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आजमगढ़ और मऊ में अनुदेशक संघ प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का जबरदस्त स्वागत

मऊ/आजमगढ़। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के मऊ और आजमगढ़ दौरे में अनुदेशकों का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। दोनों जनपदों में सैकड़ों अनुदेशकों ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में संगठन की जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में अनुदेशक मौजूद रहे।

प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कोर कमेटी सदस्य अभिषेक राय सहित कई प्रांतीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संगठन ने अनुदेशकों की एकजुटता और अधिकारों की लड़ाई का नया संदेश बताया।

सुप्रीम कोर्ट की जीत को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट से मिले 17 हजार रुपये मानदेय, मार्च 2017 से एरियर के अधिकार तथा नियमितीकरण की लड़ाई को प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि संगठन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगातार प्रयास करेगा।

“नियमितीकरण तक चैन से नहीं बैठूंगा” : विक्रम सिंह 

अनुदेशकों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा था जब 17 हजार रुपये मानदेय मिलना भी असंभव माना जा रहा था, लेकिन संगठन के संघर्ष ने इसे संभव कर दिखाया।

उन्होंने कहा, “जब तक प्रदेश के अंतिम अनुदेशक का नियमितीकरण नहीं हो जाता, तब तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा। संगठन की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

उन्होंने सभी अनुदेशकों से संगठन को मजबूत बनाने और एकजुट रहने की अपील की।

आयोजकों का किया सम्मान

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मऊ के जिलाध्यक्ष इंद्र प्रताप राव, आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष गणेश यादव तथा दोनों जनपदों की जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी की सराहना की गई। संगठन ने कहा कि प्रदेशभर में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अनुदेशकों को एकजुट किया जाएगा।

संगठन का कहना है कि अब उसका मुख्य लक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण क्रियान्वयन और अनुदेशकों का नियमितीकरण सुनिश्चित कराना है।

एरियर का रास्ता साफ होने के बाद सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर

सिद्धार्थनगर। वर्षों तक सीमित मानदेय और आर्थिक तंगी से जूझते रहे अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला नई उम्मीद लेकर आया है। वर्ष 2017-18 से एरियर का रास्ता साफ होने के बाद जिले के 258 अनुदेशकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। अनुमान है कि शासनादेश जारी होने के बाद प्रत्येक अनुदेशक को करीब 9 लाख रुपये तक का एरियर मिलेगा। यही वजह है कि वर्षों से अधूरे पड़े सपने अब साकार होते दिखाई दे रहे हैं।

भविष्य के लिए पैसा जमा करूंगा

अनुदेशक जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय कहते हैं कि कम मानदेय के कारण वह अपने बच्चों को बेहतर स्कूल में नहीं पढ़ा सके। अब एरियर मिलने की उम्मीद ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है। उनका कहना है कि सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगे और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पैसा जमा करेंगे

अब बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाऊंगा”

अनुदेशक रविकांत हैं कि वर्षों से जमीन खरीदकर अपना घर बनाने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव नहीं हो सका। एरियर मिलते ही सबसे पहले जमीन खरीदकर अपने आशियाने का सपना पूरा करेंगे।

गाड़ी का सपना पूरा करूंगा

अनुदेशक बुद्धिराम कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपना पक्का घर बनाना है। साथ ही विद्यालय आने-जाने की परेशानी दूर करने के लिए एक नई मोटरसाइकिल भी खरीदेंगे।

बेटियों की शादी करूंगा

अनुदेशक विष्णु वरुण कहते हैं कि घर की मरम्मत लंबे समय से टल रही है और बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी सामने है। एरियर मिलने पर दोनों महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जाएंगे।

अब नियमितीकरण का इंतजार 

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, धैर्य और सम्मान की जीत है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। उनका आग्रह है कि जल्द से जल्द शासनादेश जारी कर एरियर का भुगतान कराया जाए और हमें नियमित किया जाए। ताकि न्यायालय के फैसले का वास्तविक लाभ प्रत्येक अनुदेशक तक पहुँच सके।

सुप्रीम कोर्ट से अनुदेशकों को बड़ी राहत: यूपी सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज, एरियर पर फैसला बरकरार

लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लिए आज एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है, जिससे 4 फरवरी को सुनाया गया ऐतिहासिक निर्णय यथावत बना हुआ है।

