सिद्धार्थनगर में ग्राम प्रधानों की एकजुट आवाज, कार्यकाल व भुगतान को लेकर सौंपा ज्ञापन
विकास भवन में बैठक के बाद प्रमुख सचिव को दिया मांग पत्र, शासन स्तर पर समाधान की जताई उम्मीद

सिद्धार्थनगर, 22 अप्रैल 2026 (संवाददाता)
जनपद सिद्धार्थनगर में ग्राम प्रधानों की समस्याओं और पंचायत संचालन से जुड़े मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। विकास भवन सभागार में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले जिले भर के प्रधान प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र ने की, जिसमें सभी ब्लॉकों के प्रधान संघ अध्यक्षों की सक्रिय भागीदारी रही।
बैठक के उपरांत प्रधानों द्वारा प्रमुख सचिव को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पंचायत संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। ज्ञापन में प्रमुख रूप से यह मांग की गई कि 26 मई को कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात या तो वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए अथवा उन्हें प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि ग्राम पंचायतों का कार्य प्रभावित न हो।

इसके अतिरिक्त प्रधानों ने केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों के लंबित भुगतान को शीघ्र जारी करने की मांग उठाई। विशेष रूप से मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों के भुगतान में देरी को लेकर चिंता व्यक्त की गई और इसे जल्द निपटाने का आग्रह किया गया।
प्रधान प्रतिनिधियों का कहना है कि भुगतान में विलंब और प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।
वहीं, प्रमुख सचिव द्वारा ज्ञापन प्राप्त करते हुए आश्वस्त किया गया कि सभी बिंदुओं को संबंधित स्तर पर अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया जाएगा।
शासन की मंशा
प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रधानों द्वारा उठाई गई समस्याओं और सुझावों को शासन स्तर पर गंभीरता से लिए जाने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।
निष्कर्ष
सिद्धार्थनगर में ग्राम प्रधानों की यह पहल न केवल पंचायत स्तर की समस्याओं को सामने लाने का प्रयास है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को प्रभावी बनाए रखने के लिए संवाद और समन्वय की आवश्यकता लगातार बनी हुई है।
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