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“10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच गूंजी नवजात की किलकारी: एग्जाम सेंटर में नाबालिग छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म, मचा हड़कंप”

धार (मध्य प्रदेश) से स्पेशल रिपोर्ट
10वीं बोर्ड परीक्षा के बीच परीक्षा केंद्र में नाबालिग छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म — हड़कंप, आश्चर्य और संवेदनशील मोड़
धार जिले के पीथमपुर थाना सेक्टर-1 के एक परीक्षा केंद्र में मंगलवार को एक ऐसा नजारा सामने आया, जिसे देखकर वहाँ मौजूद हर किसी के चेहरे पर आश्चर्य, चिंता, और सहानुभूति के भाव उभर आए।
10वीं बोर्ड परीक्षा दे रही एक नाबालिग छात्रा को गणित का पेपर देते समय अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। दर्द से परेशान होकर वह परीक्षा केंद्र के शौचालय की ओर चली गई — और इसी बीच वहाँ ही एक नवजात को जन्म दे दिया।


घटना का क्रम — किस तरह हुआ सब कुछ?
 सुबह करीब परीक्षा शुरू: छात्रा ने 10वीं बोर्ड का गणित का पेपर देना शुरू किया।
 ताकि कुछ घंटे के बाद… दर्द अचानक शुरू: पेट में तेज दर्द की शिकायत होने पर छात्रा बिना किसी को पहले बताए शौचालय की ओर चली गई।
 फिर वहीँ जन्म: थोड़ी ही देर में उसने एक बच्चे को जन्म दिया — समूचा परीक्षा केंद्र एकाएक हक्का-बक्का रह गया। 

परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों ने तुरंत 108 एंबुलेंस बुलाई और नाबालिग छात्रा व नवजात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पीथमपुर तक ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने पुष्टि की कि दोनों (जन्म देने वाली छात्रा और नवजात) फिलहाल *स्वस्थ और चिकित्सकीय निगरानी में हैं। �

जाँच में खुलासा — क्या हुआ असल में?
पुलिस ने छात्रा से पूछताछ की तो एक गंभीर और संवेदनशील तथ्य सामने आया — उसने बयान दिया कि उसके जीवन में पिछले दो वर्षों से एक युवक मौजूद था, जिसके साथ उसके सम्बन्ध रहे, और इसी से वह गर्भवती थी।
उस युवक के खिलाफ पुलिस ने कानूनी कार्रवाई (POCSO समेत) दर्ज कर मामला आगे जांच के लिए भेज दिया है। �

थाने की उप निरीक्षक चांदनी सिंगार ने बताया कि मामले की हर वैधानिक (कानूनी) पहलू से जांच की जा रही है, और आरोपी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 


परीक्षा-केंद्र में हड़कंप!
जैसे ही यह खबर फैल गई कि एक छात्रा ने जन्म दिया है, परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाएँ, छात्रों और पर्यवेक्षकों में हड़कंप मच गया। कुछ अभिभावक चिंतित नजर आए, तो कुछ स्टाफ सदस्यों ने तत्काल हरकत में आकर राहत कार्य शुरू किया।

एक शिक्षक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया,
“हम सभी के लिए यह स्थिति बिल्कुल असामान्य थी… हमें आशंका थी कि बच्ची को कोई स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन अस्पताल से जानकारी मिली कि दोनों स्वस्थ हैं।”

कानूनी और सामाजिक संवेदनाएँ
यह केवल एक विचित्र घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर संदेश है — खासकर जब नाबालिगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और संरक्षण की बात सामने आती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मामले अक्सर POCSO (पहुँचनीय बच्चों से यौन शोषण का कानून) के दायरे में आते हैं, और बच्चों की सुरक्षा तथा मनोवैज्ञानिक समर्थन महत्वपूर्ण होता है।

समाप्ति बयान
धार जिले के इस परीक्षा केंद्र की घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि हमारा समाज, अभिभावक, विद्यालय और प्रशासन मिलकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कैसी देख-रेख कर रहे हैं। एक तरफ़ जहां शिक्षा के लिए परीक्षा है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों के प्रति सतर्कता और समर्थन की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

