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“लालजी त्रिपाठी से ‘पीढ़ा बाबा’ तक: 380 कन्याओं को मिला विवाह संस्कार का पवित्र आसन”

 

2012 से लगातार सेवा, सिद्धार्थनगर में पीढ़ा वितरण बन रहा संस्कृति संरक्षण का मिशन

उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर (नौगढ़)

आधुनिकता की दौड़ में जहां पारंपरिक संस्कार धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं, वहीं नौगढ़ ब्लॉक के कपिया चौराहे पर एक ऐसी पहल सामने आई है, जो भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूती देने का काम कर रही है।

पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष लालजी त्रिपाठी, जो अब पूरे जनपद में ‘पीढ़ा बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं, द्वारा “पीढ़ा संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन” के उद्देश्य से भव्य पीढ़ा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस दौरान हिन्दू कन्याओं के विवाह में उपयोगी आम की लकड़ी से बने 380 पवित्र पीढ़ों का वितरण किया गया। यह पीढ़ा विवाह संस्कार का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है, जिस पर बैठकर वर-वधू वैवाहिक बंधन में बंधते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विभाग प्रचारक राजीव नयन जी ने कहा कि बेटियों का सम्मान और संरक्षण ही संस्कृति और पर्यावरण की सुरक्षा की आधारशिला है। उन्होंने इस पहल को समाज को जोड़ने वाला और भारतीय परंपराओं को सहेजने वाला सराहनीय प्रयास बताया।

सहकारी समिति अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि पीढ़ा वितरण न केवल एक परंपरा है, बल्कि यह समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है।

कार्यक्रम के आयोजक ‘पीढ़ा बाबा’ ने बताया कि वह वर्ष 2012 से लगातार इस पुनीत कार्य को कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू विवाह में पीढ़ा केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि संस्कारों का प्रतीक है और यही सेवा अब उनकी पहचान बन चुकी है।

इस अवसर पर समाजसेवी श्यामजी जायसवाल, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष एवं वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि हेमंत जायसवाल नगर पंचायत प्रतिनिधि रवि अग्रवाल, अरुणा मिश्रा, पवन मिश्र सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पद्माकर शुक्ल द्वारा किया गया।

 

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