदीप सिंह और शिक्षक विधायक श्रीचंद शर्मा का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के करीब 25 हजार अनुदेशकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उनके सम्मान को भी बढ़ाएगा।

“यह सिर्फ मानदेय नहीं, सम्मान की जीत” – विक्रम सिंह

विक्रम सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं बल्कि अनुदेशकों के संघर्ष और आत्मसम्मान की जीत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने हमेशा शिक्षा और शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता दी है, जिसका यह परिणाम है।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती का आधार

विक्रम सिंह ने कहा कि, मानदेय में वृद्धि से अनुदेशकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। यह कदम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।

प्रदेशभर में जश्न का माहौल

फैसले के बाद कई जिलों में अनुदेशकों ने खुशी जताई और सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय की सराहना हो रही है।

खबर का हुआ असर: 25 साल से जर्जर सड़क पर शुरू हुआ निर्माण, बेदौली-खोजीपुर-खरचौला मार्ग पर दौड़ी विकास की रफ्तार

सिद्धार्थनगर। बांसी-डुमरियागंज मार्ग पर स्थित बेदौली-खोजीपुर-खरचौला मार्ग, जो पिछले 25 वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा था, अब विकास की राह पर लौटता नजर आ रहा है। 4 दिन पहले इस सड़क की दुर्दशा को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और अब यहां निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है।

ग्रामीणों को हो रही थी परेशानी 

यह सड़क लंबे समय से गड्ढों, जलभराव और टूट-फूट के कारण स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई थी। स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को रोजाना इस रास्ते से गुजरते समय भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार शिकायतों और मांगों के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब इस मुद्दे को FT News ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।

निर्माण कार्य शुरू हुआ 

खबर के प्रकाशन के बाद प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मौके पर टीम भेजी और सड़क निर्माण कार्य शुरू करा दिया। अब जेसीबी मशीनों की गूंज और सड़क पर बिछती नई परतें ग्रामीणों के लिए राहत और उम्मीद का संदेश लेकर आई हैं।

ग्रामीणों में खुशी की लहर 

ग्रामीणों की खुशी अब शब्दों में साफ झलक रही है। स्थानीय निवासी नीरज मिश्र ने कहाकि,

हमने कभी नहीं सोचा था कि खबर का इतना जल्दी असर होगा। 25 साल से हम इस सड़क की बदहाली झेल रहे थे, लेकिन अब काम शुरू होते देख बहुत राहत मिली है।”

वहीं अन्य ग्रामीणों ने कहाकि,

मीडिया ने हमारी आवाज को उठाया, तभी यह संभव हो पाया। अब उम्मीद है कि जल्द ही सड़क पूरी बनकर तैयार होगी और आवागमन आसान हो जाएगा।

इस निर्माण कार्य से न केवल क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह पहल क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

टीएफआई की बैठक संपन्न, 4 अप्रैल आंदोलन को लेकर बनी रणनीति

सिद्धार्थनगर। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के तत्वावधान में टीईटी से मुक्ति की मांग को लेकर प्रस्तावित 4 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले विशाल धरना-प्रदर्शन की तैयारियों के क्रम में बुधवार को जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक जिला मुख्यालय स्थित एक होटल में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न ब्लॉकों से आए पदाधिकारी और शिक्षक शामिल हुए।

धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने पर जोर

बैठक के दौरान आगामी धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई। पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक संख्या में शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। सभी को 4 अप्रैल को दिल्ली पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाने का आह्वान किया गया।

एकजुटता ही समाधान का रास्ता: आनंद त्रिपाठी

पर्यवेक्षक एवं मंडलीय मंत्री आनंद कुमार त्रिपाठी (देवी पाटन मंडल) ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता और सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

टीईटी मुद्दे पर गरमाई चर्चा

टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने टीईटी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता पूरी की थी, ऐसे में बाद में नई योग्यता लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से शिक्षकों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की।

ज्यादा से ज्यादा शिक्षक दिल्ली पहुंचे: योगेंद्र पांडेय

जिला मंत्री योगेंद्र पांडेय ने कहा कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा और बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचना होगा।

संगठन को मजबूत करने पर दिया गया जोर

जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र मिश्र और महामंत्री कलीमुल्लाह ने भी शिक्षकों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की।

कार्यक्रम में संगठन विस्तार के तहत राघवेंद्र तिवारी को उस्का बाजार इकाई का संगठन मंत्री तथा दुर्गेश पांडेय को मीडिया प्रभारी मनोनीत किया गया।

