सिद्धार्थनगर में शौर्य, श्रद्धा और इतिहास का अद्भुत संगम, बारिश में भी नहीं थमा वीरांगना अवन्तीबाई के अनुयायियों का उत्साह

घोड़े पर सवार तलवार लिए वीरांगना की मनमोहक झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, ढोल-नगाड़ों के बीच नगर भ्रमण करती रही शोभायात्रा

सिद्धार्थनगर।
सिद्धार्थनगर में रविवार को वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की जयंती पर शौर्य, श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक एकजुटता की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आयोजित जयंती समारोह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम में डुमरियागंज सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल, सदर विधायक श्यामधनी राही तथा उनके प्रतिनिधि सत्य प्रकाश राही की मौजूदगी रही। मंच से वक्ताओं ने वीरांगना अवन्तीबाई लोधी के जीवन, उनके संघर्ष, साहस और बलिदान को याद करते हुए उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला।

प्रतिमा स्थापित करने का उठा प्रस्ताव
कार्यक्रम के दौरान वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की स्मृति को स्थायी रूप से संजोने के लिए उनके अनुयायियों की ओर से प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार सांसद जगदंबिका पाल और विधायक श्यामधनी राही ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति एवं समर्थन की बात कही।

इस प्रस्ताव के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उत्साह और बढ़ गया।
महासभा के पदाधिकारियों की रही मौजूदगी
आयोजन में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद लोधी, जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश लोधी, उपाध्यक्ष रामप्रकाश लोधी, उपाध्यक्ष सुनील लोधी, उपाध्यक्ष अमरीश लोधी, महामंत्री दुर्गेश लोधी, मंत्री राजेश लोधी, महामंत्री श्यामनंदन लोधी, वरिष्ठ सलाहकार एवं सभासद राजाराम लोधी, राम उचित लोधी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख दयाराम लोधी, युवा जिला अध्यक्ष सोनू लोधी तथा जिला अध्यक्ष अर्जुन लोधी शामिल रहे।

बारिश आई, लेकिन लोगों का उत्साह नहीं टूटा
जनसभा के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश बढ़ती गई, लेकिन मंच से वक्ताओं का संबोधन जारी रहा। सबसे खास तस्वीर यह रही कि बारिश के बावजूद कार्यक्रम में मौजूद लोगों की भीड़ डटी रही।
लोग बारिश में भी वक्ताओं को सुनते रहे। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का उत्साह कम होता नहीं दिखाई दिया। बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में लोगों का टिके रहना आयोजन की खास तस्वीर बन गया।
घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी ने मोहा मन
जनसभा के बाद जब वीरांगना की झांकी के साथ शोभायात्रा निकली तो नजारा देखते ही बन रहा था।
घोड़े पर सवार वीरांगना, हाथ में तलवार और आकर्षक वेशभूषा में सजी झांकी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। झांकी इतनी मनमोहक थी कि शहर में जहां से भी यह गुजरी, लोगों की निगाहें उस पर टिकती चली गईं।
महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे—हर वर्ग के लोग इस झांकी को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। सड़क किनारे खड़े लोग वीरांगना की झांकी को एकटक निहारते नजर आए।
झांकी के साथ बजते ढोल, नगाड़े और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्साह से भर दिया।
तलवारबाजी के प्रदर्शन ने भी खींचा ध्यान
शोभायात्रा के दौरान तलवारबाजी का प्रदर्शन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। तलवारों की चमक, ढोल-नगाड़ों की गूंज और घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी ने शोभायात्रा को खास बना दिया।
लोग इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद करते दिखाई दिए।
भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से शुरू हुई शोभायात्रा
बैनर में दिए गए कार्यक्रम विवरण के अनुसार भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होकर आगे बढ़ी।
झांकी के आगे बढ़ने के साथ पीछे लोगों की भीड़ चलती रही। रास्ते में मौजूद लोग शोभायात्रा को देखने के लिए रुकते रहे। पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों की आवाज और वीरांगना की झांकी से जीवंत नजर आया।
इसके बाद शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए सिद्धार्थनगर के बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर, जेल के सामने स्थित बीएसए ग्राउंड पहुंची, जहां शोभायात्रा का समापन हुआ। बैनर में भी शोभायात्रा और समापन का यही कार्यक्रम विवरण अंकित है।
1857 के संग्राम की वीरांगना हैं अवन्तीबाई
वीरांगना अवन्तीबाई लोधी का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और संघर्ष की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।
मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार रानी अवन्तीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को सिवनी जिले के मनकेहणी गांव में हुआ था। बचपन से ही उनमें वीरता और साहस के गुण थे तथा उन्होंने तलवारबाजी और घुड़सवारी सीखी। बाद में रामगढ़ रियासत के शासन की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया। 23 नवंबर 1857 को खैरी के युद्ध में उनके नेतृत्व वाली सेना ने अंग्रेजी सेना का सामना किया। मार्च 1858 में अंग्रेजी सेना के साथ संघर्ष के दौरान उन्होंने आत्मबलिदान किया।
इसी साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की स्मृति में उनके अनुयायी आज भी उनकी जयंती को श्रद्धा और गौरव के साथ मनाते हैं।
इनसेट | बारिश में भी अडिग रहा उत्साह
बारिश ने रोका आसमान, लोगों का हौसला नहीं।
जनसभा के दौरान तेज बारिश होने के बावजूद मंच से वक्ताओं का संबोधन जारी रहा और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर बने रहे। बारिश के बीच लोगों का इस तरह डटे रहना आयोजन की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल रहा।
इनबॉक्स | झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
घोड़े पर सवार वीरांगना, हाथ में तलवार और पीछे ढोल-नगाड़ों की गूंज।
शोभायात्रा में वीरांगना अवन्तीबाई लोधी की झांकी ने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी झांकी को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। तलवारबाजी के प्रदर्शन ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
लीड
सिद्धार्थनगर में वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की जयंती पर आयोजित समारोह शौर्य, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह का केंद्र बन गया। सांसद जगदंबिका पाल और विधायक श्यामधनी राही की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में वीरांगना की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। तेज बारिश के बावजूद जनसभा में लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। इसके बाद भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से निकली घोड़े पर सवार वीरांगना की मनमोहक झांकी वाली शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों और तलवारबाजी के प्रदर्शन के साथ नगर भ्रमण करते हुए बीएसए ग्राउंड, जेल के सामने पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।
सारांश
अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा जनपद सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आयोजित जयंती समारोह में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही और प्रतिनिधि सत्य प्रकाश राही समेत महासभा के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में वीरांगना की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। तेज बारिश के बावजूद जनसभा में लोगों का उत्साह बना रहा। इसके बाद भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से निकली भव्य शोभायात्रा में घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी, ढोल-नगाड़े और तलवारबाजी का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा का समापन बीएसए ग्राउंड, बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर, जेल के सामने हुआ।
टिप्पणी | इतिहास जब सड़क पर उतरता है
रानी अवन्तीबाई लोधी का इतिहास केवल किसी एक समुदाय की स्मृति तक सीमित न रहकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक इतिहास का हिस्सा है। उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित इस तरह के कार्यक्रम इतिहास की उस वीरगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।
सिद्धार्थनगर के आयोजन में खास बात यह रही कि मंचीय कार्यक्रम के साथ झांकी, पारंपरिक वाद्ययंत्र, तलवारबाजी और नगर भ्रमण ने इतिहास को दृश्य रूप में लोगों के सामने रखा। तेज बारिश के बावजूद लोगों का कार्यक्रम में बने रहना भी आयोजन के प्रति उनकी रुचि और उत्साह को दर्शाता है।
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