लखनऊ में कारोबारी की मौत: बेटे अक्षत प्रताप सिंह पर हत्या का आरोप, पुलिस जांच जारी

स्थान: Lucknow
थाना: आशियाना | जांच एजेंसी: Uttar Pradesh Police
घटना की तिथि: 20 फरवरी (तड़के) | मामला दर्ज: 21 फरवरी


राजधानी लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र के सेक्टर-एल में रहने वाले 49 वर्षीय कारोबारी मानवेंद्र सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस ने उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, 21 फरवरी को मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की सूचना आशियाना थाने में दी गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ और घर की तलाशी के दौरान मामला हत्या का प्रतीत हुआ।
क्या है आरोप?
पुलिस के प्रारंभिक बयान के अनुसार, 20 फरवरी की तड़के पिता-पुत्र के बीच पढ़ाई और करियर को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान अक्षत प्रताप सिंह ने घर में रखी लाइसेंसी राइफल से गोली चलाई, जिससे मानवेंद्र सिंह की मृत्यु हो गई।
पुलिस का कहना है कि घटना के बाद शव को छिपाने का प्रयास किया गया। घर की तलाशी में प्लास्टिक ड्रम से शव का हिस्सा बरामद हुआ। अन्य हिस्सों की बरामदगी शहर के अलग क्षेत्र से की गई।
जांच में अब तक क्या सामने आया?
वारदात घर की ऊपरी मंजिल पर होने की आशंका।
हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश के संकेत।
फॉरेंसिक टीम द्वारा मौके से नमूने एकत्र।
लाइसेंसी हथियार को कब्जे में लेकर बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया।
आसपास के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच जारी।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
परिवार की स्थिति
घटना के समय घर में मौजूद अन्य सदस्य सदमे में हैं। पुलिस के अनुसार, परिवार को आवश्यक सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
आधिकारिक बयान
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विश्लेषण और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
महत्वपूर्ण सूचना (डिस्क्लेमर)
यह समाचार उपलब्ध पुलिस जानकारी और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

आज शाम परसा रेलवे क्रॉसिंग पर वीडियो वायरल

आज शाम परसा रेलवे क्रॉसिंग पर वीडियो वायरल
ट्रेन 55075 (गोरखपुर से बढ़नी पैसेंजर) शाम करीब 4:40 बजे परसा पहुंची


सिद्धार्थनगर।
आज (तारीख) शाम लगभग 4:40 बजे, जनपद के परसा रेलवे क्रॉसिंग पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे फाटक खुला होने और ट्रेन के करीब आने से पहले गति रोकने की घटना दिखाई दे रही है। वीडियो में मौजूद लोगों का दावा है कि ट्रेन नंबर 55075, जो गोरखपुर जंक्शन से बरहनी के लिए चलने वाली पैसेंजर ट्रेन है, फाटक पर पहुंची थी और फाटक समय पर बंद नहीं था।
इस वायरल वीडियो के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों ने ट्रेन के निकट आने पर देखा कि फाटक खुला पड़ा था। उन्होंने मौके पर जाकर कथित तौर पर गेटमैन को जगाया, जिसके बाद आनन-फानन में फाटक बंद किया गया और फिर ट्रेन को सुरक्षित रूप से आगे भेजा गया।
ट्रेन 55075 का पूरा समय सारिणी
रेलवे टाइमटेबल के अनुसार ट्रेन संख्या 55075 (गोरखपुर – बढनी पैसेंजर)
गोरखपुर जंक्शन से प्रतिदिन सुबह लगभग 11:00 बजे रवाना होती है और
लगभग 01:46 बजे परसा स्टेशन पर पहुँचती है जहाँ यह लगभग 2 मिनट के लिये रुकती है।
इसके बाद यह ट्रेन लगभग 02:20 बजे बरहनी स्टेशन पर पहुँचती है।


यह समय सारिणी यह दर्शाती है कि ट्रेन परसा पर करीब 01:46-01:48 बजे के बीच रुकती है। �
हालांकि वायरल वीडियो में शाम 4:40 बजे दिखाया गया है, हो सकता है ट्रेन का वास्तविक रनिंग-स्टेटस उस दिन देरी या विशेष स्थिति के कारण बदल गया हो।


