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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल का असर: देश में LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगभग 60 रुपये तक की बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार इस बदलाव के बाद देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर कई देशों की ऊर्जा लागत पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का प्रभाव घरेलू कीमतों पर भी देखा जा सकता है।
इस बीच पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं पर भी वैश्विक बाजार की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में ऊर्जा कीमतों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर परिवहन लागत, घरेलू बजट और महंगाई के अन्य पहलुओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि संबंधित एजेंसियां और नीति विशेषज्ञ ऊर्जा आपूर्ति और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल ऊर्जा बाजार से जुड़े संकेतों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार कीमतों में बदलाव संभव है।

राजस्थान में पेपर लीक पर बड़ा एक्शन! भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार सख्त, जांच एजेंसियां अलर्ट

जयपुर।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन ने जांच एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी निगरानी और कड़े प्रावधानों पर भी काम किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों का विश्वास कायम रखने के लिए कई स्तरों पर सुधारात्मक कदम उठाने की तैयारी में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाती है तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हुई हैं।

उत्तर प्रदेश में मार्च की शुरुआत में ही तेज़ गर्मी का असर, कई शहरों में तापमान 36°C के पार

उत्तर प्रदेश में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। राजधानी लखनऊ सहित कई शहरों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई जगहों पर पारा 36 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। �
Navbharat Times
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है। हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है, जिससे मौसम में थोड़ी राहत मिल सकती है। �
Navbharat Times
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के शुरुआती दिनों में इतनी तेज गर्मी असामान्य मानी जा रही है। लोगों को दिन के समय धूप से बचने और पानी का अधिक सेवन करने की सलाह दी गई है।
गर्मी बढ़ने के कारण बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किसान भी मौसम के इस बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर फसलों पर पड़ सकता है।

महिला दिवस पर सिद्धार्थनगर में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को रोका गया, लखनऊ धरने जा रही महिलाएं डुमरियागंज में बैठीं धरने पर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सिद्धार्थनगर जिले में उस समय हलचल बढ़ गई, जब विभिन्न मांगों को लेकर लखनऊ में प्रस्तावित धरना प्रदर्शन में शामिल होने जा रही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को पुलिस प्रशासन ने रास्ते में रोक दिया।
बताया जा रहा है कि संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हुई थीं। इसी दौरान पुलिस प्रशासन ने एहतियातन उन्हें डुमरियागंज के कन्या इंटर कॉलेज मैदान में रोक दिया।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद नाराज़ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां वहीं मैदान में धरने पर बैठ गईं। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से लखनऊ जा रही थीं और सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहती थीं।
आंगनबाड़ी संगठन की प्रदेश महामंत्री प्रभावती ने कहा कि कार्यकत्रियां लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं और महिला दिवस के अवसर पर अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहती थीं।
उधर प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। मौके पर पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
फिलहाल मैदान में बैठी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां धरने पर डटी हुई हैं और प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद जता रही हैं।

नेपाल की राजनीति में फिर गूंजा शाह परिवार का नाम — अभिषेक प्रताप शाह की जीत से सीमा क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल

नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है। कपिलवस्तु क्षेत्र से नेता अभिषेक प्रताप शाह ने चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया है। उनकी जीत को नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कपिलवस्तु और उससे जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले चुनावों का प्रभाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर भारत और नेपाल के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी देखा जाता है।
अभिषेक प्रताप शाह लंबे समय से नेपाल की राजनीति में सक्रिय माने जाते हैं और उनका परिवार भी राजनीतिक परंपरा से जुड़ा रहा है। इसी कारण उनकी जीत को अनुभव और जनसमर्थन की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नेपाल के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में चुनावी परिणाम अक्सर सीमा पार रहने वाले लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन जाते हैं। कारण यह है कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के चलते दोनों देशों के लोगों के बीच व्यापार, रिश्तेदारी और सांस्कृतिक संपर्क काफी गहरा है।
इसी संदर्भ में भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस जीत पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे दोनों देशों के लोगों को लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नेपाल की नई राजनीतिक परिस्थितियों के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीमा क्षेत्रों के विकास, व्यापारिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।
नेपाल के इस चुनावी परिणाम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में स्थानीय चुनाव भी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन सकते हैं।

सिद्धार्थनगर में चौंकाने वाला मामला: मामूली बिजली खर्च वाले दर्जी के घर पहुंचा 32 लाख का बिल, परिवार सदमे में

