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कृमि मुक्ति अभियान में जल्द एक्सपायर होने वाली दवा की सप्लाई पर सवाल

अगस्त में वितरण, सितंबर में एक्सपायरी—अभिभावकों ने उठाई व्यवस्था की पारदर्शिता और दूरदर्शिता पर चिंताIMG 20260814 WA10681

उसका बाजार, सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाए जाने के बीच दवा की एक्सपायरी डेट को लेकर अभिभावकों में चिंता सामने आई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसका बाजार की ओर से बीआरसी के माध्यम से विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई कुछ एल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट के पैकेट पर सितंबर 2026 की एक्सपायरी अंकित है। ऐसे में अगस्त में अभियान के दौरान दवा की उपलब्धता और उसके बाद बची दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


| क्या है मामला?

बच्चों को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत एल्बेंडाजोल 400 एमजी की टैबलेट दी गई।

उपलब्ध कराई गई दवा के पैकेट पर EXPIRY DATE: SEP 26 अंकित है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जल्द एक्सपायर होने वाले स्टॉक की पहले आपूर्ति करना विभागीय प्रक्रिया के अनुरूप है।

बीईओ उसका के मुताबिक दवा की कम वैधता अवधि के संबंध में सीएचसी अधीक्षक को समय से जानकारी दी गई थी।

अभिभावकों की मांग है कि भविष्य में बच्चों के लिए दवाओं की आपूर्ति में पर्याप्त वैधता अवधि सुनिश्चित की जाए।


अभिभावकों की चिंता क्यों?

 

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अभियान में ऐसी दवा उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिसकी वैधता अवधि पर्याप्त हो। यदि किसी कारण से कोई बच्चा निर्धारित तिथि पर दवा नहीं ले पाता या अभियान में प्रशासनिक कारणों से देरी होती है, तो कम अवधि वाली दवा के इस्तेमाल की गुंजाइश काफी सीमित हो जाती है।

हालांकि, सिर्फ सितंबर 2026 की एक्सपायरी होने के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि अगस्त में दवा असुरक्षित थी। दवा की वैधता निर्माता द्वारा निर्धारित एक्सपायरी तिथि तक रहती है, बशर्ते उसका भंडारण निर्धारित शर्तों के अनुसार हुआ हो और पैकेट सही स्थिति में हो।

विभाग का पक्ष

बीईओ उसका अशोक कुमार सिंह के अनुसार, सीएचसी उसका द्वारा बीआरसी पर दवा उपलब्ध कराई गई थी और दवा की एक्सपायरी डेट करीब होने के संबंध में सीएचसी अधीक्षक को समय से जानकारी दे दी गई थी।

वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके पटेल का कहना है कि विभागीय नियम के अनुसार स्टॉक में उपलब्ध जल्द एक्सपायर होने वाली दवाओं की आपूर्ति पहले की गई। उनके मुताबिक सितंबर में एक्सपायर होने वाली दवा का वर्तमान समय में निर्धारित उपयोग के अनुसार सेवन सुरक्षित है।

LIST | व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल

पहला सवाल यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अभियान के लिए दवाओं की आपूर्ति करते समय पर्याप्त वैधता अवधि वाले स्टॉक को प्राथमिकता देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

पहला सवाल यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अभियान के लिए दवाओं की आपूर्ति करते समय पर्याप्त वैधता अवधि वाले स्टॉक को प्राथमिकता देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

दूसरा सवाल यह कि यदि अभियान किसी प्राकृतिक आपदा, अवकाश या प्रशासनिक कारण से आगे खिसक जाता, तो कम अवधि वाली दवाओं का क्या होता?

तीसरा सवाल यह कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के स्तर पर क्या अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी?

इन सवालों का जवाब किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने से नहीं, बल्कि स्टॉक प्रबंधन और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा से सामने आ सकता है।

सारांश

मामला दवा के तत्काल असुरक्षित होने का नहीं, बल्कि दवा की आपूर्ति, स्टॉक प्रबंधन और पर्याप्त वैधता अवधि सुनिश्चित करने की व्यवस्था का है। स्वास्थ्य विभाग ने दवा को निर्धारित वैधता के भीतर सुरक्षित बताया है, जबकि अभिभावक चाहते हैं कि भविष्य में बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की आपूर्ति पर्याप्त मार्जिन के साथ की जाए।

सामाजिक टिप्पणी | बच्चों की दवा में सावधानी सबसे जरूरी

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी सरकारी योजना का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना होना चाहिए। यहां किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराने से पहले विभागीय प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।

साथ ही, अभिभावकों की चिंता को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग यदि भविष्य की आपूर्ति में पर्याप्त वैधता अवधि वाले स्टॉक को प्राथमिकता देता है और स्कूलों को दवा की एक्सपायरी, भंडारण तथा सेवन संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है, तो ऐसी आशंकाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।


बच्चों की सेहत से जुड़ी दवा में छोटी-सी सावधानी भी बड़ी जिम्मेदारी है।

 

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