“कार्यकाल की उलटी गिनती शुरू: 26 मई से पहले खर्च पर सख्ती, यूपी में पंचायत चुनाव की आहट”
सिद्धार्थनगर में प्रशासन का स्पष्ट निर्देश—खाते से अधिक खर्च पर तय होगी जिम्मेदारी, बकाया से बचने पर जोर
सिद्धार्थनगर / उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में प्रशासनिक सक्रियता तेज होती नजर आ रही है। इसी क्रम में सिद्धार्थनगर जनपद से एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी हुआ है, जिसने पंचायत स्तर पर कामकाज की दिशा को स्पष्ट कर दिया है।
जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 26 मई 2026 को वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस तय समयसीमा के मद्देनजर प्रशासन ने वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। क्या है प्रशासन का निर्देश?
निर्देश में कहा गया है कि
25 मई 2026 तक ग्राम पंचायत के खाते में उपलब्ध धनराशि के अनुरूप ही कार्य कराए जाएं।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद कोई भी भुगतान लंबित न रहे, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते वित्तीय संतुलन नहीं बनाया गया, तो भविष्य में भुगतान विवाद और कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
जिम्मेदारी भी तय
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि
यदि किसी भी स्थिति में उपलब्ध धनराशि से अधिक व्यय किया जाता है और बाद में भुगतान या विवाद की स्थिति बनती है, तो संबंधित स्तर पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।
यह निर्देश सीधे तौर पर पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
मानदेय भुगतान पर विशेष जोर
प्रशासन ने पंचायत स्तर पर कार्यरत
पंचायत सहायकों
सामुदायिक शौचालय के केयरटेकर
के मानदेय भुगतान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी कर्मचारी का भुगतान लंबित न रहे और व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
चुनावी पृष्ठभूमि में बढ़ी सतर्कता
गौरतलब है कि पूरे उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगामी समय में प्रस्तावित है, ऐसे में यह निर्देश सिर्फ एक जनपद तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक प्रशासनिक दृष्टिकोण का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कार्यकाल समाप्ति से पहले वित्तीय अनुशासन लागू करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि
नई पंचायतों को साफ-सुथरी वित्तीय स्थिति मिले
पुराने कार्यकाल के बकाया और विवाद आगे न बढ़ें
शासन की पारदर्शिता नीति जमीनी स्तर पर प्रभावी हो
प्रशासन का संदेश साफ
इस पूरे निर्देश से प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि
कार्यकाल समाप्ति से पहले हर पंचायत अपना वित्तीय लेखा-जोखा संतुलित करे
अनावश्यक खर्च और बकाया से बचा जाए
नियमों के अनुसार ही कार्य संपन्न किए जाएं
“चुनाव से पहले हिसाब-किताब दुरुस्त करने का संदेश, पंचायतों में बढ़ी सतर्कता”
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