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कपिलवस्तु विधानसभा को बड़ी सौगात: PWD द्वारा 54 सड़कों की मरम्मत को स्वीकृति

सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई गति देते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने क्षेत्र की 54 जर्जर सड़कों के सामान्य मरम्मत कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इस फैसले को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही ने इस स्वीकृति पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति विधानसभा क्षेत्र की जनता की ओर से हृदय से आभार व्यक्त किया है।

ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ

विधायक श्यामधनी राही ने बताया कि इन सड़कों की मरम्मत से ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से

विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने में सुविधा

मरीजों को अस्पताल पहुंचने में राहत

व्यापारिक गतिविधियों में तेजी

किसानों को फसल ढुलाई में सहूलियत

मिलेगी। लंबे समय से जर्जर सड़कों की मरम्मत की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने गंभीरता से पूरा किया है।

इन प्रमुख संपर्क मार्गों को मिली स्वीकृति

स्वीकृत मार्गों में पकड़ी उदयपुर–छोटकी हरैया, हरेपा सात प्राथमिक विद्यालय–तरकुलहा, पीकापार–परसा, बर्डपुर, ककरहवा, नौगढ़, बरगदी चौराहा, सगरहवा, सेमरी, बहोरवा, कंचनिया दक्षिणी, बैजनाथपुर, टुगौरा, कुसम्ही, मधुबनवा, बरोहिया खालसा, काकोरी, केवलपुर, जयपुर संपर्क मार्ग, धोबहा, चौहानडीह, सजनापार, दैजौली, छितरापार, नौखनिया, फुलवरिया, लोधपुरवा, जगदीशपुर खुर्द–डिहवा, अहिरनडीह, बसहिलिया, पिछौरा, कोल्हुआ दाता सहित कुल 54 मार्ग शामिल हैं।

इन मार्गों की मरम्मत से दूरस्थ गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ेंगे।

सरकार गांव–गरीब–किसान को दे रही प्राथमिकता

विधायक राही ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब और किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है। सड़क कनेक्टिविटी मजबूत कर विकास को धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी स्वीकृत मार्गों पर शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू होगा, जिससे आमजन को राहत मिलेगी।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों की बदहाली से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी। मरम्मत कार्य शुरू होने से क्षेत्र में विकास कार्यों को नई रफ्तार मिलेगी और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियां मजबूत होंगी।

धूमधाम से मनी रविदास जयंती

कपिलवस्तु विधानसभा के विकासखंड लोटन अंतर्गत ग्राम सभा हरिगांव में संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती धूमधाम से मनाई गई जिसके मुख्य अतिथि सांसद जगदंबिका पाल रहे। संत रविदास जयंती पर सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि, संत शिरोमणि गुरु रविदास एक महान समाज सुधारक, कवि और ईश्वर के अनन्य भक्त थे उन्होंने समानता, सामाजिक समरसता और मानव जाति की एकता का संदेश दिया उनका एक प्रसिद्ध वाक्य “मन चंगा तो कठौती में गंगा”, उनके द्वारा रचित यह प्रसिद्ध वाक्य मन की पवित्रता को ही सच्ची भक्ति मानता है कार्यक्रम को पूर्व जिला अध्यक्ष लाल जी त्रिपाठी उर्फ लाल बाबा ने भी अपने संबोधन में महान संत रविदास पर अपनी शुभकामनाएं लोगों को दिया तथा कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेंद्र पांडे ने किया इस अवसर पर लालबेनी,चंद्रमणि चौरसिया ,रामकुमार, राजेंद्र सीताराम, डॉक्टर नंदकुमार ,रमेश ,अब्दुल सलाम ,कृष्ण चंद्र सिंह ,मोनी सिंह ,मनोज कुमार ,घनश्याम साहनी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे

पाकिस्तान के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान

अरविंद जयतिलक

(वरिष्ठ पत्रकार)

पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा। लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है। उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं। वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी। इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है। याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।

जिसमें दम है गोली मार के दिखाओ- जानिए कथा के बीच में क्यों ललकारे राजन जी महाराज

गोरखपुर। शहर में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक राजन जी महाराज की श्री राम कथा के दौरान एक विवादित घटना सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज कर दी है। कथा के दौरान राजन जी महाराज की टीम के एक सदस्य को कथित रूप से गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात कही जा रही है। घटना के बाद राजन जी महाराज ने आहत होकर कथा बीच में छोड़ने का मन भी बना लिया था।

बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महाराज मंच से घटना का जिक्र करते हुए दिखाई देते हैं।

हमारे घर में ही हुआ बवाल: राजन जी महाराज 

कथा के दौरान सामने आए वीडियो में राजन जी महाराज कहते हुए सुनाई देते हैं कि:

“गोरखपुर, देवरिया, सीवान हमारा घर है। 16 साल की यात्रा में पहली बार ऐसी घटना हुई है। हमारे घर में भगदड़ जैसी स्थिति बनी। हमारी टीम के लोगों को गोली मारने को कहा गया… किसने मां का दूध पिया है,अगर किसी में हिम्मत है तो गोली मारकर दिखाओ”

उनका कहना था कि मंच पर लोगों की भीड़ चढ़ने की वजह से व्यवस्था बिगड़ी और इसके बाद टीम को मंच पर लोगों को आने से रोकना पड़ा, जिससे विवाद बढ़ गया।

27 जनवरी से 4 फरवरी तक चल रही है 9 दिवसीय राम कथा

गोरखपुर के चम्पा देवी पार्क में राजन जी महाराज की 9 दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन 27 जनवरी से शुरू हुआ है, जिसका समापन 4 फरवरी को प्रस्तावित है।

