आशा बहुओं की मांगों पर अब आर-पार की तैयारी! अनिल सिंह बोले—मांगें पूरी नहीं हुईं तो लखनऊ में होगा आंदोलन

मानदेय में वृद्धि, लंबित भुगतान और रात्रि में ठहरने की व्यवस्था की मांग; विकास भवन से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च कर सौंपा ज्ञापन, शासन-प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहें

सिद्धार्थनगर। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाने वाली आशा बहुओं और आशा संगिनियों ने अपनी मांगों को लेकर सिद्धार्थनगर में आवाज बुलंद की। ऑल आशा, आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति के बैनर तले प्रदेश संरक्षक अनिल सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता विकास भवन परिसर में एकत्रित हुईं। यहां से बैनर के साथ पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचीं और नारेबाजी के बीच धरना-प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में आशा संगिनियों का मानदेय 18 हजार रुपये और आशा बहुओं का मानदेय 16 हजार रुपये किए जाने, विभिन्न मदों में लंबित भुगतान का निस्तारण कराने तथा रात में प्रसव संबंधी जरूरतों के दौरान कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए कमरे की व्यवस्था शामिल है। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रेस द्वारा सवाल किए जाने पर प्रदेश संरक्षक अनिल सिंह ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो संगठन लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करेगा। उन्होंने ऐसी स्थिति के लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही।

: मानदेय से लेकर सुविधाओं तक, तीन प्रमुख मांगों पर जोर
आशा बहुओं और आशा संगिनियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में निश्चित मानदेय की व्यवस्था करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन ने आशा संगिनियों के लिए 18 हजार रुपये और आशा बहुओं के लिए 16 हजार रुपये मानदेय निर्धारित करने का अनुरोध किया है। यह संगठन की मांग है; इसे किसी स्वीकृत सरकारी निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ज्ञापन में विभिन्न मदों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने जननी सुरक्षा योजना समेत ज्ञापन में उल्लिखित अन्य मदों से संबंधित वर्ष 2024 के लंबित भुगतान के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है।

इसके अतिरिक्त, रात के समय प्रसव संबंधी जरूरतों के दौरान अस्पताल जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए रात्रि में ठहरने हेतु एक कमरे की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है। संगठन के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं को अपने छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर जाना पड़ सकता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ठहरने की सुविधा की मांग उठाई गई है।

ज्ञापन के बाद आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को नारेबाजी के माध्यम से सामने रखा। पैदल मार्च के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया, ताकि उनकी समस्याएं शासन और प्रशासन तक पहुंच सकें।
ज्ञापन सौंपने के बाद प्रेस के सवाल पर अनिल सिंह ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करेगा। उन्होंने प्रस्तावित आंदोलन की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन पर होने की बात कही।
इस बयान के बाद अब संगठन की आगे की रणनीति और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार लखनऊ में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की तारीख और स्थान की औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें
1. निश्चित मानदेय: आशा संगिनियों का मानदेय 18 हजार रुपये और आशा बहुओं का मानदेय 16 हजार रुपये किए जाने की मांग।
2. लंबित भुगतान: विभिन्न मदों में बकाया भुगतान की समीक्षा और पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार भुगतान कराने का अनुरोध।
3. रात्रि में ठहरने की सुविधा: रात में प्रसव संबंधी जरूरतों के दौरान कार्यकर्ताओं के लिए एक कमरे की व्यवस्था किए जाने की मांग।
अनिल सिंह की भूमिका और संगठन की अगली रणनीति
इस कार्यक्रम में प्रदेश संरक्षक अनिल सिंह ने संगठन के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं को एकजुट करते हुए मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने की पहल की। विकास भवन परिसर से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च और ज्ञापन सौंपने की कार्रवाई के बाद उन्होंने प्रेस के सामने मांगें पूरी नहीं होने पर लखनऊ में आंदोलन करने की बात रखी।
संगठन की ओर से उठाए गए मुद्दों पर अब संबंधित विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। मानदेय निर्धारण, भुगतान की स्थिति और रात्रि में ठहरने की व्यवस्था के संबंध में आधिकारिक निर्णय सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि मांगों पर क्या प्रगति हुई है।
टिप्पणी: मांगों पर संवाद और समाधान जरूरी
आशा बहुओं और आशा संगिनियों की ओर से उठाए गए मुद्दे मानदेय, भुगतान और कार्य के दौरान आवश्यक सुविधाओं से जुड़े हैं। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों द्वारा ज्ञापन में दर्ज मांगों की समीक्षा, लंबित भुगतान की स्थिति की जांच और उपलब्ध नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना उपयोगी होगा।
संगठन ने अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचा दी हैं और समाधान नहीं निकलने पर आगे आंदोलन की चेतावनी दी है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी मांगों पर स्थिति स्पष्ट करें, संगठन के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करें और प्रत्येक मुद्दे पर नियमानुसार उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दें।
सवाल यही है: आशा बहुओं और आशा संगिनियों की इन मांगों पर शासन और संबंधित विभाग क्या निर्णय लेते हैं? इसका जवाब आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई से ही सामने आएगा।
FT News Digital | सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
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