फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
सरकारी पोखरी पर कब्जे की शिकायत से गरमाया मामला, जांच के आदेश से बढ़ी हलचल

 

सिद्धार्थनगर में सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

सिद्धार्थनगर। नगर पालिका क्षेत्र में सरकारी पोखरी और कथित अतिक्रमण को लेकर मामला अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक मौर्य ने जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को लिखित शिकायत देकर संबंधित पोखरी की जमीनों की पैमाइश कराने, अभिलेखों की जांच करने तथा यदि अतिक्रमण की पुष्टि हो तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

Screenshot 20260812 091047

शिकायत में सिविल लाइन स्थित शास्त्री नगर में पंजाब नेशनल बैंक के सामने सरकारी पोखरी की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जे का प्रयास किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा शास्त्री नगर क्षेत्र में पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर भी शिकायत की गई है।

Screenshot 20260812 090117

वाल्मीकि नगर की पोखरी को लेकर भी शिकायत

वार्ड संख्या-1 वाल्मीकि नगर निवासी बालमुकुंद त्रिपाठी ने भी पोखरी की जमीन के दायरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले करीब पांच बीघे की पोखरी बताई जाती थी, लेकिन समय के साथ इसका दायरा कम हुआ है।

Screenshot 20260812 090158

उन्होंने गाटा संख्या 408, 409 और 410 से संबंधित जमीन को लेकर भी शिकायत की है और कुछ लोगों पर कथित रूप से पोखरी की जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगाए हैं।

बालमुकुंद त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की हैं। उन्होंने कुछ लोगों की ओर से धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है।

Screenshot 20260812 090103

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी व्यक्ति को इन आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।

DM ने गठित की जांच टीम

मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर जिलाधिकारी न्यायिक की अगुवाई में टीम गठित किए जाने की जानकारी दी।

Screenshot 20260812 090146

जिलाधिकारी के अनुसार जांच टीम मौके पर जाकर पूरे प्रकरण की जांच-पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में जिन जमीनों का उल्लेख किया गया है, उनका राजस्व अभिलेखों में वास्तविक दर्जा क्या है और मौके पर उनकी स्थिति क्या है।


Screenshot 20260812 090128

सबसे बड़ा सवाल

सरकारी पोखरी की जमीन आखिर कितनी सुरक्षित?

पोखरी और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में केवल शिकायत या आरोप के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेख, पैमाइश और मौके की जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।

यदि जांच में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की अगली जिम्मेदारी होगी। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच के जरिए स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

सारांश

सिद्धार्थनगर में सरकारी पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है। भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक मौर्य ने जिलाधिकारी से शिकायत कर पैमाइश और कार्रवाई की मांग की है। वाल्मीकि नगर निवासी बालमुकुंद त्रिपाठी ने भी पोखरी की जमीन और गाटा संख्या 408, 409 व 410 को लेकर शिकायत की है। जिलाधिकारी ने ADM न्यायिक की अगुवाई में जांच टीम गठित करने की बात कही है। अब जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है।

संपादकीय टिप्पणी

सरकारी जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती। पोखरी और तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्तियां केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि कार्रवाई आरोप या प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड, मौके की पैमाइश और निष्पक्ष जांच के आधार पर हो।

अगर जांच में अतिक्रमण मिलता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और अगर शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं मिलते तो वह तथ्य भी सामने आना चाहिए।

कानून सबके लिए समान है—सरकारी जमीन की सुरक्षा भी इसी सिद्धांत पर होनी चाहिए।

 

सिद्धार्थनगर में लोधी समाज की नई पहल, गांव-गांव पहुंच रहा जागरूकता का संदेश

अवंती बाई लोधी जयंती और कल्याण सिंह पुण्यतिथि कार्यक्रम को लेकर जनसंपर्क तेज, सदस्यता अभियान के साथ लगाए जा रहे जागरूकता बोर्ड


सिद्धार्थनगर। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा की ओर से जिले में सामाजिक जागरूकता और संगठन विस्तार का अभियान तेज किया गया है। आगामी 16 अगस्त को वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी जयंती तथा 21 अगस्त को स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को लेकर समाज के लोगों के बीच जनसंपर्क किया जा रहा है। इसी क्रम में गांव-गांव पहुंचकर लोगों को संगठन से जोड़ने और महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया जा रहा है।


सिद्धार्थनगर में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा की गतिविधियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। संगठन की ओर से सामाजिक एकजुटता, जागरूकता और समाज के युवाओं को शिक्षा एवं सामाजिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

इसी अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता एवं सदस्यता संबंधी बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिन पर संगठन से जुड़ने वाले लोगों के नाम अंकित किए जा रहे हैं। तस्वीरों में महासभा से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता बोर्ड लगाते तथा स्थानीय लोगों से संवाद करते दिखाई दे रहे हैं।

संगठन के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर जोड़ना और अपने महापुरुषों के जीवन, संघर्ष तथा विचारों से प्रेरणा लेने के लिए जागरूक करना बताया गया है।

बोर्ड पर वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी सहित समाज और देश के प्रेरणास्रोत महापुरुषों के चित्र लगाए गए हैं। इनके माध्यम से संगठन की ओर से समाज को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के योगदान से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है।

16 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम

महासभा की ओर से 16 अगस्त को महारानी अवंती बाई लोधी जयंती समारोह आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में कार्यक्रम के साथ नगर पालिका क्षेत्र से रोड शो और जनसभा का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