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है। नगर क्षेत्र के अनूपनगर में रहने वाले एक गरीब दर्जी के घर अचानक 32 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल पहुंचने से इलाके में हैरानी और चर्चा का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार राजेंद्र प्रसाद, जो पेशे से दर्जी हैं और छोटी सी सिलाई की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, उनके घरेलू बिजली कनेक्शन पर 32,69,463 रुपये की देय राशि दर्शाई गई है। इतना बड़ा बिल देखकर वह और उनका परिवार घबरा गया।
राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि उनके दो कमरे के मकान में केवल चार बल्ब, दो पंखे और एक फ्रिज ही है। इसके अलावा कोई भारी बिजली उपकरण नहीं है। उन्होंने बताया कि वह हर महीने नियमित रूप से बिजली बिल जमा करते रहे हैं, ऐसे में अचानक लाखों रुपये का बिल आना उनके लिए समझ से परे है।
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार मीटर रीडिंग की अनियमितता या तकनीकी त्रुटि के कारण बिल में भारी अंतर देखने को मिलता है।
इधर इस मामले में बिजली विभाग के उपखंड अधिकारी योगेश बघेल ने बताया कि उपभोक्ता के यहां नवंबर माह में स्मार्ट मीटर लगाया गया था। प्रारंभिक रीडिंग दर्ज करने में कभी-कभी तकनीकी त्रुटि हो जाती है, जिससे बिल में असामान्य राशि दिखाई देने लगती है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल मीटर की रीडिंग की जांच कराई जा रही है और यदि किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि पाई जाती है तो बिल को संशोधित कर दिया जाएगा।
नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी के बयान के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है।

नेपाल आम चुनाव 2026 – लोकतंत्र की नई दिशा

नेपाल में लोकतंत्र का महापर्व: भारी उत्साह के साथ मतदान, नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ता देश


काठमांडू/नेपाल।
भारत के पड़ोसी और मित्र राष्ट्र नेपाल में हाल ही में हुए आम चुनावों ने देश की राजनीति को एक नई दिशा देने का संकेत दिया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लाखों नेपाली नागरिकों ने उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा लिया और शांतिपूर्ण माहौल में मतदान सम्पन्न हुआ।
नेपाल में यह चुनाव उस समय हुआ जब पिछले वर्ष भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों और युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। उसी राजनीतिक बदलाव के बाद 5 मार्च 2026 को नए संसद के गठन के लिए चुनाव कराए गए।

चुनाव आयोग के अनुसार पूरे देश में मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से कराया गया। पर्वतीय और दुर्गम इलाकों में भी मतपेटियों को हेलीकॉप्टर और विशेष सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से मतदान केंद्रों तक पहुंचाया गया।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस चुनाव में करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, जिसमें युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।

मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा की स्थिति न बने।
चुनाव क्यों बना खास
इस बार का चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है:
यह चुनाव 2025 के जनआंदोलनों के बाद पहली बार कराया गया।
युवाओं और नए नेतृत्व के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता दिखाई दिया।
पारंपरिक दलों के साथ-साथ नए राजनीतिक दलों को भी जनता का समर्थन मिलता नजर आया।
रिपोर्टों के अनुसार नई राजनीतिक ताकतें और युवा नेतृत्व भी इस चुनाव में मजबूती से उभरते दिखाई दे रहे हैं। �

चुनाव परिणाम की स्थिति
चुनाव के शुरुआती रुझानों में कुछ नए राजनीतिक दलों को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दी, जिससे नेपाल की राजनीति में संभावित बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव नेपाल के लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि जनता अब पारदर्शिता, सुशासन और नई नीतियों की अपेक्षा कर रही है।
🇳🇵 भारत-नेपाल संबंधों पर असर
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं।
ऐसे में नेपाल में स्थिर और मजबूत सरकार बनने से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और विकास सहयोग को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


नेपाल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव शांतिपूर्ण और व्यापक भागीदारी के साथ सम्पन्न हुए। लगभग 60% मतदान के साथ जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उत्साह दिखाया और नई राजनीतिक दिशा की उम्मीद जताई है।

BSA ग्राउंड में होगा सामूहिक विवाह का आयोजन

समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत शासन द्वारा सामूहिक विवाह का कार्यक्रम जनपद हेतु जनपद सिद्धार्थनगर में 566 जोड़ो का सामूहिक विवाह कार्यक्रम कराये जाने हेतु लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिरो गाह फरवरी, 2026 में बढाकर 950 कर दिया गया है। जिसके सापेक्ष अब तक 793 जोड़ों का सामूहिक विवाह जिलाधिकारी महोदय एवं मुख्य विकास अधिकारी महोदय के निर्देशन तथा गा० जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न करा लिया गया है। अवशेष 157 जोड़ो का विवाह कार्यक्रम 14 मार्च, 2026 को कराया जाना है।

