फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
भारत के बाहर जन्मे नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण में नई व्यवस्था लागू..भारत-नेपाल में खुशी की लहर

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने संबंधी पुरानी समस्या का समाधान किया गया है, जिससे भारत और नेपाल दोनों में खुशी का माहौल है।

समस्या का समाधान: अब बाहर जन्मे भारतीय भी कर सकते हैं नामांकन 

पिछले समय में भारत के बाहर जन्मे भारतीय नागरिक फॉर्म-6 या फॉर्म-6A के माध्यम से मतदाता के रूप में आवेदन नहीं कर पा रहे थे। इसका कारण यह था कि सिस्टम में ‘भारत के बाहर’ जन्म स्थान दर्ज करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुसार, अब यह समस्या पूरी तरह से हल कर दी गई है।

 नई तकनीकी व्यवस्था: ‘Outside India’ विकल्प उपलब्ध

निर्वाचन आयोग ने तकनीकी कठिनाई को दूर करते हुए एक ऑफलाइन व्यवस्था लागू की है। अब:

ईआरओ-नेट और बीएलओ ऐप के डेटा एंट्री मॉड्यूल में

जन्म स्थान के रूप में ‘Outside India’ चुनने का विकल्प है।

साथ में देश का नाम दर्ज करने के लिए Text Box भी उपलब्ध है।

इससे अब भारत के बाहर जन्मे भारतीय पात्र नागरिक अपने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन कैसे करें: फॉर्म-6 / फॉर्म-6A भरें और जमा करें 

नई व्यवस्था के तहत:

आवेदनकर्ता फॉर्म-6 या फॉर्म-6A को भौतिक रूप में भरें।

उसे अपने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी / बूथ लेवल अधिकारी के पास जमा कराएँ।

इससे अब विदेश में जन्मे पात्र नागरिक भी अपने मताधिकार का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

भारत-नेपाल में खुशी का माहौल

इस नई व्यवस्था की घोषणा से भारत में तो लोग ख़ुश हैं ही, साथ ही नेपाल में बहुएं और वधू पक्ष के लोग भी इसे स्वागत योग्य बता रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे:

इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

व्यापक प्रचार-प्रसार भी करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इसका लाभ उठाएँ।

मिशन पैदल भारत यात्रा पैरों से नाप रहे हैं भारत, दिलों को जोड़ रहे हैं सनोज कुमार कुशवाहा

सिद्धार्थनगर / कुशीनगर।
आज के दौर में जहाँ लोग सुविधाओं के आदी हो चुके हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के एक युवक ने भारत को जानने और जोड़ने के लिए ऐसा रास्ता चुना है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। यह कहानी है सनोज कुमार कुशवाहा की—जो पैरों से भारत नाप रहे हैं और दिलों को जोड़ने का काम कर रहे हैं।
सनोज कुमार कुशवाहा, निवासी धर्मपुर पर्वत, जनपद कुशीनगर, ने
21 अक्टूबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश से एक असाधारण यात्रा की शुरुआत की।
इस यात्रा का नाम है—
“मिशन पैदल भारत यात्रा”


28 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर, वो भी पैदल
अब तक सनोज कुमार


28,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी


29 राज्यों


सैकड़ों जिलों और हजारों गांवों
को पूरी तरह पैदल तय कर चुके हैं।
वर्तमान समय में वे उत्तर प्रदेश के 26 जनपदों की यात्रा पर हैं और हर जिले में भारतीय संस्कृति, आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दे रहे हैं।
सिर्फ यात्रा नहीं, भारत को समझने का मिशन
सनोज कुमार कहते हैं कि यह यात्रा केवल दूरी तय करने के लिए नहीं है।
इसका असली उद्देश्य है—
भारत की संस्कृति और सभ्यता को करीब से समझना
अलग-अलग राज्यों की भाषा, खान-पान और परंपराओं को जानना
लोगों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करना
यात्रा के दौरान वे लोगों के घरों में रुकते हैं, उनके साथ भोजन करते हैं और आम जनजीवन को बहुत नजदीक से देखते-समझते हैं।
किताब में सहेज रहे हैं भारत की आत्मा
इस ऐतिहासिक यात्रा के अनुभवों को
सनोज कुमार एक किताब के रूप में लिख रहे हैं।
इस पुस्तक का नाम होगा—
“भारतीय संस्कृति (Indian Culture)”
इस किताब में भारत के हर कोने से जुड़ी
संस्कृति, जीवनशैली, परंपराएं और अनुभव
सरल भाषा में दर्ज किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भारत को और गहराई से समझ सकें।