वहीं 21 अगस्त को स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर से बड़ी संख्या में लोगों को पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। संगठन की ओर से दो हजार से अधिक लोगों के लखनऊ पहुंचने का लक्ष्य बताया गया है।

इसके लिए कार्यकर्ताओं की ओर से गांव-गांव संपर्क किया जा रहा है और समाज के लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।

शिक्षा से राजनीति तक आगे बढ़ने का संदेश

महासभा से जुड़े लोगों का कहना है कि समाज की तरक्की केवल संगठन की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, आपसी सहयोग और युवाओं की भागीदारी से होगी।

संगठन की ओर से स्वर्गीय कल्याण सिंह के विचारों और समाज के अन्य महापुरुषों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अभियान में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिद्धार्थनगर में लोधी समाज के लोग लगातार संगठन से जुड़ रहे हैं और आने वाले समय में सामाजिक क्षेत्र में अपनी भागीदारी और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।


| समाज के लिए संदेश

“महापुरुषों का सम्मान तभी सार्थक, जब उनके विचारों को जीवन में उतारें”

संगठन की यह पहल केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित न रहकर यदि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहयोग, युवाओं के मार्गदर्शन और जरूरतमंद परिवारों की मदद जैसे विषयों से भी जुड़ती है, तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव दिखाई दे सकता है।

समाज की असली ताकत संख्या में नहीं, बल्कि शिक्षित, जागरूक और एक-दूसरे के सहयोगी समाज के निर्माण में है।

सारांश

सिद्धार्थनगर में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का जनसंपर्क अभियान तेज। 16 अगस्त को महारानी अवंती बाई लोधी जयंती समारोह और रोड शो-जनसभा की तैयारी। 21 अगस्त को कल्याण सिंह पुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए लखनऊ जाने की तैयारी। गांव-गांव लगाए जा रहे जागरूकता बोर्ड, नए सदस्यों को संगठन से जोड़ने का अभियान जारी।

संपादकीय टिप्पणी

किसी भी समाज की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि उसके वर्तमान प्रयासों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से होती है।

महापुरुषों की तस्वीरें लगाना और जयंती-पुण्यतिथि मनाना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके विचारों को शिक्षा, सामाजिक सेवा, अनुशासन, समान अवसर और युवाओं के विकास से जोड़ना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

सिद्धार्थनगर में चल रहा यह अभियान यदि इसी सोच के साथ आगे बढ़ता है और समाज के अधिक से अधिक लोग सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जुड़ते हैं, तो निश्चित रूप से इसका लाभ आने वाली पीढ़ी को मिल सकता है।

एकजुट समाज वही है, जो अपने इतिहास का सम्मान करे, वर्तमान की जिम्मेदारी समझे और भविष्य की पीढ़ी के लिए रास्ता तैयार करे।

 

कहाँ हो मंगरू, अब कहाँ पर पढ़त हौ?

गुरु जी की कलम से — शिक्षा व्यवस्था पर करारा व्यंग्य

विशेष संवाददाता | FT News Digital


प्रदेश में शिक्षक पदों की रिक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की चर्चा है, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिक्षित अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इसी तस्वीर को व्यंग्य के जरिए सामने लाता है मंगरू और गुरु जी का यह संवाद—जहाँ सवाल सीधा है, लेकिन जवाब तलाशना आसान नहीं।

सुबह-सुबह मिला मंगरू, माथे पर चिंता की लकीरें

सुबह-सुबह मंगरू मिला। चेहरे पर वही पुरानी मासूमियत थी, लेकिन माथे पर चिंता की लकीरें कुछ ज्यादा गहरी थीं।

मैंने पूछा—

“कहाँ हो मंगरू?”

वह बोला—

“यहीं हैं गुरुजी, लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि अब पढ़ें कहाँ और पढ़ाएँ कौन?”

मैंने कहा—

“अरे, हुआ क्या?”

मंगरू ने जेब से अखबार निकाला और बोला—

“गुरुजी, खबरों में शिक्षक पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियां बताई जा रही हैं। उधर लाखों पढ़े-लिखे लड़के-लड़कियां भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल में शिक्षक कम हैं और बेरोजगारों के घर में डिग्रियों का ढेर लगा है। अब आप ही बताइए—पढ़ा कहाँ जाए और पढ़ाए कौन?”

मैंने समझाते हुए कहा—

“धैर्य रखो मंगरू, भर्ती की प्रक्रिया और आयोग भी तो हैं।”

मंगरू मुस्कुराया और बोला—

“गुरुजी, हमारे यहां आयोग बनते-बनते बच्चे जवान हो जाते हैं और भर्ती निकलते-निकलते कई अभ्यर्थी उम्र की सीमा के करीब पहुंच जाते हैं।”

स्कूल में बच्चे हैं, शिक्षक कितने?

मंगरू की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि उसने शिक्षा व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने रख दी।

वह बोला—

“गुरुजी, गांव के स्कूल में कई कक्षाएं हैं, बच्चों की संख्या भी अच्छी-खासी है, लेकिन शिक्षक सीमित हैं। अब एक शिक्षक पढ़ाए या हाजिरी संभाले? दूसरा बच्चों को पढ़ाए या सरकारी रिपोर्ट और ऑनलाइन पोर्टल पूरा करे?”

