गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत दो व्यक्तियों को किया गया था जिला बदर, प्रशासनिक आदेश फिर चर्चा में
सिद्धार्थनगर। जनपद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत पूर्व में जारी जिला बदर के दो आदेश एक बार फिर चर्चा में हैं। प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार हरिशंकर पाण्डेय तथा अख्तर हुसैन उर्फ मुन्नू के विरुद्ध विभिन्न आपराधिक मामलों एवं पुलिस रिपोर्टों के आधार पर सक्षम न्यायालय द्वारा छह-छह माह के लिए जनपद सिद्धार्थनगर की सीमा से निष्कासन (जिला बदर) का आदेश पारित किया गया था।
सारांश
गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत दो व्यक्तियों के विरुद्ध जिला बदर की कार्रवाई।
पुलिस की रिपोर्ट एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सक्षम न्यायालय ने पारित किए थे आदेश।
दोनों को छह माह तक सिद्धार्थनगर जनपद की सीमा में प्रवेश न करने का निर्देश।
आदेश प्रशासनिक एवं न्यायिक अभिलेखों का हिस्सा, दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं।
मुख्य खबर
जनपद सिद्धार्थनगर में शांति व्यवस्था एवं जनसुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत कार्रवाई की जाती रही है। उपलब्ध प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार थाना त्रिलोकपुर क्षेत्र के हरिशंकर पाण्डेय पुत्र बलिराम पाण्डेय, निवासी महतिनिया खुर्द तथा थाना मोहाना क्षेत्र के अख्तर हुसैन उर्फ मुन्नू, निवासी खलीलपुर टोला गाँहनिया, के विरुद्ध भी ऐसी ही कार्रवाई की गई थी।
हरिशंकर पाण्डेय का मामला
प्रशासनिक अभिलेखों में उल्लेख है कि हरिशंकर पाण्डेय के विरुद्ध वर्ष 2020 में विभिन्न थानों में चोरी, टेलीग्राफ अधिनियम तथा अन्य धाराओं से संबंधित कई मुकदमे दर्ज होने का हवाला देते हुए पुलिस ने गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की संस्तुति की थी। अभिलेखों में यह भी उल्लेख किया गया कि उसके प्रभाव के कारण आमजन के बीच भय का वातावरण होने की बात पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कही थी।
इसके आधार पर सक्षम न्यायालय ने 23 फरवरी 2023 के नोटिस की पुष्टि करते हुए उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के प्रावधानों के तहत छह माह के लिए जनपद सिद्धार्थनगर की सीमा से निष्कासित (जिला बदर) करने का आदेश पारित किया था।
अख्तर हुसैन उर्फ मुन्नू का मामला
इसी प्रकार थाना मोहाना क्षेत्र के अख्तर हुसैन उर्फ मुन्नू के संबंध में भी पुलिस ने विभिन्न मुकदमों एवं अभिलेखों का उल्लेख करते हुए गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की संस्तुति की थी। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार सक्षम न्यायालय ने 9 जुलाई 2020 के नोटिस की पुष्टि करते हुए उन्हें भी छह माह के लिए जनपद सिद्धार्थनगर की सीमा से निष्कासित करने का आदेश दिया था तथा निर्धारित अवधि तक जनपद में प्रवेश न करने का निर्देश जारी किया था।
क्या होता है जिला बदर?
जिला बदर (Externment) उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के अंतर्गत की जाने वाली एक निवारक (Preventive) प्रशासनिक कार्रवाई है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है। यह किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होता, बल्कि उपलब्ध पुलिस रिपोर्ट, अभिलेख और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर पारित प्रशासनिक आदेश होता है।
टिप्पणी
जनहित और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन समय-समय पर गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई करता है। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध दर्ज मुकदमे या जिला बदर का आदेश अपने-आप में अंतिम आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माने जाते। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है।
(यह समाचार उपलब्ध प्रशासनिक अभिलेखों एवं न्यायालय द्वारा पारित आदेशों पर आधारित है। इसमें वर्णित तथ्य संबंधित दस्तावेजों के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना इस समाचार का उद्देश्य नहीं है।)
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