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टीएफआई के आह्वान पर टेट अनिवार्यता के विरोध में 26 फरवरी को धरना देंगे शिक्षक, बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक करेंगे पैदल मार्च

सिद्धार्थनगर। टीएफआई (Teachers Federation of India) के आह्वान पर गुरुवार को टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में जनपद में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह धरना अपराह्न एक बजे से बीएसए कार्यालय परिसर में शुरू होगा, जिसके बाद शिक्षक कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च करेंगे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे।

टीएफआई का आह्वान: टेट (TET)अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होंगे शिक्षक

टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने बताया कि, “आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है। ऐसे में अब उन पर टेट अनिवार्यता लागू करना नियमों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए शिक्षकों को राहत प्रदान करनी चाहिए।”

बीएसए कार्यालय परिसर में धरना, कलेक्ट्रेट तक निकलेगा पैदल मार्च

धरना कार्यक्रम के तहत जनपद भर के शिक्षक गुरुवार को अपराह्न एक बजे बीएसए कार्यालय परिसर में एकत्रित होंगे। यहां से शिक्षक शांतिपूर्ण ढंग से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे।

कलेक्ट्रेट में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिसमें टेट अनिवार्यता समाप्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी।

शिक्षकों से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील

राधेरमण त्रिपाठी ने जनपद के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें। उनका कहना है कि यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी की सहभागिता आवश्यक है।

टेट अनिवार्यता विवाद: क्या है पूरा मामला?

शिक्षकों का तर्क है कि आरटीई एक्ट से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने उस समय की निर्धारित शैक्षिक योग्यता और चयन प्रक्रिया के अनुसार नौकरी पाई थी। ऐसे में बाद में टेट की अनिवार्यता लागू करना उनके साथ अन्याय है।

लगातार तीसरे दिन काली पट्टी बांध शिक्षकों ने किया शैक्षिक कार्य- 26 को देंगे जिलाधिकारी को ज्ञापन

सिद्धार्थनगर। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का विरोध लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। खेसराहा विकास खंड के विभिन्न विद्यालयों में अध्यापकों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के निर्णय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने इसे अपने अनुभव और सेवा के साथ अन्याय बताते हुए निर्णय वापस लेने की मांग की है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष इंद्रसेन सिंह ने बताया कि तीन दिनों से शिक्षक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते हुए शांतिपूर्ण विरोध जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक टीईटी की अनिवार्यता समाप्त नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

26 फरवरी को देंगे ज्ञापन: इंद्रसेन सिंह 

उन्होंने आगे बताया कि 26 फरवरी को शिक्षक बीएससी ग्राउंड से पैदल मार्च निकालते हुए जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। यदि इसके बाद भी सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा दिल्ली कूच कर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

अनुभव के आधार पर मिले छूट: नीरज मिश्रा 

वहीं शिक्षक नीरज मिश्रा ने कहा कि वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों को अनुभव के आधार पर छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टीटी अनिवार्य करना उचित नहीं है। सरकार को शिक्षकों के अनुभव का सम्मान करना चाहिए।

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और इसे प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।