फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
17 फरवरी को बनेगा नवपंचम राजयोग, बदल सकती है किस्मत की चाल बुध–गुरु की विशेष युति से चमकेंगे भाग्य के सितारे

सिद्धार्थनगर/डेस्क।
फरवरी 2026 का महीना ज्योतिष की दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। 17 फरवरी 2026 को आकाश में एक ऐसा दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जिसे नवपंचम राजयोग कहा जाता है। इस दिन बुद्धि के कारक बुध और ज्ञान व विस्तार के ग्रह गुरु के बीच नवपंचम संबंध बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह राजयोग भाग्य, करियर, धन, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला है। खास बात यह है कि इस योग का प्रभाव कुछ राशियों पर विशेष रूप से अनुकूल रहेगा।

नवपंचम राजयोग क्यों है खास?

नवम और पंचम भाव का संबंध भाग्य + बुद्धि का संगम माना जाता है
बुध–गुरु की युति से निर्णय क्षमता, संवाद और योजनाओं को बल मिलता है
लंबे समय से रुके कार्यों में गति आने के योग
आर्थिक स्थिति में सुधार और सम्मान बढ़ने की संभावना


इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार
इस राजयोग के प्रभाव से कुछ राशियों के जातकों को विशेष

लाभ मिलने की संभावना है—

🔹 करियर में उन्नति और नई जिम्मेदारियाँ
🔹 व्यापार में लाभ और नई डील फाइनल होने के योग
🔹 छात्रों को शिक्षा में सफलता
🔹 नौकरी बदलने या प्रमोशन के संकेत
🔹 आर्थिक स्थिति मजबूत होने के अवसर

(नोट: ग्रहों की चाल के अनुसार प्रभाव व्यक्ति की कुंडली पर भी निर्भर करता है।)

क्या करें इस दिन?

महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें
ज्ञान, शिक्षा और सलाह से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें
जरूरतमंदों को दान करना शुभ रहेगा
वाणी और व्यवहार में संयम रखें

 निष्कर्ष

17 फरवरी 2026 का नवपंचम राजयोग कई लोगों के जीवन में नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आ सकता है। यह समय है सही अवसर पहचानने और अपने प्रयासों को सही दिशा देने का।

UGC पर सरकार को सुप्रीम झटका.. कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा 23 जनवरी को जारी किए गए नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिनका उद्देश्य “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना” था। इन नियमों को कुछ याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी थी, जिन्होंने कहा कि ये नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और संविधान तथा यूजीसी एक्ट, 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि नए नियम “स्पष्ट नहीं” हैं और उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए कोर्ट ने इन नियमों पर तुरंत रोक लगा दी है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक 2012 में लागू नियम ही लागू रहेंगे।

याचिकाकर्ताओं का ये था दावा 

ये नियम मनमाना और भेदभावपूर्ण हैं।इससे कुछ समूह शैक्षणिक अवसरों से बाहर किए जा सकते हैं। नियमों में प्रयुक्त शब्दों और उनकी व्याख्या की संभावना अस्पष्ट है।

इन दलीलों के आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इन नियमों को लागू होने से रोकने का अनुरोध किया।

इस कानून के दुरूपयोग की चिंता: SC 

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे शब्द हैं जिनका दुरुपयोग होने की चिंता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि:

“हम एक निष्पक्ष और सभी को साथ लेकर चलने वाला माहौल बनाना चाहते हैं।”

एक प्रश्न उन्होंने यह भी पूछा कि जब पहले से ही तीन ‘E’ मौजूद हैं, तो फिर दो ‘C’ डालने की क्या आवश्यकता थी। यह सवाल नियमों की प्रासंगिकता और उद्देश्य पर केंद्रित था।