उक्त सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 28 फरवरी, 2026 तक ऑनलाइन किये गये आवेदन पत्रों को सम्मिलित किया है। इस अवधि तक पात्र पाये जाने वाले जोड़ो को अवगत कराना है कि अपने दिनांक 14.03.2026 दिन- शनिवार को बी०एस०ए० ग्राउण्ड, जिला जेल के समाने, नौगढ़, सिद्धार्थनगर में उपस्थित होकर सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित होने का कष्ट करें। अधिक जानकारी हेतु जिला समाज कल्याण अधिकारी, सिद्धार्थनगर के मोबाइल नम्बर- 9415168321 व पटल सहायक के मोबाइल नम्बर- 9918904022 पर भी सम्पर्क कर सकते है।

उक्त आशय की जानकारी जिला समाज कल्याण अधिकारी एम०पी० सिंह द्वारा दिया गया है।

अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए एनजीओ का होगा चयन, इच्छुक संस्थाएं एक सप्ताह में करें आवेदन

सिद्धार्थनगर, 07 मार्च 2026।भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत जनपद सिद्धार्थनगर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन के लिए अनुभवी स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) का चयन किया जाएगा। इस संबंध में जनपद स्तरीय समिति द्वारा योग्य संस्थाओं का चयन किया जाएगा। इच्छुक संस्थाओं को एक सप्ताह के भीतर अपना आवेदन जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में जमा करना होगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाए जाएंगे विशेष कार्यक्रम

अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत जनपद में वरिष्ठ नागरिकों के मोतियाबिंद सर्जरी, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविर, उत्पादक वृद्धावस्था गतिविधियों के प्रोत्साहन तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए अनुभवी एनजीओ का चयन किया जाना है।

एनजीओ के लिए निर्धारित अनिवार्य पात्रताएं

आवेदन करने वाली संस्था को भारत सरकार द्वारा निर्धारित निम्न अर्हताएं पूरी करनी होंगी—

संस्था सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत हो।

संस्था का क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकृत अस्पताल के साथ एमओयू (MOU) होना अनिवार्य है।

संस्था का राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता संचालित होना चाहिए।

संस्था नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत हो।

संस्था के पास पैन कार्ड एवं जीएसटी पंजीकरण होना चाहिए।

संस्था को पिछले 02 वर्षों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

पिछले 03 वर्षों का ऑडिटेड लेखा विवरण अनिवार्य रूप से देना होगा।

घोषणा पत्र के साथ करना होगा आवेदन

इच्छुक संस्थाओं को 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर संस्था के लेटरहेड पर घोषणा-पत्र के साथ अपना प्रत्यावेदन एक सप्ताह के भीतर कार्यालय जिला समाज कल्याण अधिकारी, सिद्धार्थनगर में जमा करना होगा।

समिति द्वारा किया जाएगा अंतिम चयन

शासनादेश में निर्धारित सभी शर्तों को पूर्ण करने वाली संस्थाओं का जनपद स्तरीय समिति द्वारा परीक्षण के बाद चयन किया जाएगा। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इच्छुक संस्थाएं किसी भी कार्य दिवस में जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकती हैं।

अधिकारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी जानकारी

इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी एम.पी. सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनपद की योग्य एवं अनुभवी स्वयंसेवी संस्थाओं से आवेदन करने की अपील की है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।

हमसफर बनेंगे IPS केके विश्नोई और IPS अंशिका वर्मा, गोरखपुर से शुरू हुई थी लव स्टोरी

गोरखपुर : पुलिस के दो तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी अब विवाह के मुकाम तक पहुंच गई है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई और बरेली की पुलिस अधीक्षक अंशिका वर्मा जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। दोनों की शादी 28 मार्च को राजस्थान के बारमेर जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होगी। इससे पहले 27 मार्च को बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में हल्दी और संगीत समारोह आयोजित होगा, जबकि 30 मार्च को जोधपुर के एक रिसोर्ट में भव्य रिसेप्शन रखा जाएगा।

गोरखपुर में शुरू हुई थी लव स्टोरी

दोनों आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। उस समय गोरखपुर में पोस्टिंग के दौरान उनकी पहली मुलाकात हुई थी। उस समय कृष्ण कुमार बिश्नोई गोरखपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात थे, जबकि अंशिका वर्मा वहां प्रशिक्षण के दौरान अंडर ट्रेनिंग आईपीएस अधिकारी थीं। ड्यूटी के दौरान हुई मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यही दोस्ती समय के साथ एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। अब लगभग पांच साल बाद दोनों अपने रिश्ते को शादी के रूप में नई पहचान देने जा रहे हैं।

