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दूधवानिया खुर्द में जाम नालियां, गलियों में गंदगी; ग्रामीणों ने उठाए सफाई व्यवस्था पर सवाल

बारिश ने बढ़ाई परेशानी, नालियों में जमा गंदा पानी और कूड़ा; ग्रामीणों का दावा—कई महीनों से नियमित सफाई नहीं, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग

बढ़नी/सिद्धार्थनगर। स्वच्छता और गांवों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं के सरकारी प्रयासों के बीच विकास खंड बढ़नी की ग्राम पंचायत दूधवानिया खुर्द से सामने आई तस्वीरों ने स्थानीय सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के कुछ हिस्सों में नालियों में गंदा पानी ठहरा दिखाई दे रहा है। कहीं प्लास्टिक और कूड़ा जमा है तो कहीं नालियों के किनारे उगी घास जल निकासी की समस्या को और गंभीर बनाती नजर आ रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बरसात में परेशानी बढ़ गई है। जल निकासी बाधित होने से कई स्थानों पर गंदा पानी जमा रहता है और दुर्गंध तथा मच्छरों से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


तस्वीरों में दिखी जमीनी स्थिति

स्थानीय स्तर से उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में गांव के अलग-अलग स्थानों पर नालियों में गंदा पानी, प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा दिखाई दे रहा है। कुछ जगह नालियां घास और झाड़ियों से घिरी हुई हैं।

हालांकि इन तस्वीरों के आधार पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि गांव की पूरी सफाई व्यवस्था कितने समय से ऐसी है या इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है। इन पहलुओं की पुष्टि संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत के अभिलेखों तथा स्थलीय जांच से होनी चाहिए।


ग्रामीण बोले—कई महीनों से बनी है समस्या

ग्रामीणों का दावा है कि नालियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि नियमित सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है।

ग्रामीण बबलू गुप्ता, अनिल सैनी, पूजी यादव, जटा शंकर वर्मा, विनय सैनी, सुकदेव गौतम और लालू साहनी ने प्रशासन से समस्या का संज्ञान लेकर सफाई कराने की मांग की है।


गंदा पानी और मच्छर बने चिंता का कारण

स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों में गंदा पानी जमा रहने से दुर्गंध और मच्छरों की समस्या बढ़ रही है। ग्रामीणों ने इससे बीमारी फैलने की आशंका भी जताई है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि डेंगू, मलेरिया या किसी अन्य बीमारी के वास्तविक प्रसार की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से ही हो सकती है। ग्रामीणों द्वारा फिलहाल बीमारी फैलने की आशंका व्यक्त की गई है।


सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं, जवाबदेही का भी

दूधवानिया खुर्द की तस्वीरों से सामने आ रही समस्या केवल गंदगी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि गांव में नालियों की नियमित सफाई का निर्धारित रोस्टर क्या है? सफाई कर्मचारी कितनी नियमितता से गांव पहुंच रहे हैं? अंतिम बार नालियों की व्यापक सफाई कब कराई गई? और जल निकासी की स्थायी समस्या दूर करने के लिए ग्राम पंचायत के स्तर पर क्या कदम उठाए गए?

इन सवालों का जवाब ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


सरकारी धन पर आरोप, जांच के बिना निष्कर्ष नहीं

कुछ ग्रामीणों ने गांव के विकास और सफाई के लिए मिलने वाले सरकारी धन के समुचित उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

हालांकि सिर्फ नालियों की मौजूदा स्थिति के आधार पर सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए स्वीकृत बजट, भुगतान, कार्यों के अभिलेख और स्थलीय सत्यापन की आवश्यकता होगी।

यदि ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर प्रशासन जांच कराता है तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।


विशेष सफाई अभियान चलाने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में विशेष सफाई अभियान चलाने, जाम नालियों की सफाई कराने और जहां आवश्यक हो वहां क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।

साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

सारांश

स्थान: ग्राम पंचायत दूधवानिया खुर्द, विकास खंड बढ़नी

समस्या: नालियों में गंदा पानी एवं कूड़ा जमा होने की शिकायत

ग्रामीणों का दावा: लंबे समय से नियमित सफाई नहीं

तस्वीरों में: नालियों में पानी, कचरा और कई स्थानों पर घास-झाड़ियां

ग्रामीणों की चिंता: दुर्गंध, मच्छर और संक्रमण का संभावित खतरा

मांग: विशेष सफाई अभियान एवं जल निकासी की व्यवस्था

अन्य आरोप: विकास/सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

स्थिति: संबंधित ग्राम पंचायत/अधिकारियों का पक्ष लिया जाना शेष


तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं, जवाब जिम्मेदारों को देना होगा

स्वच्छता किसी गांव की केवल सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और नागरिक सुविधा से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है। दूधवानिया खुर्द से सामने आई तस्वीरों में यदि नालियों में जमा पानी और कचरे की स्थिति नियमित रूप से बनी हुई है, तो संबंधित जिम्मेदारों को इसका समाधान प्राथमिकता से करना चाहिए।

साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। बिना अभिलेखीय जांच किसी पर सरकारी धन के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार का आरोप स्थापित नहीं किया जा सकता। प्रशासन को ग्रामीणों की शिकायत का सत्यापन कराकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए और यदि कहीं वास्तविक लापरवाही मिले तो नियमानुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

नोट: खबर स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध तस्वीरों पर आधारित है। संबंधित ग्राम पंचायत/अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

 

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