परदेस में थम गई सांसें, घर की चौखट पर 45 दिनों से बेटे का इंतजार

सिद्धार्थनगर के रिजवान की सऊदी अरब में मौत के बाद परिवार बेहाल; पार्थिव शरीर वतन लाने की गुहार, मां की आंखें अंतिम दीदार के लिए तरसीं
सिद्धार्थनगर। घर की चौखट वही है, परिवार वही है और अपनों की आंखों में इंतजार भी वही है… लेकिन जिस रिजवान के लौटने की कभी खुशी से राह देखी जाती थी, आज उसी के पार्थिव शरीर के घर पहुंचने का इंतजार परिवार के लिए हर गुजरते दिन के साथ और भारी होता जा रहा है।
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील क्षेत्र के डोकम अमया गांव निवासी 42 वर्षीय रिजवान अहमद रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। परिवार के अनुसार वहां 22 जून 2026 को उनकी मृत्यु हो गई। मौत की सूचना गांव पहुंची तो घर में मातम छा गया।
परिजनों को उम्मीद थी कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिजवान का पार्थिव शरीर जल्द वतन आएगा और वे अपने बेटे, अपने परिजन को आखिरी बार देख सकेंगे।
लेकिन परिवार के मुताबिक देखते-देखते करीब 45 दिन गुजर गए और उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ।
मां की आंखों में बस एक आस—एक बार बेटे को देख लूं
रिजवान के परिवार के लिए यह इंतजार शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। बेटे की मौत का दुख एक तरफ है और अंतिम दर्शन न कर पाने की पीड़ा दूसरी तरफ।
घर में बैठे परिजन हर नई सूचना के साथ उम्मीद बांधते हैं कि शायद अब रिजवान का पार्थिव शरीर भारत आने का रास्ता साफ हो जाए।
परिवार की मांग बेहद सीधी है—रिजवान का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने में सहायता की जाए, ताकि परिवार अंतिम दर्शन कर सके और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई दे सके।
| 22 जून से शुरू हुआ इंतजार
परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रिजवान की मृत्यु 22 जून को सऊदी अरब में हुई। उसके बाद से परिवार पार्थिव शरीर स्वदेश आने की प्रतीक्षा कर रहा है।
करीब डेढ़ महीने तक इंतजार लंबा होने के बाद परिवार ने अपनी परेशानी सार्वजनिक रूप से सामने रखी और संबंधित अधिकारियों से मदद की मांग की।
एक परिवार और कई सवाल
रिजवान का पार्थिव शरीर भारत कब पहुंचेगा?
यदि कोई दस्तावेजी प्रक्रिया बाकी है तो वह किस स्तर पर लंबित है? परिवार को उसकी स्पष्ट जानकारी कब मिलेगी? आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए संबंधित भारतीय अधिकारी किस स्तर पर सहायता कर सकते हैं?
इन सवालों का अंतिम और प्रमाणिक जवाब संबंधित सरकारी/दूतावास अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी से ही मिल सकेगा।
विदेश गया था कमाने, अब परिवार मांग रहा अंतिम दर्शन
रोजगार के लिए विदेश जाने वाले व्यक्ति के पीछे उसका पूरा परिवार उम्मीदों के साथ जुड़ा रहता है। घर से हजारों किलोमीटर दूर किसी अपने की मृत्यु हो जाना ही परिवार के लिए बहुत बड़ा आघात है। ऐसे में यदि अंतिम दर्शन के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़े तो परिवार की पीड़ा और बढ़ जाती है।
रिजवान के घर की कहानी भी इसी इंतजार के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
अब परिवार की नजर इस बात पर है कि आवश्यक प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कब उनका अपना व्यक्ति आखिरी सफर तय करके अपने गांव की मिट्टी तक पहुंचता है।
सबसे जरूरी तथ्य
नाम: रिजवान अहमद
उम्र: 42 वर्ष
निवास: डोकम अमया, तहसील इटवा, सिद्धार्थनगर
स्थान जहां मृत्यु बताई गई: सऊदी अरब
मृत्यु की तारीख: परिवार के अनुसार 22 जून 2026
परिवार का दावा: करीब 45 दिनों से पार्थिव शरीर आने का इंतजार
मांग: पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने में सरकारी सहायता
मौत के बाद अपनों को इंतजार क्यों?
विदेश में किसी भारतीय की मृत्यु होने पर कई तरह की स्थानीय कानूनी, चिकित्सकीय और दस्तावेजी औपचारिकताएं हो सकती हैं। इसलिए बिना आधिकारिक रिकॉर्ड देखे यह कहना उचित नहीं होगा कि रिजवान का पार्थिव शरीर आने में देरी किसकी वजह से हुई।
लेकिन एक मानवीय सवाल जरूर खड़ा होता है—शोक में डूबे परिवार को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी और यथासंभव शीघ्र सहायता मिलनी चाहिए।
यदि कोई दस्तावेज लंबित है तो परिवार को बताया जाए, यदि किसी औपचारिकता की जरूरत है तो उसे पूरा कराने में मार्गदर्शन मिले और यदि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो पार्थिव शरीर स्वदेश भेजने की कार्रवाई यथाशीघ्र आगे बढ़े।
क्योंकि इस घर की मांग किसी विवाद की नहीं है। यहां एक परिवार सिर्फ अपने रिजवान को आखिरी बार देखना और सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना चाहता है।
सारांश
सिद्धार्थनगर के डोकम अमया गांव निवासी 42 वर्षीय रिजवान अहमद की सऊदी अरब में 22 जून को मृत्यु होने की जानकारी परिवार ने दी है। परिजनों का कहना है कि करीब 45 दिन गुजरने के बाद भी पार्थिव शरीर भारत नहीं पहुंचा। परिवार संबंधित सरकारी अधिकारियों से सहायता की मांग कर रहा है। देरी का वास्तविक कारण आधिकारिक दस्तावेज सामने आए बिना निर्धारित नहीं किया जा सकता।
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