गौरतलब है कि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों के 17000 रुपए मानदेय, लगभग 9 वर्षों के एरियर, नियमितीकरण तथा अन्य सेवा संबंधी लाभों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। 17000 तो सरकार ने दे दिया लेकिन एरियर के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है।

इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के हजारों अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विभिन्न जिलों में अनुदेशकों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का बयान

अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा—

“हम सर्वोच्च न्यायालय का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिसने न्याय और संविधान की भावना के अनुरूप अनुदेशकों के अधिकारों की रक्षा की है। सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होना हजारों अनुदेशकों के संघर्ष की बड़ी जीत है। अब हम प्रदेश सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह बिना किसी विलंब के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करे और सभी पात्र अनुदेशकों  9 वर्षों का एरियर, नियमितीकरण तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित अन्य सभी लाभ शीघ्र उपलब्ध कराए।”

उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुदेशकों के सम्मान और अधिकारों की भी जीत है।

अब सरकार पर बढ़ा अनुपालन का दबाव

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद अब प्रदेश सरकार पर न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने का दबाव बढ़ गया है। प्रदेशभर के अनुदेशक अब आदेश के क्रियान्वयन और बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

99 वर्षीय राजेश्वर सिंह लापता, 24 घंटे से अधिक समय बाद भी नहीं मिला सुराग; परिजनों ने जनता से मांगी मदद

महराजगंज के महादेवा गांव से गायब हुए वृद्ध, क्षेत्र में बढ़ी चिंता

महराजगंज। जिले के बृजमनगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत महादेवा गांव से 99 वर्षीय वृद्ध राजेश्वर सिंह के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। 29 मई 2026 की दोपहर घर से निकले राजेश्वर सिंह का 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। परिजन लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

घर से निकले और फिर अचानक हो गए गायब

परिजनों के अनुसार राजेश्वर सिंह शुक्रवार दोपहर अपने घर से निकले थे। काफी समय तक वापस न लौटने पर परिवार के लोगों ने उनकी खोजबीन शुरू की। पहले गांव और आसपास के क्षेत्रों में तलाश की गई, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो रिश्तेदारों और परिचितों को भी सूचना दी गई।

गांव के लोगों ने भी अपने स्तर पर खोजबीन की, लेकिन वृद्ध का कोई सुराग नहीं लग सका। इस घटना के बाद पूरे इलाके में चिंता और बेचैनी का माहौल है।

हर संभव जगह तलाश जारी, लेकिन हाथ खाली

राजेश्वर सिंह के भतीजे अंगद सिंह ने बताया कि परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा है। आसपास के गांवों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों से मदद की अपील की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

उन्होंने कहा कि वृद्ध की उम्र अधिक होने के कारण परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

जनता से मदद की अपील, सूचना देने वालों से संपर्क करने का अनुरोध

परिजनों ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को राजेश्वर सिंह कहीं दिखाई दें या उनके संबंध में कोई भी जानकारी मिले तो तत्काल निम्न नंबरों पर संपर्क करें—

📞 9451562408

📞 9035477148

📞 9450045959

📞 9651003775

परिवार ने लोगों से इस सूचना को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की है ताकि लापता वृद्ध को सुरक्षित खोजा जा सके।

भीषण गर्मी और पेट्रोल संकट के बीच शुरू हुई जनगणना, घंटों लाइन में लगने को मजबूर कर्मी

सिद्धार्थनगर। जनगणना कार्य की शुरुआत होते ही जनगणना कर्मियों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। एक ओर जहां भीषण गर्मी में घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों ने कर्मचारियों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई जनगणना कर्मियों को ड्यूटी स्थल तक पहुंचने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।

जनगणना स्थल पर पहुंचना मुश्किल 

जनगणना कर्मियों का कहना है कि जिले में पेट्रोल की किल्लत और पंपों पर भारी भीड़ के कारण समय पर कार्यस्थल तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कर्मी रविकांत, बुद्धिराम और विष्णु ने बताया कि उन्हें पेट्रोल भरवाने के लिए करीब दो से तीन घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इसके बाद ही वे जनगणना स्थल तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि पहले ही तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच काम करना कठिन हो रहा है, ऊपर से पेट्रोल के लिए घंटों इंतजार करने से पूरा कार्य प्रभावित हो रहा है।