यही सवाल आज कई सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में रहता है।

शिक्षकों पर पढ़ाने के अलावा विभिन्न प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ होने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। सवाल यह है कि यदि शिक्षक का ज्यादा समय रिपोर्टिंग, डाटा और दूसरे कामों में चला जाए तो कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय कैसे मिले?

मोबाइल बना नया गुरु!

इतने में चाय वाला बोल पड़ा—

“बाबूजी, अब बच्चों को मास्टर से ज्यादा मोबाइल पढ़ाता है।”

मंगरू जोर से हंसा और बोला—

“सही कह रहे हो चच्चा। बच्चा स्कूल में गुरुजी को कम और घर में इंटरनेट को ज्यादा गुरु मानता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इंटरनेट कभी छुट्टी नहीं लेता!”

मजाक के पीछे सवाल गंभीर था।

डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट बच्चों के लिए जानकारी का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। लेकिन तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकती। किताब, शिक्षक और तकनीक—तीनों का संतुलित इस्तेमाल ही शिक्षा को मजबूत बना सकता है।


| मंगरू का सवाल बड़ा है

“स्कूल है, बच्चे हैं, किताबें हैं…

फिर सवाल सिर्फ इतना क्यों है कि पढ़ाएगा कौन?”

मंगरू का कहना है कि शिक्षा सुधार की चर्चा केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित न रहकर स्कूल की वास्तविक जरूरतों तक पहुंचनी चाहिए।

नियम बदलते हैं, बयान बदलते हैं… बच्चे का क्या?

मंगरू ने अखबार का एक और पन्ना खोला। उसमें शिक्षा से जुड़े नियमों और पाठ्यक्रम को लेकर चल रही चर्चाओं का जिक्र था।

वह बोला—

“गुरुजी, पढ़ाई के नियम बदल रहे हैं, व्यवस्थाएं बदल रही हैं, बयान बदल रहे हैं… लेकिन बच्चों की चिंता कौन करेगा?”

मैंने कहा—

“देखो मंगरू, शिक्षा में सुधार जरूरी है। व्यवस्था में बदलाव भी समय की जरूरत है।”

वह बोला—

“सुधार से किसे एतराज है गुरुजी? लेकिन सुधार किताबों में ज्यादा दिखाई देता है, जमीन पर कम। पहले स्कूल में पर्याप्त शिक्षक तो पहुंचें, फिर उनसे पूरी उम्मीद भी रखिए।”

उसकी बात में व्यंग्य जरूर था, लेकिन सवाल गंभीर था।


| समस्या की तस्वीर

शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख सवाल

रिक्त शिक्षक पदों को भरने की प्रक्रिया कितनी तेज हो?

भर्ती प्रक्रिया में लगने वाले समय को कैसे कम किया जाए?

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से कितना मुक्त किया जाए?

ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक और छात्र का अनुपात कैसे सुधरे?

डिजिटल शिक्षा के साथ शिक्षक की भूमिका कैसे मजबूत हो?

बच्चों की पढ़ाई को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से ऊपर कैसे रखा जाए?

आयोग, कोर्ट और कैलेंडर के बीच अभ्यर्थी

मंगरू बोला—

“गुरुजी, पढ़े-लिखे नौजवान नौकरी के लिए तैयारी करते हैं। फिर भर्ती का इंतजार करते हैं। उसके बाद परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज और कभी-कभी कानूनी प्रक्रिया… इसी बीच कैलेंडर बदलता रहता है।”

उसने मुस्कुराते हुए कहा—

“कई बार लगता है कि अभ्यर्थी नौकरी की तैयारी कम और इंतजार करने की तैयारी ज्यादा कर रहा है।”

व्यंग्य के इस अंदाज में भर्ती प्रक्रिया की देरी और अभ्यर्थियों की बेचैनी पर सवाल उठता है। हालांकि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में नियम, पात्रता, परीक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है।

असली सवाल कक्षा में बैठा बच्चा पूछता है

आज शिक्षा पर बहस खूब होती है। मंचों पर शिक्षा की योजनाओं की चर्चा होती है, सरकारी स्तर पर नई पहल और डिजिटल व्यवस्थाएं सामने आती हैं और अधिकारी अपने स्तर पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

लेकिन असली सवाल तब सामने आता है, जब एक बच्चा स्कूल की कक्षा में बैठकर पूछता है—

“गुरुजी, आज कौन पढ़ाएगा?”

इस सवाल का जवाब किसी भाषण से नहीं, बल्कि स्कूल में मौजूद शिक्षक से मिलेगा।

मंगरू का आखिरी तीर

मंगरू जाने लगा तो मैंने पूछा—

“तो समाधान क्या है?”

वह पलटा और बोला—

“बहुत आसान है गुरुजी। पहले स्कूल में पर्याप्त शिक्षक भेजो, फिर शिक्षक को पढ़ाने दो। हर महीने नया आदेश, नया ऐप, नई रिपोर्ट और नया पोर्टल भेजने से पहले यह देखो कि बच्चे की कक्षा में गुरुजी मौजूद हैं या नहीं।”

मैं चुप रहा।

मंगरू ने जाते-जाते आखिरी तीर छोड़ा—

“सरकार कहती है—’सब पढ़ें, सब बढ़ें’… गांव वाले बस इतना पूछ रहे हैं—पहले यह तो बताइए, पढ़ाएगा कौन?”

