थाईलैंड में सिद्धार्थनगर के खिलाड़ियों का परचम, एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीत बढ़ाया भारत का मान

बुद्ध की धरती के तीन होनहारों ने अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में दिखाया दम; समर वर्मा बने स्वर्ण विजेता, सात वर्षीय देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान ने जीते रजत पदक

सिद्धार्थनगर। जिस सिद्धार्थनगर की पहचान पूरी दुनिया में भगवान बुद्ध की धरती के रूप में होती है, उसी धरती के खिलाड़ियों ने अब विदेशी खेल मैदान पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। थाईलैंड के पटाया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल कर जिले के साथ उत्तर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है।

हाथों में तिरंगा, गले में पदक और चेहरे पर जीत की मुस्कान लिए इन खिलाड़ियों की तस्वीरें सिद्धार्थनगर के लिए गौरव का क्षण बन गई हैं। खास बात यह है कि पदक जीतने वालों में महज सात वर्षीय देवम पासवान भी शामिल हैं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में विदेशी धरती पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रजत पदक हासिल किया।
एक नजर में उपलब्धि
प्रतियोगिता: 9वीं हीरोज ताइक्वांडो अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026
स्थान: पटाया, थाईलैंड
आयोजन: 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026
समर वर्मा: 🥇 स्वर्ण पदक
देवम पासवान (7 वर्ष): 🥈 रजत पदक
दिलीप कुमार पासवान: 🥈 रजत पदक
🥇 समर वर्मा का स्वर्णिम प्रदर्शन, तिरंगे के साथ मनाया जीत का जश्न
प्रतियोगिता में समर वर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली यह कामयाबी न सिर्फ उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि सिद्धार्थनगर के लिए भी गर्व का विषय है।

गले में स्वर्ण पदक और पीछे फैला भारतीय तिरंगा—समर की यह तस्वीर उस मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी कह रही है, जिसने सिद्धार्थनगर के खिलाड़ी को थाईलैंड में विजेता बनाया।
सात साल के देवम का बड़ा कमाल
इस सफलता की सबसे प्रेरक कहानियों में सात वर्षीय देवम पासवान का नाम भी शामिल है।
जिस उम्र में अधिकांश बच्चे खेल-कूद की शुरुआती बारीकियां सीखते हैं, उस उम्र में देवम अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार देवम ने मेजबान थाईलैंड के खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी और रजत पदक अपने नाम किया।
छोटी सी उम्र… अंतरराष्ट्रीय मंच… सामने विदेशी प्रतिद्वंद्वी और कंधों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी—इन सबके बीच देवम का पदक तक पहुंचना उनकी प्रतिभा और हौसले को दर्शाता है।
नन्हे चैंपियन की बड़ी उड़ान
सिर्फ सात साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व और रजत पदक—देवम पासवान की उपलब्धि जिले के दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

दिलीप कुमार पासवान ने भी प्रतियोगिता में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिलीप कुमार पासवान ने पाकिस्तान के खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबले में नॉकआउट जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद फाइनल मुकाबले में उनका सामना श्रीलंका के खिलाड़ी से हुआ।
कड़े संघर्ष के बाद दिलीप कुमार पासवान ने रजत पदक हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका यह प्रदर्शन सिद्धार्थनगर के खेल इतिहास में यादगार उपलब्धियों में शामिल होने वाला है।

37 देशों के खिलाड़ियों के बीच दिखाया दम
उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के पटाया में आयोजित प्रतियोगिता में 37 देशों के खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया।
ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों का पदक जीतना इस उपलब्धि को और खास बना देता है।
तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर भारत के खाते में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जोड़े और विदेशी धरती पर सिद्धार्थनगर की खेल प्रतिभा की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
सिद्धार्थनगर का गौरव
एक स्वर्ण + दो रजत पदक
छोटे जिले के खिलाड़ियों की बड़ी अंतरराष्ट्रीय उड़ान।
थाईलैंड में तिरंगे के साथ चमका सिद्धार्थनगर का नाम।
तस्वीरें खुद बयां कर रहीं सफलता की कहानी
प्रतियोगिता से सामने आई तस्वीरों में भारतीय खिलाड़ी तिरंगे के साथ अपनी जीत का जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं खिलाड़ी पदक और प्रमाणपत्र के साथ खड़े हैं तो कहीं पूरी भारतीय टीम तिरंगा लेकर इस उपलब्धि को साझा कर रही है।
इन तस्वीरों में सिर्फ पदक नहीं हैं—इनमें वर्षों की तैयारी, अभ्यास, अनुशासन और देश के लिए खेलने का गर्व भी दिखाई देता है।

छोटे शहरों की प्रतिभा को मिले मंच तो दुनिया जीतने का है दम
सिद्धार्थनगर के इन खिलाड़ियों की उपलब्धि एक बड़ा संदेश भी देती है। प्रतिभा केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे जिलों और कस्बों में भी ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं जिन्हें बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
आज समर वर्मा, देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान की सफलता सिद्धार्थनगर के उन तमाम बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो खेल के मैदान से अपने भविष्य की नई कहानी लिखना चाहते हैं।
सारांश
थाईलैंड की धरती पर मिली यह सफलता केवल तीन पदकों की कहानी नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे सपनों की कहानी है।
समर का स्वर्ण, देवम और दिलीप के रजत पदक तथा खिलाड़ियों के हाथों में लहराता तिरंगा—यह दृश्य सिद्धार्थनगर के लिए लंबे समय तक गर्व का क्षण बना रहेगा।
बुद्ध की धरती के इन होनहारों ने संदेश दे दिया है—हौसला बड़ा हो, मेहनत लगातार हो और लक्ष्य देश का मान बढ़ाना हो, तो सिद्धार्थनगर से निकली प्रतिभा भी दुनिया के मंच पर अपनी चमक बिखेर सकती है।
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