सुविधाएँ कम, हौसला बेहद बड़ा
सनोज कुमार की यात्रा किट बहुत साधारण है—
कुछ कपड़े, जरूरी दवाइयाँ और कैंप लगाने का सामान।
सुविधाएँ सीमित हैं, लेकिन हौसला और उद्देश्य बहुत विशाल।
उन्होंने बताया कि इस पूरी यात्रा के दौरान


प्रशासन का सहयोग


आम लोगों का स्नेह
उन्हें लगातार मिलता रहा है।
सिद्धार्थनगर में हुआ भव्य स्वागत
आज जनपद सिद्धार्थनगर के
नगर पालिका परिषद क्षेत्र, गांधीनगर वार्ड में
सनोज कुमार कुशवाहा का भव्य स्वागत किया गया।
स्थानीय नागरिकों ने फूल-मालाओं से उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर नगर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अद्भुत यात्रा की सराहना की और युवक का उत्साह बढ़ाया।
आगे की योजना
उत्तर प्रदेश के शेष जनपदों की यात्रा पूरी करने के बाद
सनोज कुमार कुछ समय का विश्राम करेंगे।
इसके बाद वे आगे की यात्राओं की योजना बनाएंगे, ताकि
भारत को जोड़ने का यह मिशन लगातार आगे बढ़ता रहे।
FT News DParagraphigital विशेष
सनोज कुमार कुशवाहा की यह पदयात्रा हमें यह सिखाती है कि—


भारत को जानने के लिए बड़ी गाड़ियों की नहीं


बल्कि बड़े हौसले और सच्चे इरादों की जरूरत होती है।
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं,
बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने और जोड़ने का जीवंत प्रयास है।

पाकिस्तान के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान

अरविंद जयतिलक

(वरिष्ठ पत्रकार)

पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा। लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है। उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं। वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी। इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है। याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।

डोडा में सेना का वाहन दुर्घटनाग्रस्त: पहाड़ी सड़क पर खाई में गिरा, कई जवान शहीद व घायल | रेस्क्यू जारी

जम्मू-कश्मीर | डोडा
जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहाँ ड्यूटी पर तैनात भारतीय सेना का एक वाहन भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन पहाड़ी क्षेत्र की संकरी सड़क पर अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गया और गहरी खाई में जा गिरा।
इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में कुछ जवानों के शहीद होने और कई अन्य के घायल होने की सूचना है। हालांकि, जवानों की संख्या और स्थिति को लेकर अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार किया जा रहा है।

रेस्क्यू और राहत कार्य
घटना की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने मौके पर पहुँचकर बचाव अभियान शुरू किया। दुर्गम पहाड़ी इलाका और कठिन रास्तों के कारण रेस्क्यू कार्य चुनौतीपूर्ण रहा, फिर भी घायलों को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकाला गया।
घायल जवानों को पहले भद्रवाह के अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर रूप से घायल जवानों को बेहतर इलाज के लिए उधमपुर स्थित सैन्य अस्पताल भेजा गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

देश में शोक की लहर
इस हादसे की खबर सामने आने के बाद देशभर में शोक की लहर है। प्रशासनिक और सैन्य स्तर पर स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। अधिकारियों ने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

वीरों को नमन
यह दुर्घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि भारतीय सेना के जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की सेवा में डटे रहते हैं। पहाड़ों, दुर्गम रास्तों और जोखिम भरे इलाकों में ड्यूटी निभाते हुए उनका समर्पण और बलिदान देश के लिए अमूल्य है।

FT NEWS DIGITAL शहीद जवानों को नमन करता है और घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है।

यह रिपोर्ट प्रारंभिक व आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। विस्तृत विवरण एवं अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा जारी किए जाने के बाद अपडेट की जाएगी।

हरिशंकर तिवारी लोकप्रिय नेता थे कुशल राजनीतिज्ञ व संघर्षशील थे हरिशंकर तिवारी-टापर बाबा