मंगरू चला गया, लेकिन उसका सवाल वहीं रह गया।

स्कूल हैं, बच्चे हैं, किताबें हैं, योजनाएं हैं—अब जरूरत है कि कक्षा में पर्याप्त शिक्षक भी हों और उन्हें बच्चों को पढ़ाने का पूरा अवसर मिले।

गुरु जी की कलम से

यह व्यंग्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवालों को सामने रखने का एक रचनात्मक प्रयास है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर विचार करने के लिए सवाल उठाना है।

संक्षिप्त सारांश

शिक्षक पदों की रिक्तियों, भर्ती की प्रतीक्षा और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर ‘गुरु जी की कलम से’ व्यंग्य के जरिए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मंगरू के संवाद के माध्यम से पूछा गया है कि जब स्कूल और बच्चे मौजूद हैं, तो कक्षा में पर्याप्त शिक्षक कब होंगे?

 

पोखरे और नुकीले बांसों के बीच फंसे बेजुबान के लिए देवदूत बनी पुलिस और ग्रामीण

जान जोखिम में डालकर बैल को सुरक्षित निकाला, मौके पर बुलाया गया पशु चिकित्सक

सिद्धार्थनगर। विशेष संवाददाता।थाना शिवनगर डिडई क्षेत्र के ग्राम तिलौला में पुलिस और ग्रामीणों की मानवीय पहल सामने आई है। यहां एक गहरे पोखरे में नुकीले बांसों और दलदल के बीच फंसे बैल को पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने संयुक्त प्रयास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू के बाद मौके पर पशु चिकित्सक को बुलाकर बैल का उपचार कराया गया।

रातभर पोखरे में फंसा रहा बैल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तिलौला स्थित एक पुराने पोखरे में रात के समय एक बैल गिर गया। पोखरे में दलदल और कटे हुए नुकीले बांस होने के कारण बैल उसमें बुरी तरह फंस गया। बताया गया कि पशु ने रातभर बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सका।

सुबह ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल थाना शिवनगर डिडई पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

सूचना मिलते ही थाना शिवनगर डिडई में तैनात मुख्य आरक्षी अजीत कुमार यादव, कांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमी और कांस्टेबल बृजेश यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को भी रेस्क्यू अभियान में शामिल किया।

इसी दौरान ग्राम तिलौला निवासी दर्पण गौंड़ ने साहस का परिचय देते हुए दलदल और पोखरे में उतरकर बैल को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ कुणाल मिश्रा, दिलीप मिश्रा, संदीप मिश्रा, मायाराम मिश्रा, उमेश चंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा और पिंकू शर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने भी सहयोग किया।

पुलिस और ग्रामीणों के घंटों चले प्रयास के बाद बैल को बांस और कीचड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

मौके पर बुलाया गया पशु चिकित्सक

रातभर पानी और ठंड में फंसे रहने के कारण बैल की हालत खराब बताई गई। इसके बाद कांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमी की ओर से स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क किया गया। चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर पशु की जांच की और आवश्यक उपचार एवं दवा दी।

इसके बाद ग्रामीणों से बातचीत कर बैल के स्वस्थ होने तक उसके खान-पान और देखभाल की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात सामने आई।


रेस्क्यू में इन लोगों ने निभाई भूमिका

पुलिस टीम:मुख्य आरक्षी अजीत कुमार यादवकांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमीकांस्टेबल बृजेश यादव

 

ग्रामीण सहयोगी:दर्पण गौंड़, कुणाल मिश्रा, दिलीप मिश्रा, संदीप मिश्रा, मायाराम मिश्रा, उमेश चंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा और पिंकू शर्मा सहित अन्य ग्रामीण।

 

इंसानियत की मिसाल बना रेस्क्यू

 

बेजुबान पशु को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के एक साथ आने की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। घटना ने यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता से किसी बेजुबान की भी मदद की जा सकती है।

 

नोट: खबर में किसी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। घटनाक्रम उपलब्ध जानकारी और बताए गए रेस्क्यू प्रयासों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।

स्कूली बच्चों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक दिखा देशभक्ति का जोश, ‘हर घर तिरंगा’ का दिया संदेश

स्कूली बच्चों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक दिखा देशभक्ति का जोश, ‘हर घर तिरंगा’ का दिया संदे

सिद्धार्थनगर/कपिलवस्तु। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश लेकर विधानसभा कपिलवस्तु क्षेत्र के मोहाना चौक से भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे स्कूली बच्चों, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने यात्रा में सहभागिता की। तिरंगों से सजे माहौल में देशभक्ति के नारों के बीच यात्रा ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।


मोहाना चौक से निकली तिरंगा यात्रा में स्कूली बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। बच्चों के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रप्रेम, एकता और देश के प्रति सम्मान का संदेश दिया। आयोजकों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य लोगों को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति जागरूक करना और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए प्रेरित करना रहा।


प्रमुख सहभागिता

तिरंगा यात्रा में ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद

मंडल प्रभारी रमेश मणि, सदर विधायक श्याम धनी रही के प्रतिनिधि सत्य प्रकाश रही जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा खालिक रहमान, मंडल अध्यक्ष नौगढ़ देहात सोनू गुप्ता सहित नरेंद्र पटेल, अब्दुल गनी, अरशद खान, वीरेंद्र कुमार, अनिल चौधरी, गगन श्रीवास्तव, अजय गुप्ता एवं होली प्रधान समेत अनेक भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी यात्रा में शामिल रहे। इनके साथ स्कूली बच्चों ने भी तिरंगा यात्रा में सहभागिता की।