हाईटेंशन तार से टकराई बस, करंट की चपेट में आकर बुजुर्ग की मौत, तीन लोग झुलसे

सिद्धार्थनगर। जिले के शोहरतगढ़ क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। 11 हजार वोल्ट के हाई टेंशन बिजली तार की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों का इलाज मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर में चल रहा है।

अंतिम संस्कार के लिए जा रही थी बस

मिली जानकारी के अनुसार शोहरतगढ़ क्षेत्र के लखनपारा गांव के राम नरेश का निधन हो गया था। उनके परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए बस से अयोध्या जा रहे थे।

गांव से बाहर मोड़ के पास सामने से आ रहे एक वाहन को साइड देने के दौरान बस सड़क किनारे नीचे लटक रहे 11 हजार वोल्ट के हाई टेंशन तार से छू गई।

करंट की चपेट में आने से एक की मौत

बस के हाईटेंशन तार से छूते ही उसमें करंट फैल गया। करंट की चपेट में आने से श्याम सुंदर नामक बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई।

वहीं बुद्धि सागर, जगदीश साहनी और राम अजोर गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

घायलों से मिलने पहुंचे एसडीएम

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। एसडीएम विवेकानंद मिश्र मेडिकल कॉलेज पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों को घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मृतक और घायलों को मिलेगा मुआवजा

एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने बताया कि इस घटना में मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता विद्युत विभाग की ओर से दी जाएगी।

लटकते बिजली तार बने हादसे की वजह

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर सड़क किनारे लंबे समय से हाईटेंशन बिजली के तार नीचे लटक रहे थे, जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती थी। इस घटना के बाद लोगों ने विद्युत विभाग से तारों को दुरुस्त कराने की मांग की है।

मणेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में रोजा इफ्तार का हुआ आयोजन, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय रहे मौजूद

सिद्धार्थनगर, 15 मार्च 2026।

जनपद सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र स्थित बढ़नी तिराहे पर समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा द्वारा शनिवार को रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आयोजित इफ्तार कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, रोजेदार मुस्लिम भाईयों के साथ-साथ हिंदू समाज के लोग और क्षेत्र के बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम ने आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।

बुद्धभूमि से दुनिया तक जाए शांति और सौहार्द का संदेश

इफ्तार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ने कहा कि सिद्धार्थनगर भगवान बुद्ध की पावन धरती है। इस बुद्धभूमि से पूरी दुनिया में शांति, मानवता और सामाजिक सौहार्द का संदेश जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पवित्र रमजान माह में आयोजित इफ्तार पार्टी इसी उद्देश्य से समाज को जोड़ने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का प्रयास है।

अमन-चैन और आपसी सहयोग की अपील

कार्यक्रम में मौजूद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने लोगों से अमन-चैन बनाए रखने और एक-दूसरे की मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश और समाज की तरक्की आपसी सद्भाव और भाईचारे से ही संभव है।

सर्वधर्म समभाव की परंपरा को मजबूत करने पर जोर

पूर्व सांसद कुशल तिवारी ने कहा कि भारत की पहचान सर्वधर्म समभाव की परंपरा से है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता, भाईचारा और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।

बड़ी संख्या में नेता और गणमान्य लोग रहे मौजूद

इफ्तार पार्टी में पूर्व विधायक अनिल सिंह, प्रदेश सचिव अजय चौधरी, विधायक प्रतिनिधि डुमरियागंज जहीर मलिक, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मुरलीधर मिश्रा, डॉ. सरफराज अंसारी, जयकरन गौतम, प्रदेश सचिव राम मिलन भारती, जिला महासचिव कमरुज्जमा, अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष शकील शाह, जिला सचिव हरिराम यादव, प्रदेश सचिव जावेद खान, मसूद खान, डॉ. शराफुद्दीन, इफ्तिखार मैनेजर, पूर्व चेयरमैन निसार बागी, पूर्व प्रमुख जाकिर हुसैन, डॉ. इस्तहाक, राष्ट्रीय सचिव अल्पसंख्यक इब्राहिम बाबा, जिला अध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ गोपाल फौजी, राष्ट्रीय सचिव छात्र सभा अजय चौरसिया, जोन प्रभारी राकेश दूबे, अकील अहमद उर्फ मुन्नू, सभासद निजाम व निसार, सेक्टर प्रभारी हरिनाथ यादव, शफात, विधानसभा अध्यक्ष इटवा बबलू खान, ब्लॉक अध्यक्ष इटवा सुनील यादव, मुस्तफा, जहीर नेता, प्रधान गयासुद्दीन, जिला सचिव सोनू यादव, राकेश कुमार, मुजम्मिल प्रधान, प्रधान सईद आलम दुधवनिया, शादाब, इरशाद, शफीक, वाहिद, डॉ. मोईन, मारूफ खान, मतलूब खान, अब्दुल मन्नान, जलाल, फैजान, करतब यादव, डॉ. खालिद सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इफ्तार के दौरान रोजेदारों ने दुआ के साथ रोजा खोला और क्षेत्र में अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे की कामना की।

