मनरेगा के काम में पारदर्शिता की परीक्षा, ऑनलाइन हाजिरी और जमीनी हकीकत का हो सत्यापन
सिद्धार्थनगर: सरकारी पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति पर उठे सवाल; बढ़नी की सिसवा बुजुर्ग पंचायत में जांच की जरूरत
सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में विकास को गति देना, जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना है। लेकिन जब किसी विकास कार्य की ऑनलाइन हाजिरी और मौके पर काम करने वाले मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति को लेकर सवाल सामने आएं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी हो जाता है।
सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी विकासखंड की सिसवा बुजुर्ग ग्राम पंचायत से जुड़े सरकारी पोर्टल के कुछ स्क्रीनशॉट सामने आए हैं। इनमें एक कार्य का नाम “सिसवा बुजुर्ग में समय माता के स्थान से ज्ञानदास के खेत तक बांध निर्माण कार्य” दर्ज दिखाई देता है। पोर्टल पर कार्य कोड 3151004034/FP/VB/YD/958486255823632836 और मस्टर रोल संख्या 2736 तथा 2740 भी प्रदर्शित हैं।
स्क्रीनशॉट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 और 10 अक्टूबर 2026 की तारीखों के लिए मजदूरों की उपस्थिति का रिकॉर्ड दिखाई देता है। वहीं, इस कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी और काम की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि मौके पर मजदूर मौजूद नहीं थे, जबकि संबंधित तारीख की हाजिरी दर्ज है, तो यह जांच का विषय है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कोई अंतर था या नहीं।
ऑनलाइन हाजिरी से आगे, मौके पर सत्यापन क्यों जरूरी?
सरकारी पोर्टल पर हाजिरी दर्ज होना अपने आप में इस बात का अंतिम प्रमाण नहीं है कि संबंधित समय पर सभी मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद थे और निर्धारित काम हुआ। इसी तरह, किसी एक समय पर मजदूरों का दिखाई न देना भी अपने आप में फर्जी हाजिरी या भ्रष्टाचार का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

ऐसे में संबंधित अधिकारियों को कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। निर्धारित कार्य की प्रगति, माप पुस्तिका, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान विवरण और उपलब्ध डिजिटल फोटो का मिलान किया जाना चाहिए।
जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए
ग्रामीण विकास कार्यों में खर्च होने वाला सरकारी धन जनता के हित से जुड़ा है। इसलिए यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जिस काम के लिए धन स्वीकृत हुआ, वह वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो और मजदूरों को उनके काम के अनुरूप मजदूरी मिले।

यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि रिकॉर्ड और कार्यस्थल की स्थिति में कोई गड़बड़ी नहीं मिलती है, तो तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
जांच के दायरे में ये सवाल
1. क्या सिसवा बुजुर्ग पंचायत में दर्ज बांध निर्माण कार्य मौके पर निर्धारित योजना के अनुसार कराया जा रहा है?
2. 7 और 10 अक्टूबर 2026 की ऑनलाइन हाजिरी के समय कार्यस्थल पर कितने मजदूर वास्तव में मौजूद थे?
3. क्या संबंधित तारीखों की डिजिटल फोटो, उपस्थिति रजिस्टर और मस्टर रोल का मिलान किया गया है?
4. कार्य की स्वीकृत लागत, अब तक का व्यय, माप पुस्तिका और भुगतान की स्थिति क्या है?
5. क्या संबंधित कार्य का स्थल निरीक्षण कर उसकी वास्तविक प्रगति की रिपोर्ट तैयार की गई है?
इन सवालों का जवाब अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सामने आना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति पर आरोप न लगे और यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह भी सामने आ सके।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
संबंधित ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि मामले का संज्ञान लेकर कार्यस्थल का सत्यापन कराएं तथा ऑनलाइन दर्ज हाजिरी और वास्तविक कार्य की स्थिति का मिलान करें। जांच में कोई कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
FT News Digital का पक्ष: यह रिपोर्ट उपलब्ध पोर्टल स्क्रीनशॉट और उनसे जुड़े जनहित के सवालों पर आधारित है। इन स्क्रीनशॉट से अपने आप किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता, फर्जी हाजिरी अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती। संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने पर उन्हें भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
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