तिरंगे के साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए बच्चे

मोहाना चौक से शुरू हुई यात्रा के दौरान स्कूली बच्चों के हाथों में लहराता तिरंगा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों की मौजूदगी ने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का माहौल बनाया। वहीं भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी भी राष्ट्रीय ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुए।

यात्रा के दौरान देशभक्ति की भावना से जुड़े नारों के साथ लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया गया। ‘हर घर तिरंगा’ के संदेश के साथ निकली यात्रा ने राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना को सामने रखा।

राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश

आयोजकों का कहना रहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

तिरंगा यात्रा में स्कूली बच्चों और कार्यकर्ताओं की सहभागिता ने यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रप्रेम किसी एक वर्ग या आयु तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

संपादकीय टिप्पणी

तिरंगा हाथ में हो तो जिम्मेदारी भी साथ होनी चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज देश के गौरव और एकता का प्रतीक है। मोहाना चौक से निकली इस यात्रा में बच्चों की सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। ऐसे कार्यक्रम तभी सार्थक माने जाएंगे, जब तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी लोगों के व्यवहार में दिखाई दे।

जय हिंद! 🇮🇳

वंदे मातरम्! 🇮🇳

 

इन्द्री ग्रांट पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत, जांच के आदेश के बाद भी रिपोर्ट का इंतजार

IMG 20260811 WA0041 IMG 20260811 WA0040 IMG 20260811 WA0039

14 बिंदुओं पर शिकायत के बाद डीएम ने जांच के दिए निर्देश, जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के अनुस्मारक के बावजूद जांच आख्या लंबित

IMG 20260811 WA0041

सिद्धार्थनगर/इटवा।

विकास खंड इटवा की ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट में वर्ष 2021 से 2026 के बीच हुए विकास कार्यों और सरकारी धन के खर्च को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। ग्राम पंचायत निवासी भोला मौर्य पुत्र घनश्याम मौर्य ने करीब करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 14 बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत के साथ साक्ष्य और नोटरी शपथ-पत्र भी उपलब्ध कराया गया है।

IMG 20260811 WA0040

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार शिकायत पर प्रशासनिक स्तर से जांच की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

डीएम ने जांच के लिए अधिकारी किया नामित

उपलब्ध सरकारी दस्तावेज के अनुसार जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के कार्यालय से 22 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप संख्या 1272/7-पं0/शिका0/2026-27 के माध्यम से शिकायत में उल्लिखित तथ्यों की जांच के लिए जिला कृषि अधिकारी, सिद्धार्थनगर को जांच अधिकारी नामित किया गया।

पत्र में तकनीकी सहयोग के लिए अवर अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, इटवा को भी नामित करते हुए मामले की जांच कर स्पष्ट जांच आख्या शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

यानी शिकायत पर प्रशासन ने जांच के निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन अब मामला जांच रिपोर्ट के इंतजार में है।

अनुस्मारक के बाद भी नहीं आई जांच आख्या

मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र भी सामने आया है। 7 अगस्त 2026 के पत्र में पूर्व में जिलाधिकारी कार्यालय से जारी निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया है कि ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट की जांच कर स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच आख्या अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस संबंध में 6 अगस्त 2026 को अनुस्मारक जारी कर जिला कृषि अधिकारी से जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

ऐसे में अब सवाल यह है कि जांच के लिए आदेश जारी होने और अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट आखिर किस स्तर पर लंबित है?

शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता भोला मौर्य का आरोप है कि ग्राम पंचायत में वर्ष 2021 से 2026 के बीच सरकारी धन से कराए गए विभिन्न कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने संबंधित ग्राम प्रधान, सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी जांच रिपोर्ट से साबित होना बाकी है। उपलब्ध दस्तावेजों में प्रशासन ने भी फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है, बल्कि शिकायत में लगाए गए तथ्यों की जांच के निर्देश दिए हैं।

शिकायतकर्ता ने सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता

भोला मौर्य का कहना है कि वह वर्तमान में मुंबई में रहते हैं और उन्हें जांच के लिए गांव आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ता ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताते हुए कहा है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें खतरा महसूस होता है।

उनका आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति को आधार बनाकर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि FT News Digital द्वारा नहीं की गई है।

शिकायतकर्ता की मांग है कि उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध सरकारी अभिलेखों, भुगतान विवरण और विकास कार्यों की मौके पर जांच कर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जाए।

दोष साबित हुआ तो कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो नियमानुसार सरकारी धन की रिकवरी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर समेत वैधानिक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जांच रिपोर्ट है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है।

अब प्रशासन से बड़ा सवाल

जब जिलाधिकारी कार्यालय से जांच के निर्देश जारी हो चुके हैं और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय को जांच आख्या के लिए अनुस्मारक भी जारी करना पड़ा है, तो इन्द्री ग्रांट पंचायत की जांच रिपोर्ट कब तक सामने आएगी?