आधिकारिक पुष्टि शेष
इस पूरे मामले को लेकर संबंधित रेलवे विभाग से संपर्क किया गया है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ है। विभाग की ओर से पुष्टि मिलते ही खबर अपडेट की जाएगी।
पत्रकारिता का नजरिया
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय स्रोतों के दावों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या विभाग पर दोषारोपण का उद्देश्य नहीं है। यदि जांच में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो उचित विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

गोरखपुर में रेजिडेंट डॉक्टर से छेड़छाड़ का आरोप

गोरखपुर (मुख्यमंत्री का गृह जनपद)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। All India Institute of Medical Sciences, Gorakhpur में तैनात नागालैंड की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने तीन युवकों पर छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणी और नस्लीय उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
पीड़िता के अनुसार, रविवार 22 फरवरी की रात लगभग 8 बजे वह शहर के एक मॉल से लौट रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार तीन युवकों ने कथित रूप से करीब डेढ़ किलोमीटर तक उनका पीछा किया। आरोप है कि रास्ते भर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं और एम्स गेट नंबर-2 के पास गलत तरीके से छूने की कोशिश की गई। शोर मचाने पर आरोपी मौके से फरार हो गए।
संगठन ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़िता ने मामले की शिकायत North East Federation of All India Resident Doctors (NAFORD) से भी की है। संगठन ने इसे नस्लीय और लैंगिक उत्पीड़न का गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई
गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ के अनुसार, पीड़िता की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज की जांच में एक संदिग्ध बाइक चिन्हित की गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
मुख्यमंत्री के गृह जनपद में इस तरह की घटना ने महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषकर स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत महिला डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने त्वरित और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।


FTन्यूज़ इस प्रकरण पर सतत नजर बनाए हुए है। आधिकारिक पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण बना औपचारिकता?

नौगढ़ में “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम पर सवाल


सिद्धार्थनगर। शासन की मंशा जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त कर 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने की है, वहीं जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की पोल खुलती दिखाई दे रही है। विकास खण्ड नौगढ़ के सभागार में आयोजित “पोषण भी, पढ़ाई भी” प्रशिक्षण कार्यक्रम में अव्यवस्था के आरोप सामने आए हैं।
दूर-दराज़ क्षेत्रों से प्रशिक्षण के लिए पहुंचीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण के नाम पर केवल एक दिन औपचारिक सत्र आयोजित किया गया, जबकि शेष दिनों में न तो प्रशिक्षक उपस्थित रहे और न ही समुचित व्यवस्था दिखाई दी।
मंगलवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई कार्यकत्रियों को सभागार में प्रवेश तक नहीं मिला। इसके विरोध में उन्होंने प्रशिक्षण स्थल के बाहर बैठकर रोष जताया। कार्यकत्रियों का कहना है कि विभागीय ग्रुप में प्रशिक्षण संबंधी निर्देश जारी थे, इसके बावजूद मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था।
योजना का उद्देश्य क्या है?
“पोषण भी, पढ़ाई भी” वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित न रखकर उन्हें प्री-स्कूल शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना है।
ईसीसीई (ECCE) मॉडल के तहत खेल-आधारित शिक्षण पद्धति पर कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर ढंग से हो सके। इस प्रशिक्षण के लिए शासन द्वारा स्टेशनरी, भोजन, प्रशिक्षण स्थल किराया तथा दूर से आने वाली कार्यकत्रियों के टीए आदि मदों में बजट आवंटित किया जाता है।
ऐसे में यदि प्रशिक्षण ही व्यवस्थित रूप से न हो, तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।
कार्यकत्रियों की पीड़ा
प्रदर्शन कर रहीं कार्यकत्रियों ने मीडिया को बताया कि:
पिछले तीन दिनों में केवल एक दिन प्रशिक्षण हुआ।
अन्य दिनों में प्रशिक्षक उपस्थित नहीं रहे।
मंगलवार को कई कार्यकत्रियों को सभागार में प्रवेश नहीं दिया गया।
दूरस्थ क्षेत्रों से आने के बावजूद समय और संसाधनों की बर्बादी हुई।
प्रशिक्षण न होने से उनके नियमित कार्य भी प्रभावित हुए।
धूप में बैठकर विरोध जता रहीं कार्यकत्रियों ने मांग की कि प्रशिक्षण पारदर्शी और पूर्ण रूप से कराया जाए, ताकि शासन की मंशा धरातल पर पूरी हो सके।
प्रशासनिक पक्ष की प्रतीक्षा
हालांकि, इस संबंध में जिला कार्यक्रम विभाग का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका था। विभागीय प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की सक्रियता की चर्चा अक्सर होती रही है। ऐसे में कार्यक्रम विभाग पर लगे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से बच्चों और कार्यकत्रियों तक पहुंच सके।

