सिद्धार्थनगर को “बुद्ध रसोई” की सौगात दिलाने की पहल तेज, मरीजों-तीमारदारों के सस्ते भोजन के लिए रेलमंत्री तक पहुंची मांग
राज्यसभा सांसद बृज लाल ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात, माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में CSR सहयोग से “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने का अनुरोध; नो प्रॉफिट-नो लॉस मॉडल पर संचालन की परिकल्पना

सिद्धार्थनगर/नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026।
सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृज लाल ने 3 अगस्त को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से उनके संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर मेडिकल कॉलेज परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए रेलवे से जुड़े उपक्रम की CSR निधि से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
बृज लाल की ओर से रेलमंत्री को सौंपे गए पत्र में प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार करने, संचालन, रखरखाव और इसे दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाने की दिशा में CSR सहयोग का आग्रह किया गया है।
इस पूरी पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” को व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल पर संचालित करने की परिकल्पना की गई है।
यदि प्रस्ताव को आवश्यक स्वीकृति और वित्तीय सहयोग मिलता है तो मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके साथ रहने वाले तीमारदारों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण सुविधा बन सकती है।
इलाज की चिंता के बीच भोजन का खर्च भी मरीज के परिवार पर अतिरिक्त बोझ बनता है। इसी परेशानी को कम करने की सोच अब सिद्धार्थनगर से दिल्ली तक पहुंची है। राज्यसभा सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR सहयोग मांगा है। योजना है कि रसोई “नो प्रॉफिट, नो लॉस” पर चले और मरीजों तथा तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन मिल सके। अब इस जनहित प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई और संभावित CSR स्वीकृति पर निगाहें रहेंगी।
मरीजों की थाली तक पहुंचने की कोशिश
मेडिकल कॉलेज में आने वाला मरीज अक्सर अकेला नहीं होता। उसके साथ परिवार के एक या अधिक सदस्य भी कई दिनों तक अस्पताल में रहते हैं। इलाज और दवाओं के साथ भोजन की व्यवस्था भी उनके लिए बड़ी आवश्यकता बन जाती है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखकर “बुद्ध रसोई” का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना बताया गया है जहां मरीजों और तीमारदारों को कम कीमत में अच्छा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके। प्रस्ताव की मूल भावना जनसेवा को केंद्र में रखकर रसोई संचालित करने की है।
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा पत्र
3 अगस्त को हुई मुलाकात के दौरान सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को इस संबंध में बाकायदा पत्र सौंपा।
उपलब्ध पत्र के मुताबिक “बुद्ध रसोई” की स्थापना के लिए संबंधित रेलवे उपक्रम के समक्ष प्रस्ताव दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
रेलमंत्री से आग्रह किया गया है कि CSR निधि से बुद्ध रसोई केंद्र की स्थापना में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध पत्र और जानकारी इस समय CSR निधि की अंतिम स्वीकृति की घोषणा नहीं करते। फिलहाल रेलमंत्री से सहयोग और धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। अंतिम स्वीकृति संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।
क्यों रखा गया नाम “बुद्ध रसोई”?
सिद्धार्थनगर की पहचान भगवान बुद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से है। उपलब्ध पत्र में भी सिद्धार्थनगर और भगवान बुद्ध के संबंध का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित जनसेवा केंद्र को “बुद्ध रसोई” नाम देने की भावना सामने आती है।
इस तरह प्रस्तावित रसोई को केवल भोजन उपलब्ध कराने वाली सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की पहचान से जुड़े जनसेवा प्रयास के रूप में विकसित करने की परिकल्पना दिखाई देती है।
इनबॉक्स
नो प्रॉफिट, नो लॉस का मॉडल
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका प्रस्तावित संचालन मॉडल है।
बृज लाल द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक “बुद्ध रसोई” को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” के आधार पर संचालित करने की योजना है।
अर्थात इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को संचालित रखते हुए मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना होगा।
हालांकि भोजन की कीमत, संचालन व्यवस्था और अन्य व्यावहारिक विवरण परियोजना को स्वीकृति मिलने तथा संचालन की रूपरेखा तय होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अस्पताल में दवा के साथ सस्ती थाली भी बने सहारा
बीमारी किसी परिवार पर केवल शारीरिक संकट नहीं लाती, बल्कि आर्थिक दबाव भी बढ़ाती है। दूरदराज के गांव से मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले परिवार को जांच, दवा, यात्रा और ठहरने के साथ प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है।
ऐसे में यदि अस्पताल परिसर में व्यवस्थित तरीके से कम कीमत पर पौष्टिक भोजन मिलने लगे तो मरीज के साथ रहने वाले परिवार को राहत मिल सकती है।
यही वह सामाजिक आवश्यकता है जिसे “बुद्ध रसोई” के प्रस्ताव से संबोधित करने की कोशिश की जा रही है।
पहले किए गए विकास कार्यों का भी पत्र में जिक्र
रेलमंत्री को दिए गए पत्र में बृज लाल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की निधि के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में कराए गए कार्यों का उल्लेख भी किया है।
पत्र में पुस्तकालय और पुस्तकों की व्यवस्था, अमृत सरोवर, स्कूल संबंधी आधारभूत सुविधाएं, ग्रामीण सीसी रोड, छात्रावास, स्ट्रीट लाइट तथा अस्पतालों में उपकरण जैसी सुविधाओं के लिए निधि इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
अब इसी क्रम में सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में “बुद्ध रसोई” के लिए CSR सहयोग जुटाने की पहल की गई है।
टिप्पणी
प्रस्ताव अच्छा, अब धरातल पर उतरने का इंतजार
किसी भी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था केवल डॉक्टर, दवा और बेड तक सीमित नहीं होती। मरीज और उसके तीमारदार की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी अस्पताल से जुड़ी समग्र व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस नजरिए से “बुद्ध रसोई” की परिकल्पना जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।
लेकिन प्रस्ताव और क्रियान्वयन के बीच की दूरी को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अभी CSR सहयोग का अनुरोध किया गया है। इसलिए इसे स्वीकृत अथवा शुरू हो चुकी परियोजना बताना जल्दबाजी होगी।
यदि आवश्यक स्वीकृति और धन मिलने के बाद इसे पारदर्शी व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और वास्तविक “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल के साथ धरातल पर उतारा जाता है तो यह मेडिकल कॉलेज आने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
सारांश
राज्यसभा सांसद बृज लाल ने 3 अगस्त 2026 को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR निधि से सहयोग का अनुरोध किया है।
प्रस्तावित रसोई को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” आधार पर चलाने की योजना है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
फिलहाल यह प्रस्ताव और CSR सहयोग के अनुरोध के चरण में है। धनराशि की अंतिम स्वीकृति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। अब प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई पर निगाह रहेगी।
Views: 145