जनगणना कार्य prabhavit

कर्मियों ने बताया कि जनगणना का कार्य समयबद्ध होता है और हर दिन तय लक्ष्य पूरा करना पड़ता है। लेकिन ईंधन संकट के कारण समय का बड़ा हिस्सा पेट्रोल पंपों पर ही निकल जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि आम लोगों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन करे विशेष व्यवस्था 

जनगणना कर्मियों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर अलग लाइन या प्राथमिकता सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है ताकि जनगणना कार्य बिना बाधा के समय पर पूरा किया जा सके।

सिद्धार्थनगर में अधिवक्ताओं का पूर्ति विभाग पर हल्लाबोल, गैस सिलेंडर और पेट्रोल व्यवस्था को लेकर जोरदार प्रदर्शन

पेट्रोलियम संकट और गैस एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ फूटा गुस्सा

सिद्धार्थनगर। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने मंगलवार को जिला पूर्ति विभाग का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने जिले में व्याप्त पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत, गैस एजेंसियों की मनमानी और पेट्रोल पंपों पर अव्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने मांग उठाई कि बार प्रांगण में ही गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए तथा अधिवक्ताओं को पेट्रोल पंपों पर बिना लाइन लगाए पेट्रोल देने की विशेष व्यवस्था की जाए।

“पूर्ति विभाग के संरक्षण में चल रही मनमानी”: अखण्ड प्रताप सिंह

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बार एसोसिएशन अध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह ने पूर्ति विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में गैस एजेंसियां और पेट्रोल पंप खुलेआम मनमानी कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बाद 45 दिन और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडर धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, तो दुकानदारों तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में सिलेंडर कैसे पहुंच रहे हैं।

बंधू आयल पेट्रोल पंप पर भी लगाए आरोप

जिलाध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह ने बताया कि वह स्वयं बंधू आयल पेट्रोल पंप पहुंचे थे, जहां ऑटो में सीएनजी भरी जा रही थी। जब उन्होंने बड़ी गाड़ियों के लिए ईंधन की उपलब्धता पूछी तो कर्मचारियों ने “प्रेशर नहीं होने” की बात कही, जबकि ऑटो में लगातार फ्यूल दिया जा रहा था।

इस पर अधिवक्ताओं ने पेट्रोल पंप के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

अधिवक्ताओं ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

एसोसिएशन के महामंत्री कृपा शंकर त्रिपाठी ने कहा कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो अधिवक्ता बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यों के लिए लगातार दौड़भाग करनी पड़ती है, ऐसे में पेट्रोल और गैस की समस्या से उनका कार्य प्रभावित हो रहा है।

बड़ी संख्या में शामिल हुए अधिवक्ता

घेराव और प्रदर्शन में अनिल विश्वकर्मा, विकास शुक्ला, प्रमोद कुमार सिंह, मनीष यादव, राकेश कुमार सिंह, रामकुमार यादव, उमेश प्रताप सिंह, रियाज अहमद, मिथिलेश मिश्रा, संतोष मिश्रा और श्रीकृष्ण मिश्रा समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी उग्र दिखाई दिया।

मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन, अखिलेश और सीएम योगी ने जताया शोक

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के बेटे Prateek Yadav का बुधवार (13 मई) सुबह अचानक निधन हो गया। प्रतीक यादव महज 38 वर्ष के थे। उनके असामयिक निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई।

सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George’s Medical University (KGMU) भेजा गया है, जहां चार डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।

अखिलेश यादव पहुंचे KGMU, सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav अपने छोटे भाई के निधन की सूचना मिलते ही KGMU पहुंच गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव की तस्वीर साझा करते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी।

अखिलेश यादव ने लिखा,

“प्रतीक यादव जी का निधन अत्यंत दुखद! ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। विनम्र श्रद्धांजलि!”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताई संवेदना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी प्रतीक यादव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पद्म विभूषण स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव का अचानक निधन अत्यंत दुखद है।

मुख्यमंत्री ने शोक संदेश में कहा कि उनकी हार्दिक श्रद्धांजलि दिवंगत आत्मा के साथ है और ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद साफ होगी मौत की वजह

फिलहाल प्रतीक यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है। KGMU में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक

प्रतीक यादव के निधन से समाजवादी परिवार को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों द्वारा लगातार शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

सिद्धार्थनगर में धूमधाम से मनी महाराणा प्रताप जयंती

सिद्धार्थनगर। वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक मेवाड़ के महान योद्धा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती शनिवार को सिद्धार्थनगर मुख्यालय स्थित अम्बेडकर सभागार में भव्य और ऐतिहासिक अंदाज में मनाई गई। कार्यक्रम में सर्व समाज के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा सभागार “जय महाराणा”, “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के नारों से देर तक गूंजता रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें भारतीय इतिहास का सबसे स्वाभिमानी योद्धा बताया।

हल्दीघाटी को पांचवां धाम मानना चाहिए

बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट अखंड प्रताप सिंह और शिवनाथ चौधरी ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर भारतीय को चार धाम के साथ हल्दीघाटी भी अवश्य जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि हल्दीघाटी केवल एक युद्धस्थल नहीं बल्कि भारतीय स्वाभिमान की पवित्र भूमि है।

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का 81 किलो का भाला, उनका युद्ध कौशल और मातृभूमि के लिए समर्पण आज भी लोगों को रोमांचित कर देता है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने की सबसे अधिक आवश्यकता है।

जिला मुख्यालय पर स्थापित होगी भव्य प्रतिमा:जिला पंचायत अध्यक्ष (प्रo)

पूरा हाल उसे समयत तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह ने घोषणा की, जल्द ही जिला मुख्यालय पर महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी और महाराणा प्रताप छात्रावास का भी निर्माण किया जाएगा।

महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव और हिंदू स्वाभिमान के प्रतीक

रामकृष्ण पाण्डेय ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं बल्कि राष्ट्र गौरव और हिंदू स्वाभिमान के अमर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि “जिस योद्धा ने जंगलों में घास की रोटी खाकर जीवन गुजार लिया लेकिन मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।”

प्राचार्य प्रो. अरविंद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में युवाओं को महाराणा प्रताप के जीवन चरित्र को पढ़ने और समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “देश और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाला योद्धा कभी इतिहास से मिट नहीं सकता। महाराणा प्रताप भारत की आत्मा हैं।”

सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में मनाई गई जयंती

कार्यक्रम में राजकुमार सिंह उर्फ राजू शाही, कुँवर आनंद सिंह, सौरभ पाल सिंह, दिवाकर विक्रम सिंह, पूर्व विधायक अनिल सिंह, माधव सिंह, उपेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजू सिंह, फते बहादुर सिंह, कृष्णपाल सिंह, विक्रांत सिंह विक्कू, अमर नाथ सिंह, कैलाश नाथ दुबे, प्रदीप वर्मा, दिलीप सिंह, शत्रुजीत सिंह, योगेंद्र सिंह, मुरारी सिंह सहित दो सौ से अधिक लोग मौजूद रहे।

क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष भूपनारायण सिंह उर्फ राजन सिंह की अध्यक्षता तथा महामंत्री हरेंद्र बहादुर सिंह के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में विकास सिंह हाड़ा, राजवंत सिंह, केपी सिंह, ओपी सिंह, कौशलेन्द्र त्रिपाठी, करण सिंह, कृपा शंकर त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, अष्टभुजा सिंह श्रीनेत, शिवम सिंह, विपलव दुबे, विनय शर्मा और बीरेंद्र सिंह सहित दर्जनों वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन पर अपने विचार रखे।

युवाओं से की गई राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान अपनाने की अपील

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज की युवा पीढ़ी को मोबाइल और आधुनिकता की चकाचौंध से निकलकर इतिहास के महानायकों से प्रेरणा लेने की जरूरत है। महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम का जीवंत उदाहरण है।

कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने महाराणा प्रताप की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और “जय महाराणा” के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का चेक वितरण का सिद्धार्थनगर में लाइव प्रसारण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर से शिक्षामित्रों के सम्मान एवं बढ़े हुए मानदेय वितरण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण सिद्धार्थनगर के लोहिया कला भवन में देखा गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम में सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक जय प्रताप सिंह, श्यामधनी राही, विनय वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

