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प्रधानों का दर्द छलका, लंबित भुगतान पर उठी आवाज – समाधान न हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

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शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर (संवाददाता):
शोहरतगढ़ ब्लॉक परिसर में शुक्रवार को राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित मासिक बैठक में ग्राम प्रधानों की समस्याएं खुलकर सामने आईं। बैठक में विकास कार्यों के लंबित भुगतान, अधिकारों से जुड़े मुद्दों और कार्यकाल विस्तार की मांग को लेकर प्रधानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।
बैठक के दौरान संगठन पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन खंड विकास अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि ग्राम पंचायतों में लंबित भुगतानों को शीघ्र जारी किया जाए, ताकि ग्रामीण विकास कार्य बाधित न हों और योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंच सके।
संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष ताकीब रिज़वी ने कहा कि ग्राम प्रधानों ने बीते वर्षों में सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए उनके कार्यकाल विस्तार जैसे विषयों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।

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वहीं, संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्रा ने जनपद में लंबित भुगतानों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कई ग्राम पंचायतों में 15 से 20 लाख रुपये तक का भुगतान लंबित है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही मनरेगा के तहत भी भुगतान लंबित होने से मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि यदि समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ, तो संगठन को आगे की रणनीति बनानी पड़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाने के पक्ष में है।

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प्रशासनिक पक्ष
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, बजट प्रक्रिया और तकनीकी औपचारिकताओं के तहत भुगतान जारी करने की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाती है, ताकि योजनाओं का लाभ सही ढंग से पात्रों तक पहुंचे।

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निष्कर्ष
ग्राम प्रधानों की यह बैठक एक ओर जहां जमीनी स्तर की समस्याओं को उजागर करती है, वहीं प्रशासन और शासन के समन्वय से समाधान की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। अब देखना होगा कि इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, जिससे ग्रामीण विकास की गति बनी रहे और पंचायतों की भूमिका और मजबूत हो सके।

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