पीरियड लीव पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी- कानून बना तो महिलाओं को नौकरी देना बंद कर सकते हैं नियोक्ता

नई दिल्ली। देश में महिलाओं के लिए पीरियड (मेनस्ट्रुअल) लीव को अनिवार्य करने की मांग पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि पीरियड लीव को कानून के जरिए अनिवार्य कर दिया गया तो इसका महिलाओं की नौकरी के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अदालत के इस बयान के बाद देशभर में एक नई बहस छिड़ गई है।

क्या कहा चीफ जस्टिस ने

सुनवाई के दौरान पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि मासिक धर्म अवकाश को कानूनन अनिवार्य कर दिया गया तो कई नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बनने पर यह धारणा बन सकती है कि महिलाओं को काम में अतिरिक्त सुविधा देनी पड़ेगी, जिससे कंपनियां महिलाओं को नियुक्त करने में हिचकिचा सकती हैं।

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि यदि इसे कानून बनाया गया तो कई संस्थान महिलाओं को जिम्मेदारी वाले पद देने से भी बच सकते हैं और यह उनके करियर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

किस मामले में हुई सुनवाई

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी, जिसमें देशभर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पीरियड लीव नीति लागू करने की मांग की गई थी।

अदालत ने इस याचिका पर सीधे कानून बनाने से इनकार करते हुए कहा कि इस विषय पर नीति बनाना सरकार का काम है, इसलिए केंद्र सरकार इस पर विचार कर सकती है।

कोर्ट ने क्यों जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु रखे —

यदि पीरियड लीव अनिवार्य हुई तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।

इससे महिलाओं को कम जिम्मेदारी वाले काम दिए जाने का खतरा बढ़ सकता है।

यह भी आशंका है कि इससे महिलाओं को कम सक्षम समझने की मानसिकता मजबूत हो सकती है।

दूसरी ओर क्या है समर्थन का तर्क

पीरियड लीव के समर्थकों का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान कई महिलाओं को गंभीर दर्द, थकान और स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।

इसलिए उन्हें काम या पढ़ाई से एक-दो दिन की छुट्टी मिलना मानवाधिकार और स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी है। कुछ राज्य और निजी कंपनियां पहले से स्वैच्छिक रूप से ऐसी सुविधा दे रही हैं।

देश में पहले से कहां लागू है पीरियड लीव

भारत में कुछ संस्थानों और कंपनियों ने स्वेच्छा से यह सुविधा दी है।

उदाहरण के तौर पर कुछ विश्वविद्यालयों और निजी कंपनियों में मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन यह कानूनन अनिवार्य नहीं है।

क्या आगे बन सकता है कानून

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में कानून बनाने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस विषय पर नीति बनाने की संभावना पर विचार कर सकती है।

यानी भविष्य में सरकार चाहे तो इस पर गाइडलाइन या नीति बना सकती है, लेकिन फिलहाल इसे अनिवार्य बनाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है।

पीरियड लीव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने देश में एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। एक तरफ इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अदालत का मानना है कि इसे कानून बनाना महिलाओं के रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर सकता है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई नीति या दिशा-निर्देश जारी करती है या नहीं।

मानदेय बढ़ाए जाने और कैशलेश ईलाज देने पर अनुदेशकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, विधायक जय प्रताप सिंह का किया स्वागत

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17000 रुपए प्रति माह किए जाने और पाँच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज की सुविधा देने के फैसले से जनपद सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी का माहौल है। सरकार के इस निर्णय को अनुदेशकों ने राहत भरा कदम बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इसी क्रम में अनुदेशक संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बांसी विधायक जय प्रताप सिंह का स्वागत कर धन्यवाद ज्ञापित किया।

