सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर की पीएचडी डिग्री पर उठे सवाल, शासन से जांच की मांग
विभागाध्यक्ष की शिकायत में नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग, शासन स्तर पर कार्रवाई का इंतजार
सिद्धार्थनगर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक एसोसिएट प्रोफेसर की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद सामने आया है। मेडिकल कॉलेज के एक विभागाध्यक्ष ने शासन को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि संबंधित शिक्षक की पीएचडी डिग्री और सेवा अवधि के बीच गंभीर विसंगतियां हैं। फिलहाल मामले की सत्यता की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत में प्रमुख बिंदु
एसोसिएट प्रोफेसर की पीएचडी डिग्री पर सवाल।
पूर्णकालिक नौकरी के दौरान पीएचडी करने का आरोप।
प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा को भेजी गई शिकायत।
शासन स्तर पर जांच की मांग।
स्थान : राजकीय मेडिकल कॉलेज, सिद्धार्थनगर
मामला : पीएचडी डिग्री एवं नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता : विभागाध्यक्ष (कम्युनिटी मेडिसिन)
शिकायत भेजी गई : प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश
स्थिति : मामले की जांच अथवा शासन की आधिकारिक कार्रवाई की प्रतीक्षा
विस्तृत समाचार
सिद्धार्थनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर में कार्यरत एक एसोसिएट प्रोफेसर की पीएचडी डिग्री को लेकर नया विवाद सामने आया है। मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष द्वारा प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा को भेजी गई शिकायत में संबंधित शिक्षक की शैक्षणिक योग्यता एवं नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित एसोसिएट प्रोफेसर वर्ष 2013 से 2021 तक राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन में पूर्णकालिक संविदा सेवा में कार्यरत थे। वहीं, इसी अवधि के दौरान वर्ष 2018 से 2021 के बीच उन्होंने इंदौर स्थित एक निजी विश्वविद्यालय से एनाटॉमी विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पीएचडी के लिए विश्वविद्यालय की निर्धारित उपस्थिति एवं अन्य शैक्षणिक मानकों का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। शिकायत में नियुक्ति के समय प्रस्तुत अभिलेखों की भी जांच की मांग की गई है।
मामले में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित विश्वविद्यालय का नाम पूर्व में भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान चर्चा में रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि संबंधित शिक्षक की डिग्री किसी अनियमितता का हिस्सा है। इसका निर्णय केवल सक्षम जांच एजेंसी अथवा शासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही संभव होगा।
फिलहाल शासन अथवा मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर कोई सार्वजनिक आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है। वहीं, संबंधित एसोसिएट प्रोफेसर का पक्ष भी समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन शिकायत की जांच कराता है या नहीं तथा जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
सारांश
सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक एसोसिएट प्रोफेसर की पीएचडी डिग्री और सेवा अवधि को लेकर विभागाध्यक्ष ने शासन से जांच की मांग की है। फिलहाल मामला शिकायत के स्तर पर है। आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया से नहीं हुई है और संबंधित शिक्षक का पक्ष भी अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
संपादकीय सुझाव (कानूनी सुरक्षा): इस खबर के साथ “आरोप”, “शिकायत के अनुसार”, “दावा किया गया है”, “जांच लंबित है” और “संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा” जैसे वाक्यों का उपयोग अवश्य रखें। इससे रिपोर्ट संतुलित रहेगी और मानहानि संबंधी कानूनी जोखिम कम होगा।