शिक्षामित्रों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बताया कि पहले शिक्षामित्रों को ₹3500 मानदेय मिलता था, जिसे पहले बढ़ाकर ₹10,000 किया गया और अब ₹8000 की बढ़ोतरी के साथ ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया है। यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल से लागू कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

महिला शिक्षामित्रों को मिलेगी नजदीकी तैनाती

मुख्यमंत्री ने महिला शिक्षामित्रों के लिए राहत की बात करते हुए कहा कि उन्हें उनके घर के नजदीक विद्यालयों में तैनाती देने की दिशा में सरकार काम कर रही है। इससे उनकी कार्यक्षमता और सुविधा दोनों बढ़ेगी।

गुणवत्तापूर्ण और डिजिटल शिक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे सकारात्मक सोच के साथ बच्चों को डिजिटल और तकनीकी शिक्षा दें। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को विश्वास के साथ स्कूल भेजते हैं, इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

स्कूल चलो अभियान’ से ड्रॉपआउट खत्म करने का लक्ष्य

प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार

सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा के स्कूलों में स्मार्ट क्लास, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें, जूते-मोजे और बैग दिए जा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हो।

जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं

सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें पूरी निष्ठा से कार्य करना चाहिए।

विधायक जय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों की भूमिका ग्रामीण शिक्षा में बेहद महत्वपूर्ण है।

अन्य विधायकों ने भी इस निर्णय को सराहनीय बताते हुए शिक्षामित्रों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की अपील की।

प्रतीकात्मक चेक वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान 10 शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक वितरित किया गया।

बेसिक शिक्षा विभाग के बच्चों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया।

अधिकारियों का संदेश

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने शिक्षकों से समय पर विद्यालय पहुंचने और एआई जैसी नई तकनीकों की जानकारी बच्चों को देने की अपील की। उन्होंने सभी शिक्षामित्रों को बधाई दी।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

इस दौरान सांसद प्रतिनिधि एस.पी. अग्रवाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेष कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी, शिक्षामित्र एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का चेक वितरण का सिद्धार्थनगर में लाइव प्रसारण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर से शिक्षामित्रों के सम्मान एवं बढ़े हुए मानदेय वितरण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण सिद्धार्थनगर के लोहिया कला भवन में देखा गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम में सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक जय प्रताप सिंह, श्यामधनी राही, विनय वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

शिक्षामित्रों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बताया कि पहले शिक्षामित्रों को ₹3500 मानदेय मिलता था, जिसे पहले बढ़ाकर ₹10,000 किया गया और अब ₹8000 की बढ़ोतरी के साथ ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया है। यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल से लागू कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

महिला शिक्षामित्रों को मिलेगी नजदीकी तैनाती

मुख्यमंत्री ने महिला शिक्षामित्रों के लिए राहत की बात करते हुए कहा कि उन्हें उनके घर के नजदीक विद्यालयों में तैनाती देने की दिशा में सरकार काम कर रही है। इससे उनकी कार्यक्षमता और सुविधा दोनों बढ़ेगी।

गुणवत्तापूर्ण और डिजिटल शिक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे सकारात्मक सोच के साथ बच्चों को डिजिटल और तकनीकी शिक्षा दें। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को विश्वास के साथ स्कूल भेजते हैं, इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

स्कूल चलो अभियान’ से ड्रॉपआउट खत्म करने का लक्ष्य

प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार

सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा के स्कूलों में स्मार्ट क्लास, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें, जूते-मोजे और बैग दिए जा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हो।

जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं

सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें पूरी निष्ठा से कार्य करना चाहिए।

विधायक जय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों की भूमिका ग्रामीण शिक्षा में बेहद महत्वपूर्ण है।

अन्य विधायकों ने भी इस निर्णय को सराहनीय बताते हुए शिक्षामित्रों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की अपील की।

प्रतीकात्मक चेक वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान 10 शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक वितरित किया गया।

बेसिक शिक्षा विभाग के बच्चों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया।

अधिकारियों का संदेश

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने शिक्षकों से समय पर विद्यालय पहुंचने और एआई जैसी नई तकनीकों की जानकारी बच्चों को देने की अपील की। उन्होंने सभी शिक्षामित्रों को बधाई दी।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

इस दौरान सांसद प्रतिनिधि एस.पी. अग्रवाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेष कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी, शिक्षामित्र एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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