जनता की निगाह अब जांच की निष्पक्षता और उसके नतीजे पर है। आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति भी साफ होनी चाहिए।


स्थान: ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट, विकास खंड इटवा, सिद्धार्थनगर

👤 शिकायतकर्ता: भोला मौर्य पुत्र घनश्याम मौर्य

📋 शिकायत: 14 बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

📅 शिकायत: 13 जून 2026

🏛️ डीएम आदेश: 22 जुलाई 2026

🔎 जांच अधिकारी: जिला कृषि अधिकारी, सिद्धार्थनगर

🛠️ तकनीकी सहयोग: अवर अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, इटवा

📨 अनुस्मारक: 6 अगस्त 2026

📄 स्थिति: उपलब्ध पत्रों के अनुसार जांच आख्या अभी प्राप्त नहीं

सारांश

इटवा की ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर 14 बिंदुओं पर शिकायत की गई। शिकायत के बाद जिलाधिकारी कार्यालय ने जिला कृषि अधिकारी को जांच अधिकारी नामित करते हुए तकनीकी सहयोग के लिए अवर अभियंता को निर्देशित किया। बाद में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय ने जांच आख्या उपलब्ध कराने के लिए अनुस्मारक जारी किया। इसके बावजूद उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।

कानूनी रूप से सुरक्षित संपादकीय टिप्पणी

“यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायत एवं सरकारी पत्राचार पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों को सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच रिपोर्ट के बाद ही संभव होगा। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी खबर में उचित स्थान दिया जाएगा।”

रिपोर्ट: FT News Digital | सिद्धार्थनगर

तमिलनाडु में सड़क हादसे में महराजगंज के 32 वर्षीय युवक की मौत, गांव में पसरा मातम

परिवार की खुशहाली के लिए घर से दूर कर रहे थे मेहनत-मजदूरी, हादसे की खबर पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम

महराजगंज

परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर तमिलनाडु में मेहनत-मजदूरी कर रहे महराजगंज के एक 32 वर्षीय युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई। घटना की सूचना जब उनके पैतृक गांव पहुंची तो परिवार सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मिली जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम सभा बड़हरा, टोला सेमरहना निवासी अभिमन्यु मौर्य (32) तमिलनाडु में रहकर काम करते थे। वह परिवार के भरण-पोषण और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए घर से दूर रहकर मेहनत कर रहे थे। इसी दौरान सड़क हादसे में उनकी जान चली गई।

हादसे की खबर से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

अभिमन्यु की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी ज्ञांति मौर्या का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं उनके दो छोटे बच्चे अभय मौर्य और रुद्राश मौर्य भी पिता की मौत से गहरे सदमे में हैं।

परिवार के लिए अभिमन्यु की असमय मौत बड़ा झटका बनकर सामने आई है। जिस व्यक्ति के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारियां थीं, उसके अचानक चले जाने से परिजनों के सामने भविष्य की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

गांव में भी शोक की लहर

घटना की जानकारी गांव में पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। ग्रामीणों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने की बात कही।

अभिमन्यु की असमय मौत से गांव में मातम का माहौल है। परिवार और ग्रामीण अब उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

रिपोर्ट: आशुतोष कुमार मौर्य

FT News | महराजगंज



 

नीचे आपकी FT News Digital / न्यूज़ पोर्टल के अखबारनुमा अंदाज में तैयार कॉपी है:

 

WhatsApp Image 2026 08 10 at 17.45.14

महरथा गांव में गरिमामय माहौल में आयोजित हुआ कार्यक्रम, वक्ताओं ने संघर्ष और सामाजिक न्याय के लिए उनके योगदान को किया याद

सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़।

शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के निषाद बाहुल्य गांव महरथा स्थित बंधे पर सोमवार को पूर्व सांसद फूलन देवी की जयंती कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों को फूलन देवी के चित्र भी वितरित किए गए। वक्ताओं ने उनके जीवन से जुड़े संघर्षों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा करते हुए उनके विचारों को याद किया।

संघर्ष और सामाजिक न्याय को लेकर हुई चर्चा

कार्यक्रम के संयोजक एवं समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ‘मशाल’ ने कहा कि फूलन देवी का जीवन महिलाओं और वंचित वर्गों के संघर्ष से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कहानी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं से समाज को अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की ओर से प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर फूलन देवी की जयंती मनाई जा रही है। कार्यक्रम में उनके राजनीतिक जीवन और लोकसभा सांसद के रूप में निभाई गई भूमिका का भी उल्लेख किया गया।

ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम के आयोजन में शिव रतन निषाद और संतोष निषाद की भूमिका रही। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव कमरुज्जमा, जोन प्रभारी राकेश दूबे, छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव अजय चौरसिया, प्रदेश सचिव मंजूर खान सहित महिबुल्ला, राजू निषाद, मदन निषाद, राम रतन निषाद, राजेश निषाद, श्यामू निषाद, महेश निषाद, राजेन्द्र निषाद और रामविलास निषाद समेत अन्य कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान फूलन देवी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके जीवन और संघर्ष को याद किया गया। आयोजन शांतिपूर्ण एवं गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।

नोट: यह समाचार उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। इसमें किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आपत्तिजनक या अप्रमाणित आरोप नहीं लगाया गया है।

 

सिद्धार्थनगर में ‘युवा संवाद’ से गूंजा राष्ट्र निर्माण का संदेश

IMG 20260810 WA0950 IMG 20260810 WA0956

संघ के शताब्दी वर्ष पर जुटे युवा, अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्तरंजन ने कहा—युवा शक्ति देश के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी

सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सिद्धार्थनगर में ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, स्वयंसेवकों और मातृशक्ति ने सहभागिता की। संवाद के दौरान राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर युवाओं से संवाद किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्तरंजन उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति भारत के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं को राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।


| युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर

युवा संवाद में युवाओं से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और देश के इतिहास को समझने का आह्वान किया गया। वक्ता ने युवाओं के जीवन में अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए इन्हें व्यवहार में उतारने की बात कही।

संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और संपर्क को व्यापक बनाने पर भी जोर दिया गया।


| सवाल-जवाब में सामने आई युवाओं की जिज्ञासा

कार्यक्रम केवल संबोधन तक सीमित नहीं रहा। ‘युवा संवाद’ के दौरान उपस्थित युवाओं ने राष्ट्र और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे और सवाल किए। मुख्य वक्ता की ओर से युवाओं के प्रश्नों पर संवाद करते हुए उन्हें समाजहित में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित किया गया।

बड़ी संख्या में युवाओं की रही सहभागिता

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभागार में युवाओं की मौजूदगी से कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रत्नाकर पाण्डेय ने की। संचालन जिला सह कार्यवाह मनोज ने किया, जबकि मंच पर विभाग संघचालक रामचंद्र चौधरी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के संयोजक जिला विद्यार्थी कार्य प्रमुख सौरभ त्रिपाठी रहे। कार्यक्रम की प्रस्तावना अभय सिंह ने रखी।


| शताब्दी वर्ष में संवाद पर फोकस

कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने और उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, युवा संवाद का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी भूमिका को समझने तथा सकारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।

मंच से दिया सेवा और अनुशासन का संदेश

मुख्य वक्ता ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति समझ विकसित करने के साथ सामाजिक जीवन में सेवा और अनुशासन को महत्व देने का आह्वान किया।

उन्होंने युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित होने और वर्तमान समय में समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही।

कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और अन्य प्रतिभागियों ने भी संवाद में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

कार्यक्रम में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक प्रमुख डॉ. अवधेश, विभाग प्रचारक राजीव नयन, सह विभाग प्रचारक अजीत, जिला प्रचारक राघवेंद्र, नगर प्रचारक सौरभ, जिला कार्यवाह शिवेंद्र, सह विभाग कार्यवाह हरिश्चन्द्र, सह जिला कार्यवाह अविनाश, मातृशक्ति प्रमुख सीमा मिश्रा, राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति की विभाग कार्यवाहिका उमा सिंह सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इसके अलावा विकास पाण्डेय, नगर कार्यवाह अभय त्रिपाठी, धनञ्जय रस्तोगी, अभिषेक त्रिपाठी, डॉ. मयंक कुशवाहा, आनंद शिवा पाण्डेय, पंकज सिंह, विपुल सिंह, मनीष राय, प्रदीप दुबे, वाचस्पति मिश्र, शशिकांत द्विवेदी, प्रवीण मिश्रा, राम प्रकाश त्रिपाठी, विवेक श्रीवास्तव, सुरेश रैना, अभिषेक पाण्डेय, रणजीत चौधरी, अमित श्रीवास्तव, सत्यम द्विवेदी, सुरेश गुप्ता, धीरेन्द्र, सत्यम शुक्ला, विश्वजीत पाण्डेय, महेश्वर पाण्डेय और सूरज जायसवाल समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

सारांश

सिद्धार्थनगर में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। मुख्य वक्ता स्वान्तरंजन ने युवाओं को देश के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, स्वयंसेवक और मातृशक्ति शामिल हुए।

छोटी दमदार हेडिंग

युवा संवाद में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संदेश

English Heading

#Siddharthnagar #YuvaSamvad #RSS #YouthDialogue #SiddharthnagarNews #UPNews

फोटो कैप्शन

सिद्धार्थनगर में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद वक्ता एवं सभागार में उपस्थित प्रतिभागी।

 

सिद्धार्थनगर की ‘रामकटोरी’ को मिलेगी नई उड़ान, जिले की मिठास को ब्रांड बनाने में जुटे स्थानीय कारोबारी