हरिशंकर तिवारी लोकप्रिय नेता थे
कुशल राजनीतिज्ञ व संघर्षशील थे हरिशंकर तिवारी-टापर बाबा
हरपुर महंत शिव मंदिर परिसर में लोगों ने हरिशंकर तिवारी को श्रद्धांजलि

महराजगंज भिटौली
हरपुर महंत शिव मंदिर परिसर में पूर्व ग्राम प्रधान अरुण कुमार उर्फ बबलू मिश्र की अध्यक्षता में पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के निधन पर उनके चित्र पर पुष्पार्चन, माल्यार्पण कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण लोगों ने किया।अरुण कुमार मिश्र ने कहा कि वह जमीनी नेता थे।अपने पौरुष के बल पर लोगों में लोकप्रिय थे। जिससे उनके निधन पर लोग मर्माहत है। राजेंद्र दुबे उर्फ टापर बाबा ने कहा कि हरिशंकर तिवारी कुशल राजनीतिज्ञ और संघर्षशील नेता थे। प्रधान संगठन के प्रदेश सचिव आशीष गौतम , सुशील शुक्ल,गुड्डू पांडेय,रंजन पांडेय, मुन्ना दुबे, अमरनाथ तिवारी,राम आधार पांडेय, सुरेश दुबे, मुन्ना चौबे, वशिष्ठ दुबे, शत्रुघ्न कन्नौजिया, संजय लाल श्रीवास्तव, मंदिर के पुजारी सुभाष शर्मा,पारस चौधरी, महेश प्रसाद,प्रवीण कुमार, रामानंद यादव,रामकरण, महेश आदि लोग मौजूद रहे।

राष्ट्रीय एकता शिविर में दिखेगी कला व संस्कृति की झलक

राष्ट्रीय एकता शिविर में दिखेगी कला व संस्कृति की झलक
***********************************

देश के विभिन्न राज्यों के 500 से अधिक स्काउट गाइड करेंगे प्रतिभाग

महराजगंज। भारत स्काउट गाइड की ओर से सिसवा के चोखराज तुलस्यान इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय एकता शिविर लगेगा। इसमें देश के विभिन्न स्थलों से 500 से अधिक स्काउट गाइड हिस्सा लेंगे। वे अपनी संस्कृति व सभ्यता का प्रदर्शन भी करेंगे।
जिला बने 35 वर्ष हो चुके हैं। लंबे समय से स्कूलों में स्काउट-गाइड से जुड़ी गतिविधियां कराई जाती हैं। जिला से लेकर राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी हो चुके हैं, मगर कभी भी राष्ट्रीय एकता शिविर नहीं लगा। विभिन्न राज्यों की कला व संस्कृति को जानने व समझने के लिए पहली बार सिसवा के चोखराज तुलस्यान इंटर कॉलेज मेें 26 से 30 मई के बीच एकत्र होंगे। पांच दिन तक चलने वाली गतिविधियों से वे एक-दूसरे पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने का प्रयास करेंगे।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल का जिलाधिकारी ने लिया जायजा, प्रशाशनिक अधिकारियों को दिया दिशा निर्देश

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल का जिलाधिकारी ने लिया जायजा, प्रशाशनिक अधिकारियों को दिया दिशा निर्देश

आज दिनांक 18.05.2023 को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के जनपद महराजगंज के चौक नगर में 22 मई 2023 के संभावित आगमन/भ्रमण के दृष्टिगत जिलाधिकारी महराजगंज सत्येन्द्र कुमार एवं अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह व एडीएम पंकज वर्मा, द्वारा संयुक्त रुप से थाना चौक क्षेत्रान्तर्गत स्थित कार्यक्रम स्थल तथा होलीपैड,पार्किंग स्थल आदि के तैयारियों के सम्बन्ध में बारीकी से सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए उपस्थित अधिकारियों को समय से तैयारी पूर्ण करने हेतु निर्देशित किया गया। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी द्वारा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न होने पाये के संबंध में सभी को कड़े निर्देश दिये गये।

इस अवसर पर जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार एवं एडीएम पंकज वर्मा,व अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह, सहित प्रशासनिक एवं पुलिस के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।