मचान विधि से बदल रही किसानों की तस्वीर, कम लागत में बढ़ रही उपज और आमदनी
सिद्धार्थनगर। जनपद में सब्जी उत्पादन करने वाले किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मचान विधि (सहारा पद्धति) को अपना रहे हैं। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में विशेषकर लोटन क्षेत्र के किसान लौकी, तोरई, करेला, खीरा, सेम सहित अन्य बेलदार सब्जियों की खेती मचान पर कर बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।
सारांश
लोटन क्षेत्र के किसान मचान विधि से कर रहे हैं सब्जियों की खेती।
लौकी, करेला, तोरई, खीरा और सेम की गुणवत्ता में हो रहा सुधार।
फसल में रोग कम लगने के साथ 20 से 25 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने की संभावना।
उद्यान विभाग किसानों को दे रहा प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग।
मुख्य खबर
सिद्धार्थनगर जनपद के किसानों के बीच अब मचान विधि तेजी से लोकप्रिय हो रही है। उद्यान विभाग की पहल से कई किसान बेलदार सब्जियों की खेती आधुनिक तरीके से कर रहे हैं, जिससे उनकी उपज, गुणवत्ता और आय तीनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
इस तकनीक के तहत खेत में मजबूत बांस, खम्भों और तारों की सहायता से जाल (मचान) तैयार किया जाता है, जिस पर लौकी, करेला, तोरई, खीरा, सेम जैसी बेलदार फसलें ऊपर की ओर बढ़ती हैं। इससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, फल जमीन के संपर्क में नहीं आते और रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। परिणामस्वरूप सब्जियां साफ-सुथरी, आकर्षक और बेहतर गुणवत्ता की प्राप्त होती हैं।
कई वर्षों से इस विधि से खेती कर रहे किसानों सच्चिदानन्द, श्रीमती निर्मला, ज्ञानदास तथा गोवर्धन ने बताया कि मचान विधि अपनाने से खेत का बेहतर उपयोग होता है। सिंचाई, निराई-गुड़ाई और तुड़ाई का कार्य भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाता है। साथ ही फल जमीन पर न लगने से उनके सड़ने और खराब होने की संभावना भी काफी कम रहती है।
जिला उद्यान अधिकारी विमल कान्त ने बताया कि किसानों को प्रशिक्षण देकर मचान विधि को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनपद के कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या रहती है, ऐसे में यह तकनीक किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। इस विधि से सब्जियों की उपज में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से इस तकनीक को अपनाने की अपील की।
मचान विधि के प्रमुख लाभ
बेलदार सब्जियों की बेहतर गुणवत्ता।
रोग एवं कीटों का कम प्रकोप।
उत्पादन में 20–25 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना।
सिंचाई, देखभाल और तुड़ाई में सुविधा।
फल जमीन से ऊपर रहने के कारण सड़ने की संभावना कम।
किसानों की आय में वृद्धि।


मचान विधि से तैयार खेत में खड़े किसान, जहां लौकी, तोरई, करेला व अन्य बेलदार सब्जियों की आधुनिक तकनीक से खेती की जा रही है।
टिप्पणी
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती खेती लागत के बीच मचान विधि किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यदि तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक किसानों तक पहुंचे, तो सिद्धार्थनगर जैसे कृषि प्रधान जनपद में सब्जी उत्पादन और किसानों की आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। यह खेती का ऐसा मॉडल है, जो कम जोखिम के साथ बेहतर मुनाफे की दिशा में किसानों को नई राह दिखा रहा है।
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