IMG 20260809 WA0881
ODOC में चयन के बाद बढ़ा उत्साह, युवा कंटेंट क्रिएटर्स ने संभाली डिजिटल प्रचार की कमान
सिद्धार्थनगर। काला नमक चावल के बाद अब सिद्धार्थनगर की पारंपरिक मिठाई ‘रामकटोरी’ जिले की नई पहचान बनने की राह पर है। एक जिला, एक उत्पाद (ODOC) योजना में रामकटोरी को स्थान मिलने के बाद स्थानीय मिष्ठान कारोबारियों में उत्साह बढ़ा है। इसी कड़ी में स्थानीय व्यवसायी कृष्णा कुमार गुप्ता की ओर से रामकटोरी को जिले की सीमाओं से बाहर प्रदेश और देश तक पहुंचाने की मुहिम शुरू की गई है।
इस पहल को डिजिटल मंच से गति देने के लिए रविवार, 9 अगस्त को सिद्धार्थनगर में क्रिएटर मीटअप आयोजित किया गया, जिसमें जिले के साथ-साथ आसपास के जनपदों से आए युवा कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का फोकस साफ था—स्थानीय मिठाई को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उसकी कहानी, स्वाद और पहचान को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना।
लीड | परंपरा से ब्रांड तक का सफर
सिद्धार्थनगर की पहचान लंबे समय से काला नमक चावल से जुड़ी रही है। अब रामकटोरी को भी जिले की पहचान के रूप में स्थापित करने की कोशिश शुरू हुई है। ODOC में चयन के बाद स्थानीय कारोबारियों ने इसे अवसर के रूप में लिया है।
कृष्णा स्वीट्स से जुड़े कृष्णा कुमार गुप्ता के अनुसार, उनका प्रतिष्ठान लंबे समय से रामकटोरी तैयार कर रहा है और अब इसे बड़े स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इनसेट | 40 साल पुराना कारोबार, अब नई सोच
आयोजकों के मुताबिक कृष्णा कुमार गुप्ता करीब चार दशक से मिष्ठान कारोबार से जुड़े हैं। उनका कहना है कि रामकटोरी को सिर्फ एक मिठाई के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की स्थानीय पहचान के रूप में लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
इसी उद्देश्य से युवा डिजिटल क्रिएटर्स को कार्यक्रम में जोड़ा गया, ताकि स्थानीय उत्पाद की कहानी सोशल मीडिया के माध्यम से दूर-दराज के लोगों तक पहुंच सके।
क्रिएटर मीटअप में जुटे आसपास के जिलों के युवा
कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर के अलावा महाराजगंज, बलरामपुर, गोरखपुर और संत कबीर नगर समेत आसपास के जिलों से करीब दो दर्जन कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के शामिल होने की जानकारी दी गई।
क्रिएटर्स को रामकटोरी के इतिहास, इसकी विशेषताओं और तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद लाइव सेटअप के माध्यम से देशी घी से तैयार रामकटोरी का स्वाद भी चखाया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मिठाई खिलाना नहीं, बल्कि क्रिएटर्स को उत्पाद की पूरी कहानी से जोड़ना था, ताकि वे इसे अपनी डिजिटल सामग्री के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सकें।
इनबॉक्स | रामकटोरी के कितने फ्लेवर?
आयोजक कृष्णा कुमार की ओर से दावा किया गया कि उनके प्रतिष्ठान पर देशी घी से तैयार रामकटोरी करीब 10 अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध है।
उनका कहना है कि अलग-अलग स्वाद और उम्र के लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इसके विभिन्न फ्लेवर तैयार किए गए हैं।
महिला क्रिएटर्स की भी रही भागीदारी
कार्यक्रम में महिला कंटेंट क्रिएटर्स की भी अच्छी भागीदारी रही। क्रिएटर्स ने स्थानीय उत्पादों को डिजिटल माध्यम से बढ़ावा देने की पहल को जिले के युवाओं के लिए उपयोगी बताया।
उनका कहना था कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल बड़े उद्योगों से नहीं बनती, बल्कि स्थानीय उत्पाद, स्थानीय हुनर और उसकी कहानी भी उस क्षेत्र को अलग पहचान दिला सकती है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में गोरखपुर से इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर डॉ. सैफ असलम और भोजपुरी गायिका आस्था त्रिपाठी के शामिल होने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा समाजसेवी, व्यापारी और अन्य स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज के प्रबंधक राजेश चंद्र शर्मा, टीम यशोभूमि के प्रबंधक संतोष श्रीवास्तव, व्यवसायी राजन कसौधन, रवि अग्रहरि, शुभम पैराडाइस के शुभम श्रीवास्तव और उज्जवल श्रीवास्तव, जावेद अख्तर, जेन कंप्यूटर के वामिक सर तथा श्री कृष्णा आयुर्वेदिक चिकित्सालय के वैद्य डॉ. सौरभ गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर शामिल कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया गया।
स्थानीय मिठाई से जिले की पहचान तक की कोशिश
रामकटोरी को ODOC में स्थान मिलने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसे केवल सरकारी सूची तक सीमित न रहने देने की है। इसके लिए स्थानीय कारोबारियों के साथ-साथ डिजिटल क्रिएटर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि रामकटोरी की पारंपरिक पहचान, स्वाद, निर्माण प्रक्रिया और स्थानीय जुड़ाव को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया जाता है तो यह सिद्धार्थनगर के लिए एक नए स्थानीय ब्रांड की संभावनाएं पैदा कर सकती है।
आयोजकों की उम्मीद है कि जिस तरह काला नमक चावल ने सिद्धार्थनगर को अलग पहचान दिलाई, उसी तरह रामकटोरी भी जिले की ‘मिठास’ को प्रदेश और देश तक पहुंचाने में कामयाब होगी।
सारांश | खबर की 5 बड़ी बातें
• सिद्धार्थनगर की पारंपरिक मिठाई रामकटोरी का ODOC में चयन।
• स्थानीय कारोबारियों में बढ़ा उत्साह।
• डिजिटल प्रचार के लिए क्रिएटर मीटअप आयोजित।
• आसपास के जिलों से करीब दो दर्जन कंटेंट क्रिएटर्स की भागीदारी।
• रामकटोरी को सिद्धार्थनगर की नई पहचान और बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश।
फैक्ट बॉक्स | ODOC क्या है?
एक जिला, एक उत्पाद (One District One Product) पहल का उद्देश्य किसी क्षेत्र के विशिष्ट स्थानीय उत्पादों को पहचान, बाजार और व्यापक पहुंच दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सिद्धार्थनगर में काला नमक चावल के बाद रामकटोरी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर इसी तरह की पहचान बनाने की कोशिश सामने आई है।
फोटो कैप्शन
सिद्धार्थनगर में आयोजित क्रिएटर मीटअप में स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स एवं अतिथियों के साथ आयोजक।
छोटी दमदार हेडिंग
रामकटोरी बनेगी सिद्धार्थनगर की नई पहचान!

error: कोई भी कंटेंट कॉपी न करें, नहीं तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।