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“बाढ़ से पहले तैयारी की परीक्षा: सिद्धार्थनगर में NDRF, पुलिस और प्रशासन ने किया संयुक्त रेस्क्यू अभ्यास”

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सिद्धार्थनगर में बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारी का रियलिटी टेस्ट, NDRF ने दिखाया रेस्क्यू का दम

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सिद्धार्थनगर। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ आपदा को देखते हुए गुरुवार को तहसील बांसी स्थित रानी मोहभक्त लक्ष्मी घाट पर जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों द्वारा संयुक्त रूप से भव्य बाढ़ राहत एवं बचाव मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी एवं इंसिडेंट कमांडर श्री शिवशरणप्पा जीएन के निर्देशन में आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तत्परता और समन्वय की वास्तविक परख करना था।

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मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ की काल्पनिक सूचना मिलते ही जिला कंट्रोल रूम सक्रिय हुआ और लगभग 50 मिनट के भीतर एनडीआरएफ, पुलिस, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रदर्शन किया गया।

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मौके पर पहुंचकर पूरे अभ्यास का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील जनपदों में शामिल है, इसलिए सभी विभागों को हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डूबते व्यक्ति को बचाने का लाइव प्रदर्शन

मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ की टीम ने नदी में डूबे व्यक्ति को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और जीवन रक्षक तकनीकों का प्रदर्शन किया। टीम ने बताया कि डूबे व्यक्ति को बाहर निकालने के बाद किस प्रकार उसके शरीर से पानी निकाला जाता है, पल्स चेक की जाती है और तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

घरेलू सामानों से बनाई गई इम्प्रोवाइज्ड राफ्ट

एनडीआरएफ विशेषज्ञों ने ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को घर में उपलब्ध संसाधनों से अस्थायी नाव (इम्प्रोवाइज्ड राफ्ट) तैयार करने और उसका सुरक्षित उपयोग करने की जानकारी भी दी। इस प्रदर्शन को लोगों ने काफी रुचि के साथ देखा।

राहत शिविर, पेयजल और पशुओं के चारे की भी तैयारी

मॉक ड्रिल के दौरान यह भी प्रदर्शित किया गया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर कैसे संचालित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा सहायता, जल निगम एवं स्थानीय निकायों द्वारा स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तथा पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

सभी विभागों ने निभाई सक्रिय भूमिका

अभ्यास में राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, सिंचाई, नगर निकाय, ग्राम्य विकास, विद्युत विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। आपदा मित्रों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आपदा नियंत्रण कक्ष के नंबर जारी

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।

📞 आपदा कंट्रोल रूम:

05442-97010

05442-97030

 

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