SDM आवास के सामने चोरी से मचा हड़कंप, व्यापारियों का बाजार बंद कर विरोध

सिद्धार्थनगर / बांसी
जनपद सिद्धार्थनगर के बांसी कस्बे में उस समय हड़कंप मच गया जब उप जिलाधिकारी (SDM) बांसी और पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) बांसी के आवास के ठीक सामने स्थित एक प्रतिष्ठित व्यापारी की दुकान में चोरी की घटना सामने आई। घटना के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कस्बे की कई दुकानों को बंद कर विरोध दर्ज कराया गया।
 क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका बांसी अध्यक्ष पद के पूर्व प्रत्याशी एवं प्रतिष्ठित व्यापारी विष्णु जयसवाल उर्फ सोनू जयसवाल की किराना दुकान को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया।
पीड़ित व्यापारी के अनुसार—
विभिन्न कंपनियों की स्कीम के माध्यम से प्राप्त लगभग 100 ग्राम सोना
करीब 1 किलो चांदी
मोबाइल फोन
दुकान में लगा सीसीटीवी कैमरा और डीवीआर सिस्टम
चोर अपने साथ ले गए।
हालांकि चोरी गए सामान की सटीक कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है और पुलिस द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।
व्यापारियों में आक्रोश
घटना संवेदनशील स्थान पर होने के कारण व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारियों के आवास के सामने ही चोरी हो रही है तो आम बाजार की सुरक्षा कैसी होगी?
विरोध स्वरूप कई व्यापारियों ने बाजार बंद कर नाराजगी जताई और पुलिस से शीघ्र खुलासे की मांग की।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली बांसी पुलिस मौके पर पहुंची।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए।
पुलिस क्षेत्राधिकारी रोहिणी यादव भी मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।

जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर ने किया विद्यालय का निरीक्षण, प्रधानाध्यापक से मांग स्पष्टीकरण

सिद्धार्थनगर। 24 फरवरी 2026/जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी.एन. द्वारा पीएम श्री कम्पोजिट, विद्यालय, सोनखर, विकास खण्ड बांसी तथा मॉडल प्राइमरी स्कूल सूपाराजा का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा बच्चों से पढ़वाया गया। जिसमें कुछ बच्चे पढ़ पाये, कुछ नही। बच्चे ड्रेस पहने थे। बच्चों के न पढ़ पाने पर जिलाधिकारी ने प्रधानाध्यापक गीता वर्मा का स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने साफ-सफाई व्यवस्था ठीक कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी द्वारा पीटीएम रजिस्टर, निपुण तालिका, शिक्षक डायरी, साप्ताहिक आकलन ट्रैकर, मिड-डे मील रजिस्टर आदि को देखा गया। मॉडल प्राइमरी स्कूल सूपाराजा में प्रधानाध्यापक जया साहनी का रजिस्टर पर हस्ताक्षर था किन्तु मौके पर उपस्थित नही थी। जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए शो-का नोटिस निर्गत करने का निर्देश दिया।

