तीन दिवसीय प्रशिक्षण बना औपचारिकता?
नौगढ़ में “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम पर सवाल
सिद्धार्थनगर। शासन की मंशा जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त कर 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने की है, वहीं जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की पोल खुलती दिखाई दे रही है। विकास खण्ड नौगढ़ के सभागार में आयोजित “पोषण भी, पढ़ाई भी” प्रशिक्षण कार्यक्रम में अव्यवस्था के आरोप सामने आए हैं।
दूर-दराज़ क्षेत्रों से प्रशिक्षण के लिए पहुंचीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण के नाम पर केवल एक दिन औपचारिक सत्र आयोजित किया गया, जबकि शेष दिनों में न तो प्रशिक्षक उपस्थित रहे और न ही समुचित व्यवस्था दिखाई दी।
मंगलवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई कार्यकत्रियों को सभागार में प्रवेश तक नहीं मिला। इसके विरोध में उन्होंने प्रशिक्षण स्थल के बाहर बैठकर रोष जताया। कार्यकत्रियों का कहना है कि विभागीय ग्रुप में प्रशिक्षण संबंधी निर्देश जारी थे, इसके बावजूद मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था।
योजना का उद्देश्य क्या है?
“पोषण भी, पढ़ाई भी” वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित न रखकर उन्हें प्री-स्कूल शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना है।
ईसीसीई (ECCE) मॉडल के तहत खेल-आधारित शिक्षण पद्धति पर कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर ढंग से हो सके। इस प्रशिक्षण के लिए शासन द्वारा स्टेशनरी, भोजन, प्रशिक्षण स्थल किराया तथा दूर से आने वाली कार्यकत्रियों के टीए आदि मदों में बजट आवंटित किया जाता है।
ऐसे में यदि प्रशिक्षण ही व्यवस्थित रूप से न हो, तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।
कार्यकत्रियों की पीड़ा
प्रदर्शन कर रहीं कार्यकत्रियों ने मीडिया को बताया कि:
पिछले तीन दिनों में केवल एक दिन प्रशिक्षण हुआ।
अन्य दिनों में प्रशिक्षक उपस्थित नहीं रहे।
मंगलवार को कई कार्यकत्रियों को सभागार में प्रवेश नहीं दिया गया।
दूरस्थ क्षेत्रों से आने के बावजूद समय और संसाधनों की बर्बादी हुई।
प्रशिक्षण न होने से उनके नियमित कार्य भी प्रभावित हुए।
धूप में बैठकर विरोध जता रहीं कार्यकत्रियों ने मांग की कि प्रशिक्षण पारदर्शी और पूर्ण रूप से कराया जाए, ताकि शासन की मंशा धरातल पर पूरी हो सके।
प्रशासनिक पक्ष की प्रतीक्षा
हालांकि, इस संबंध में जिला कार्यक्रम विभाग का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका था। विभागीय प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की सक्रियता की चर्चा अक्सर होती रही है। ऐसे में कार्यक्रम विभाग पर लगे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से बच्चों और कार्यकत्रियों तक पहुंच सके।
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