अनुदेशकों ने जताई खुशी, सरकार के फैसले को बताया ऐतिहासिक

अनुदेशकों का कहना है कि लंबे समय से मानदेय बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी। ऐसे में सरकार द्वारा मानदेय को बढ़ाकर 17000 रुपए करना अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत है। इसके साथ ही पाँच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से अब अनुदेशकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिल सकेगी।

अनुदेशकों ने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के करीब 25 हजार अनुदेशकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अनुदेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और सरकार का यह कदम उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है।

विधायक जय प्रताप सिंह का किया गया स्वागत

सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए अनुदेशक संघ के पदाधिकारियों ने बांसी विधायक जय प्रताप सिंह का स्वागत किया और उनके माध्यम से प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। अनुदेशकों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों और सरकार की सकारात्मक सोच के कारण ही यह फैसला संभव हो पाया है।

आर्थिक और सामाजिक लाभ होगा

इस अवसर पर परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन, सिद्धार्थनगर के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुदेशकों की समस्याओं को समझते हुए यह सराहनीय निर्णय लिया है। इससे हजारों अनुदेशकों और उनके परिवारों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम अनुदेशकों के लिए सम्मान और प्रोत्साहन का प्रतीक है। इससे शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और अनुदेशक पहले से अधिक उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

ये अनुदेशक रहे मौजूद

इस दौरान अनुदेशक सीमा निषाद, रामानंद उपाध्याय, लवकुश चौधरी, सत्य मृत्युंजयधर, सत्यपाल सिंह, दिलीप, कैलाश नाथ, देवेंद्र चौधरी, शरद सहित कई अन्य अनुदेशक उपस्थित रहे। सभी ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय से अनुदेशकों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

MBBS छात्र हादसे की सुर्खियों में दब गया विपिन जायसवाल के परिवार का दर्द– होली के दिन धर्मशाला ओवरब्रिज पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से गई थी जान

गोरखपुर : रंगों का पर्व होली आपसी भाईचारे और खुशियों का त्योहार माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यही उत्सव लापरवाही और हुड़दंग की वजह से दर्दनाक हादसों में बदल जाता है। ऐसा ही एक हादसा 4 मार्च 2026 को गोरखपुर में हुआ, जिसमें एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छिन गईं।

होली के दिन कार की टक्कर से हुए थे घायल

4 मार्च 1996 को जन्मे विपिन कुमार जायसवाल को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि 4 मार्च 2026 का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन बन जाएगा। होली के दिन दोपहर करीब 2:30 बजे वह अपने दोस्त सुमित श्रीवास्तव के साथ स्कूटी से धर्मशाला ओवरब्रिज से गुजर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मारुति वेगनर कार ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विपिन ओवरब्रिज से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके साथी सुमित श्रीवास्तव भी बुरी तरह घायल हो गए।

इलाज के दौरान चली गई विपिन की जान 

दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान विपिन कुमार जायसवाल ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत से परिवार में मातम छा गया, जबकि घायल सुमित श्रीवास्तव का अभी भी इलाज चल रहा है।

उसी रात एमबीबीएस छात्र आकाश पांडे की हुई थी मौत 

उसी दिन रात में चारफाटक मोहद्दीपुर इलाके में हुए एक अन्य सड़क हादसे में एमबीबीएस छात्र आकाश पांडे और उमेश शर्मा की मौत हो गई थी। आरोपी के एक राजनीतिक दल से जुड़े होने की वजह से यह मामला मीडिया में सुर्खियों में छाया रहा। लेकिन उसी दिन दोपहर धर्मशाला ओवरब्रिज पर हुए हादसे में जान गंवाने वाले विपिन जायसवाल के परिवार की पीड़ा कहीं दबकर रह गई।

MBBS छात्र हादसे में दब गई विपिन की मौत

परिजनों का कहना है कि चारफाटक हादसे में मृतकों के परिवारों के घर जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंचे तथा सरकार की ओर से मुआवजे की घोषणा भी की गई, लेकिन विपिन जायसवाल के परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं पहुंचा। परिजनों के मुताबिक विपिन एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे, शायद यही वजह रही कि उनकी मौत को लेकर न तो किसी अधिकारी ने संज्ञान लिया और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने परिवार से मिलकर सांत्वना दी।

घटना की निष्पक्ष जांच की मांग 

घटना के अगले दिन मृतक के पिता राजेंद्र कुमार जायसवाल की तहरीर पर शाहपुर थाने में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद कार चालक और उसके साथियों को मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया और अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से न्याय दिलाने की गुहार लगाई है, ताकि विपिन की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके।

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