मदद चाहिए? कृपया पहले मरने का कष्ट करें

भारत में लोकतंत्र पूरी तरह जीवित है, बस नागरिक का जीवित रहना थोड़ा असुविधाजनक माना जाने लगा है। यदि आपकी पेंशन अटकी है, इलाज के पैसे नहीं हैं, सड़क टूटी पड़ी है या न्याय वर्षों से लंबित है, तो सबसे बड़ी गलती यही है कि आप अभी तक ज़िंदा हैं। जीवित व्यक्ति आवेदन देता है, दफ्तरों के चक्कर काटता है, निवेदन करता है और बदले में “कल आइए”, “साहब मीटिंग में हैं”, “फाइल ऊपर गई है” या “कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी” जैसे अमर वाक्य प्राप्त करता है। व्यवस्था भी क्या करे, जीवित आदमी में इमरजेंसी वाली चमक नहीं होती, न मीडिया की ब्रेकिंग बनता है, न ट्वीट योग्य संवेदना जगाता है।

लेकिन जैसे ही कोई हादसा होता है, एक मौत, एक आत्महत्या, एक वायरल वीडियो और व्यवस्था में करंट दौड़ जाता है। जहां फाइल महीनों से धूल खा रही थी, वहां एम्बुलेंस से तेज़ फैसले दौड़ने लगते हैं। नेता संवेदना व्यक्त करते हैं, अधिकारी दौरा करते हैं, जांच बैठती है, मुआवजा घोषित होता है और नौकरी का आश्वासन भी मिल जाता है। जो काम जीवित व्यक्ति वर्षों में नहीं करा पाया, वह मृतक कुछ घंटों में कर दिखाता है। जीते जी इलाज के लिए पचास हजार नहीं मिलते, मरने के बाद पांच लाख का मुआवजा मिल जाता है। जीते जी सड़क नहीं बनती, हादसे के बाद रातों-रात डामर बिछ जाता है; जीते जी सुनवाई नहीं होती, मौत के बाद विशेष जांच दल बैठ जाता है। मानो प्रशासन का मौन सूत्र हो, रोकथाम महंगी है, मुआवजा सस्ता पड़ता है।

संवेदनाएं भी अब मानो सरकारी कैलेंडर से संचालित होती हैं। घटना के दो घंटे बाद ट्वीट, छह घंटे बाद दौरा, चौबीस घंटे बाद मुआवजा, अड़तालिस घंटे बाद नई खबर और पुरानी फाइल बंद। धीरे-धीरे नागरिकों के बीच यह धारणा घर करती जा रही है कि जीवित इंसान समस्या है और मृत इंसान “मामला” बन जाता है। यह व्यंग्य जरूर है, पर यदि इसे पढ़कर हँसी नहीं आती तो शायद इसलिए कि सच इसके बहुत करीब खड़ा है।

विद्युत विभाग के पूर्व कर्मी द्वारा किया गया जालसाजी, अब जबरन धन उगाही पर ऊतारु

कुशीनगर। जनपद के पश्चिमी छोर पर स्थित खोठ्ठा बाजार में एक विद्युत कर्मी द्वारा पहले जालसाजी करके फंसाया और अब जबरन धन उगाही कर ऊतारु है।

कनेक्शन के नाम पर 2500 रुपए हड़पे 

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुशीनगर जनपद के मोतीचक खंड अन्तर्गत स्थित ग्राम सभा बरवा बावन निवासी ब्यासमुनी उपाध्याय की पत्नी ज्योति उपाध्याय को 2016 में विद्युत विभाग कर्मी सदानंद यादव द्वारा यह बताया गया कि आपके राशनकार्ड पर मात्र 2500 रुपये के पंजीकरण खर्च पर विद्युत कनेक्शन हो जाएगा और आपका बिल भी नहीं आएगा. महिला ने विद्युत कर्मी की बातों पर विश्वास करके 2500 रुपये दे दिया गया. विद्युत कर्मी सदानंद ने महिला के घर में मीटर लगा दिया और बताया कि यह कनेक्शन गरीब परिवार के लिए है इसलिए इसके कागजात नहीं दिए जाते।

9 वर्षों बाद ठगी का पता चला

9 वर्षों बाद इस फरवरी माह में विभागीय जांच के दौरान महिला को ज्ञात हुआ कि विद्युत कर्मी सदानंद यादव ने धोखा देकर 2500 रुपये ऐंठ लिए और विश्वास दिलाने के लिए फर्जी तरीके से बिजली मीटर लगा दिया।

20 हजार में बिल माफ कराने का दावा

धोखाधड़ी का खुलासा होने पर ज्योति ने विद्युत कर्मी से नाराजगी व्यक्त की तो वह कहा कि जेई साहब से बात करके मामले को खत्म करवा देगा.

