आकस्मिक निरीक्षण में गैरपंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटर सील, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप
बढ़या PHC के सामने संचालित सेंटर पर पहुंची टीम, अंदर मिली अल्ट्रासाउंड मशीनें; विभागीय जांच आगे बढ़ने के संकेत
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिले में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया। विभागीय जानकारी के अनुसार, संबंधित सेंटर बढ़या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने संचालित दीक्षा पैथोलॉजी पॉली क्लीनिक में चल रहा था।
कार्रवाई नोडल अधिकारी मानमेद्र पाल के नेतृत्व में की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो सेंटर बंद मिला। विभागीय टीम के अनुसार, सामने के शटर पर ताला लगा था और पीछे के रास्ते से संचालक के निकल जाने की जानकारी सामने आई। निरीक्षण के दौरान परिसर के अंदर अल्ट्रासाउंड मशीनें मौजूद मिलीं।
टीम ने मौके की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सीएचसी अधीक्षक सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।
जांच के घेरे में पंजीकरण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आकस्मिक निरीक्षण में संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण से जुड़ी स्थिति सामने आई, जिसके बाद विभाग ने सीलिंग की कार्रवाई की। हालांकि, मामले में किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम जिम्मेदारी अथवा दोष का निर्धारण सक्षम विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई के बाद ही किया जाना उचित होगा।
सवाल सिर्फ एक सेंटर का नहीं
स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाती है—क्या जिले में संचालित सभी अल्ट्रासाउंड केंद्र निर्धारित नियमों और पंजीकरण व्यवस्था के अनुरूप चल रहे हैं?
एक सेंटर पर कार्रवाई के बाद अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग जिले के अन्य अल्ट्रासाउंड केंद्रों की भी पंजीकरण स्थिति, संचालन व्यवस्था और आवश्यक दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन करे, ताकि नियमों से बाहर किसी भी गतिविधि की संभावना को समय रहते रोका जा सके।
जन-जागरूकता | मरीज भी रहें सतर्क
अल्ट्रासाउंड जैसी चिकित्सकीय जांच के लिए मरीजों और उनके परिजनों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। किसी भी जांच केंद्र पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि केंद्र मान्य पंजीकरण और निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो रहा है या नहीं।
मरीजों को संदेह की स्थिति में संबंधित स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना सक्षम अधिकारियों तक पहुंचानी चाहिए। जागरूक नागरिक ही स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अधिकारियों के लिए अहम संदेश
बढ़या क्षेत्र में हुई कार्रवाई के बाद यह मामला केवल सीलिंग तक सीमित न रहे, बल्कि विभागीय स्तर पर नियमों के अनुसार आगे की जांच भी होनी चाहिए। यदि जांच में कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए और यदि सब कुछ नियमानुसार पाया जाता है तो स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
साथ ही जिले में संचालित सभी संबंधित केंद्रों की समय-समय पर जांच और रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर मरीजों के स्वास्थ्य और कानूनन निर्धारित व्यवस्था के साथ समझौते की गुंजाइश न रहे।
सारांश
सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य विभाग की आकस्मिक कार्रवाई के दौरान बढ़या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील किया गया। विभागीय टीम के अनुसार, मौके पर अल्ट्रासाउंड मशीनें मिलीं और सेंटर के पंजीकरण से संबंधित स्थिति को लेकर कार्रवाई की गई। अब मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया और जांच महत्वपूर्ण होगी।
FT News Digital की टिप्पणी | कार्रवाई के साथ व्यवस्था भी मजबूत हो
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा कोई भी मामला सीधे आम आदमी की जिंदगी और भरोसे से जुड़ा होता है। इसलिए केवल एक केंद्र पर कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि नियमों का पालन कराने के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था और प्रभावी सत्यापन भी सुनिश्चित हो।
FT News Digital किसी व्यक्ति, संचालक अथवा संस्था को दोषी घोषित नहीं करता। दोष या जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी की जांच और विधिक प्रक्रिया से ही होगा। हमारा उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और उससे जुड़े जनहित के सवाल को सामने रखना है।
हम संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई करें। साथ ही आम जनता को भी सुरक्षित और वैध स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक किया जाए।
क्योंकि स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए—न मरीज के स्तर पर, न व्यवस्था के स्तर पर।
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