राजस्थान में होंगे सभी शादी समारोह

दोनों परिवारों की सहमति के बाद शादी की सभी रस्में राजस्थान में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। 27 मार्च को बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में हल्दी और संगीत समारोह होगा। इसके बाद 28 मार्च को विवाह संपन्न होगा। शादी के बाद 30 मार्च को जोधपुर के एक रिसोर्ट में भव्य रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रशासनिक सेवा और पुलिस विभाग से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं।

होली में भी चर्चा में रहे दोनों अधिकारी

हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस की होली के दौरान भी दोनों अधिकारी काफी चर्चा में रहे थे। बरेली में होली समारोह के दौरान एसपी अंशिका वर्मा ने काला चश्मा पहनकर लोकप्रिय गीत “लंदन ठुमकदा” पर डांस किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इसके अगले दिन संभल में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भी अनोखे अंदाज में पुलिस लाइन में एंट्री की थी। उन्होंने शिकारी स्टाइल की टोपी पहनकर खुली जिप्सी से फिल्मी गाने पर पुलिसकर्मियों के बीच प्रवेश किया था। उनके इस अंदाज को भी लोगों ने खूब पसंद किया।

राजस्थान के किसान परिवार से आते हैं केके बिश्नोई

आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई उत्तर प्रदेश कैडर के 2018 बैच के अधिकारी हैं। उनका जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में एक किसान परिवार में हुआ। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे बिश्नोई ने बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं के बाद वे दिल्ली चले गए और सेंट स्टीफेन्स कालेज से 2013 में बीए की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विदेश में पढ़ाई का सपना देखा और फ्रांस सरकार की स्कॉलरशिप हासिल की। उन्हें करीब 40 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने पेरिस स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विषय में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

विदेश में भी किया महत्वपूर्ण काम

विदेश में पढ़ाई के दौरान बिश्नोई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनुभव हासिल किया। उन्हें यूनाइटेड नेशन के ट्रेड सेंटर में कंसल्टेंट के रूप में काम करने का अवसर मिला, जहां उन्हें लगभग 30 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा और शोध कार्य जारी रखा और बाद में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी बन गए।

पुलिस सेवा में तेजतर्रार छवि

आईपीएस बनने के बाद 2019 में उनकी पहली पोस्टिंग मेरठ के परतापुर थाने में थाना प्रभारी के रूप में हुई। इसके बाद वे मुजफ्फरनगर में एएसपी और बाद में संभल में एसपी के पद पर तैनात हुए। संभल में रहते हुए उन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक के बीमा धोखाधड़ी घोटाले का खुलासा किया, जिसमें 70 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके लिए उन्हें उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक और प्लैटिनम मेडल से सम्मानित किया गया।

अंशिका वर्मा की प्रेरणादायक कहानी

आईपीएस अंशिका वर्मा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की रहने वाली हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नोएडा में हुई। उन्होंने जेएसएस अकेडमी ऑफ टेक्निकल एडुकेशन नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के दूसरे प्रयास में शानदार सफलता हासिल की और 136 वीं रैंक प्राप्त कर आईपीएस अधिकारी बनीं। उनके पिता उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं।

पुलिस सेवा में तेजतर्रार पहचान

अंशिका वर्मा की पहली पोस्टिंग आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी थाने में ट्रेनी अधिकारी के रूप में हुई। इसके बाद उन्हें गोरखपुर में एएसपी के रूप में तैनाती मिली। वर्तमान में वे बरेली जिले में एसपी के पद पर कार्यरत हैं और अपनी कार्यशैली, अनुशासन और सक्रिय पुलिसिंग के लिए जानी जाती हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय

आईपीएस अंशिका वर्मा सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। इंस्टाग्राम पर उनके छह लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उनके काम और व्यक्तित्व के कारण युवा वर्ग उन्हें काफी पसंद करता है।

नई शुरुआत की ओर कदम

अब दोनों आईपीएस अधिकारी अपने पेशेवर जीवन के साथ-साथ निजी जीवन में भी एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं। पुलिस विभाग, प्रशासनिक सेवा और उनके परिचितों के बीच इस शादी को लेकर उत्साह का माहौल है। 28 मार्च को होने वाली यह शादी न केवल दो परिवारों के लिए बल्कि पुलिस विभाग के लिए भी एक खास अवसर बनने जा रही है। सभी लोग इस जोड़ी के सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना कर रहे हैं।

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