विभाजन की विभीषिका का दर्द याद, सिद्धार्थनगर से गूंजा एकता का संदेश

इतिहास का वह दर्द, जिसे भुलाया नहीं जा सकता

विभाजन सिर्फ सरहदों का बंटवारा नहीं था, वह लाखों परिवारों के घर, रिश्ते और यादों के बिखरने की त्रासदी भी था। इसी पीड़ादायक इतिहास को स्मरण करते हुए सिद्धार्थनगर के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले नागरिकों और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। साथ ही इतिहास की त्रासदी से सीख लेते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का संदेश दिया गया।

स्मृति दिवस का संदेश
अतीत की पीड़ा को याद करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी और सीख भी है।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर रहा कि समाज को इतिहास के कठिन दौर से सीख लेकर आपसी विश्वास, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करना चाहिए।

सभागार में दिखी गंभीरता और सहभागिता
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों ने भाग लिया। सभागार में विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और पीड़ितों की स्मृतियों को प्रदर्शित करने वाली सामग्री भी लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही।
सिद्धार्थनगर में इतिहास के दर्दनाक अध्याय को किया गया स्मरण
सिद्धार्थनगर। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के तत्वावधान में 14 अगस्त को डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद जगदम्बिका पाल सहित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान विभाजन के दौर की उन पीड़ादायक घटनाओं को स्मरण किया गया, जिनका असर केवल उस समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विस्थापित परिवारों की स्मृतियों और आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुंचा। अपने घर-परिवार और अपनी जड़ों से बिछड़ने वाले लोगों के संघर्ष और पीड़ा को श्रद्धा के साथ याद किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले असंख्य नागरिकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की। सभागार में लगाए गए ऐतिहासिक चित्रों और सामग्री के माध्यम से भी उस दौर की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया गया।
जब इतिहास बोलता है, तो वर्तमान को रास्ता दिखाता है
विभाजन की त्रासदी को याद करने का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि इतिहास को केवल स्मृति बनाकर न छोड़ा जाए। उससे ऐसी सीख ली जाए, जो समाज को विभाजनकारी परिस्थितियों से दूर रखते हुए एकता और भाईचारे की ओर ले जाए।
कार्यक्रम में इसी भावना के साथ राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
टिप्पणी | दर्द को राजनीति नहीं, सीख में बदलना होगा
इतिहास के पन्नों में दर्ज विभाजन का अध्याय आज भी मानवीय पीड़ा की गहरी कहानी कहता है। लाखों लोगों के विस्थापन और असंख्य परिवारों के बिछड़ने की स्मृतियां यह सवाल छोड़ती हैं कि आखिर समाज को ऐसी परिस्थितियों से क्या सीख लेनी चाहिए?
जवाब स्पष्ट है—नफरत से नहीं, एकता से भविष्य बनता है।
विभाजन की पीड़ा को याद करने की सार्थकता तभी है, जब समाज अतीत से सीख लेकर वर्तमान में आपसी विश्वास मजबूत करे और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करे, जहां विविधता के बीच एकता देश की सबसे बड़ी ताकत बनी रहे।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन., मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि इतिहास की पीड़ा को याद रखना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न होने दिया जाए।
विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले सभी नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि।
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