दूसरे दिन सदानंद ने ज्योति को बताया कि विभागीय गड़बड़ी के कारण ऐसा हो गया. आपका बिल सवा लाख के लगभग है. साहब 20000 रुपये में पूरा बिल माफ करके नया कनेक्शन दे देंगे. इस बात का विश्वास दिलाने के लिए कर्मी द्वारा 15 फरवरी को एक आनलाइन विद्युत कनेक्शन का मैसेज महिला के ह्वाट्सएप पर भेज कर बताया कि साहब कनेक्शन कर दिए हैं, अब आप फ़ौरन बीस हजार रुपये दे दिजिए ताकि आपका दूसरा मीटर लग जाए. महिला द्वारा धन की व्यवस्था करके देने का आश्वासन दिया गया. जब महिला द्वारा धन की व्यवस्था ना होने की बात कही गई तो उक्त कर्मी बिगड़ गया और घर पहुंच कर कहा कि आप 500 रुपये दीजिए नहीं तो बिजली का कनेक्शन काट देंगे. स्थिति को देखते हुए महिला ने सदानंद को आनलाइन 500 रुपये दे दिए।

विद्युतकर्मी स्थाई कर्मचारी नहीं है 

स्थानीय विद्युत केंद्र पर जाने के बाद महिला को ज्ञात हुआ कि उक्त विद्युत कर्मी सदानंद यादव अब विभाग का नियमित कर्मचारी नहीं है फिर भी विभाग के कर्मियों से जान पहचान बना कर अपना उल्लू सीधा करता रहता है।

विद्युत अभियंता से की गई शिकायत 

 इस सम्बन्ध में बात करने के लिए जब स्थानीय विद्युत अभियंता महेंद्र प्रसाद से उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि विभागीय व्यस्तता के कारण वह अभी नहीं मिल सकते।

रिपोर्ट: अजीत प्रताप सिंह 

सिद्धार्थनगर में फिल्म के विरोध में उभरा आक्रोश, राज्यपाल के नाम प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर में फिल्म “Yadav Love Story” को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। बुधवार को बड़ी संख्या में यादव समाज के लोग कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए फिल्म पर रोक लगाने की मांग की।


धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि फिल्म की विषयवस्तु समाज विशेष की भावनाओं को आहत कर सकती है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन समाप्त किया गया।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
फिल्म “Yadav Love Story” के प्रदर्शन/प्रसारण पर तत्काल रोक।
फिल्म निर्माण से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक जांच।
भविष्य में सामाजिक समरसता बनाए रखने हेतु प्रशासनिक निगरानी।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
धरना-प्रदर्शन में सुभाष चंद्र यादव, नासिर, सुनील यादव पहलवान, चंद्रमणि यादव, कमलेश यादव, संजीत, चंद्रहास यादव, अनूप कुमार यादव, प्रमोद कुमार, संदीप पटवा, मनीष कुमार, उमेश यादव, ईश्वर यादव, जसवंत, राकेश यादव, धीरज यादव, शिवकुमार, रितेश गुप्ता, कमलेश कुमार, महेश यादव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
बताया गया कि चकबंदी विभाग के एसओसी ललित मिश्रा को ज्ञापन सौंपा गया, जिसे प्रशासन तक अग्रसारित किया गया है।
प्रशासन की स्थिति
जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित बिंदुओं की विधिक समीक्षा की जा रही है। किसी भी फिल्म पर रोक या आपराधिक कार्रवाई का निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रचलित कानूनों के तहत ही लिया जाता है।


यह समाचार धरना-प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर प्रकाशित किया जा रहा है। फिल्म के निर्माताओं या संबंधित पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रशासन ने आमजन से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

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