मा० उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गो संरक्षण अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की बैठक सम्पन्न*_ मा० उपाध्यक्ष ने विभिन्न गो आश्रय स्थलों का किया निरीक्षण*_
रायबरेली मा० उपाध्यक्ष उ0प्र0 गो सेवा आयोग अतुल सिंह की अध्यक्षता में गो संरक्षण अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की समीक्षा बैठक विकास भवन स्थित महात्मा गांधी सभागार में सम्पन्न हुई।
बैठक में मा० उपाध्यक्ष द्वारा निर्देशित किया गया कि वर्तमान समय में गेहूं की कटाई हो चुकी है इस समय हमें भूसा सस्ते दर पर मिल सकता है इसलिए सभी गौशालाओं में छः माह का भूसा का भंडारण सुनिश्चित करा लिया जाए तथा हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता के लिए गोचर भूमि का समुचित उपयोग किया जाए। गौशालाओं के आस-पास गोचर की भूमि को चिन्हित कर उनको गौशालाओं के सर्पुद्व किया जाये, जिससे गोवंशों के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। किसानों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए, विकास खण्डों में गोष्ठी के द्वारा किसानों को गो आधारित खेती करने हेतु प्रेरित किया जाये। ग्रीष्मकाल को दृष्टिगत रखते हुए स्वच्छ पेयजल, जूट/तात के पर्दों, पंखों एवं पानी के छिड़काव के माध्यम से गोवंशों को लू एवं अत्यधिक तापमान से बचाने की प्रभावी व्यवस्था की जाए। बीमार गोवंशों के लिए पृथक सिक वार्ड की व्यवस्था तथा नियमित चिकित्सा निगरानी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। इसके अतिरिक्त गोशालाओं में स्वच्छता, सीसीटीवी निगरानी एवं विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। मा0 उपाध्यक्ष द्वारा गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ नवाचार को बढ़ावा देने पर बल दिया गया, जिससे गोशालाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि जनपद रायबरेली में गोसंरक्षण में अच्छा कार्य किया गया है इसकी मैं सरहना करता हूँ।
इससे पूर्व मा० उपाध्यक्ष, उ०प्र० गो सेवा आयोग अतुल सिंह द्वारा जनपद रायबरेली के कान्हा गोवंश विहार, त्रिपुला (अमावां), अस्थाई गो आश्रय स्थल- लोधवारी एवं वृहद गो आश्रय केंद्र- बेलखारा, ब्लॉक राही का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान गोवंशों के संरक्षण, पोषण एवं समुचित प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए उन्हें और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विभिन्न स्थलों पर हरे चारे की खेती, वर्मीकम्पोस्ट निर्माण एवं ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग जैसी पहलें संचालित पाई गईं, जिन्हें और व्यापक रूप से विकसित करने पर बल दिया गया। साथ ही गोवंशों के लिए पेयजल व्यवस्था को और अधिक सुलभ एवं व्यवस्थित बनाने तथा चारे की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
वृहद गो आश्रय केंद्रों में चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ साइलेज जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है। गोबर के समुचित निस्तारण एवं गोशालाओं की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने हेतु बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अंजुलता, अपर पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह, अपर निदेशक पशुपालन डॉ. अजय कुमार कन्नौजिया, परियोजना निदेशक डीआरडीए सतीश प्रसाद मिश्रा, जिला विकास अधिकारी अरूण कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ० कुलदीप कुमार द्विवेदी सहित संबंधित अधिकारीगण व प्रधान, सचिव आदि उपस्थित रहें।
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