सूत्रों के अनुसार, कथा के तीसरे दिन यानी 29 जनवरी को आयोजकों के एक पक्ष और कथावाचक की टीम के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में तीखी बहस में बदल गई।

आयोजकों और टीम के बीच कहासुनी, कथित धमकी से बढ़ा मामला

बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा कथावाचक की टीम को गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात कही गई। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

घटना के बाद राजन महाराज ने कथा छोड़कर वापस जाने की इच्छा जताई, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा समझाने के बाद उन्होंने कथा जारी रखने का निर्णय लिया।

भक्तों के सामने भावुक हुए महाराज

अगले दिन कथा के दौरान राजन महाराज ने भावुक स्वर में कहा:

“हम प्रेम से कथा सुनाने आए हैं, उसी प्रेम से सुनिए। 16 साल में पहली बार ऐसी स्थिति आई है।”

उनकी इस बात से पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालु भावुक हो गए।

मुलाकात के नाम पर पैसे लेने वालों को चेतावनी

कथा के दौरान महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि उनसे मिलने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।

उन्होंने कहाकि:

सुनने में आया है कि कोई हमसे मिलवाने के नाम पर 1100 रुपये ले रहा है। ऐसे लोग सावधान हो जाएं। हम देश-विदेश कहीं भी कथा करते हैं, मिलने के लिए कभी पैसा नहीं लेते।”

शहर की छवि पर सवाल

धार्मिक आयोजनों में इस तरह के विवाद को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन शांति और श्रद्धा का संदेश देते हैं, ऐसे में विवाद दुखद है।

प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक किसी प्रशासनिक कार्रवाई या आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। मामला जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

बजट 2026 में उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात: उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और महिलाओं की शिक्षा पर खास फोकस

लखनऊ, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में उत्तर प्रदेश को कई महत्वपूर्ण घोषणाओं के जरिए बड़ी प्राथमिकता दी गई है। औद्योगिक विकास, परिवहन, पारंपरिक उद्योग, महिला शिक्षा और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को प्रदेश के भविष्य की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इन फैसलों से रोजगार, निवेश और बुनियादी सुविधाओं में तेज़ी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

वाराणसी बनेगा मल्टीमॉडल पोर्ट हब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को बजट में विशेष महत्व दिया गया है। गंगा नदी के किनारे आधुनिक मल्टीमॉडल पोर्ट विकसित करने की घोषणा की गई है, जहां जहाजों की मरम्मत, माल परिवहन और जलमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इस परियोजना से इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को मजबूती मिलेगी और व्यापार के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

महात्मा गांधी हैंडलूम योजना से बुनकरों को राहत

पूर्वांचल, खासकर वाराणसी क्षेत्र के बुनकरों को संबल देने के लिए महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है।

यह योजना पारंपरिक हथकरघा उद्योग को आधुनिक बाज़ार से जोड़ने, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधा उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहेगी। इससे कारीगरों की आय बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

यूपी को दो हाईस्पीड रेल कॉरिडोर

देश में प्रस्तावित 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर में से 2 उत्तर प्रदेश को मिलना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

दिल्ली–वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर

वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर

इन परियोजनाओं से यात्रा समय में भारी कमी आएगी और पर्यटन व व्यापार को नया प्रोत्साहन मिलेगा। यूपी का राष्ट्रीय कनेक्टिविटी नेटवर्क और मजबूत होगा।

हर जिले में खुलेगा गर्ल्स हॉस्टल 

महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यूपी के 75 जिलों में एक-एक गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई है।

यह पहल उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाहर जाने वाली छात्राओं को सुरक्षित और सुलभ आवास प्रदान करेगी।

औद्योगिक विकास को 10000 करोड़ का प्रोत्साहन

राज्य में कंटेनर निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

साथ ही सेमीकंडक्टर 2.0 मिशन के तहत नोएडा में सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किया जाएगा। इससे यूपी हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकता है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना बनेगी।

बड़े शहरों और तीर्थ स्थलों का कायाकल्प

5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का प्रावधान किया गया है, जिसमें अयोध्या, गोरखपुर समेत 15 शहर शामिल हैं।

साथ ही छोटे तीर्थ स्थलों के विकास के लिए भी बजट में राशि रखी गई है, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

यूपी के विकास को नई रफ्तार

इन घोषणाओं को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर साफ दिख सकता है।

Union Budget 2026: दवाई, कपड़ा हुआ सस्ता तो शराब हुआ महंगा..जानिए बजट में सस्ती और महंगी चीजों की पूरी लिस्ट

Union Budget 2026-27: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को Union Budget 2026-27 पेश किया। यह उनके मोदी सरकार में लगातार नौवें बजट भाषण के रूप में आया है, जिसमें कस्टम ड्यूटी और टैक्स संबंधी कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

इस बार बजट में खास तौर पर कस्टम ड्यूटी में छूट और कुछ वस्तुओं पर टैक्स सुधार का ऐलान किया गया है, जिसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कौन-सी चीजें सस्ती होंगी और कौन-सी महंगी हो सकती हैं।

बजट में सस्ती होने वाली चीजें

रोजमर्रा के उत्पाद सस्ती होंगे

कपड़े और टेक्सटाइल उत्पाद — कस्टम ड्यूटी में कमी, इससे तैयार कपड़ों पर असर पड़ेगा।

लेदर आइटम (चमड़े के उत्पाद) — कस्टम ड्यूटी घटने से उत्पादों के दाम में राहत मिलने की संभावना।

सिंथेटिक फुटवियर — फुटवियर पर कस्टम ड्यूटी में कटौती।

स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी

कैंसर-शुगर की 17 दवाएं — इन्हें अब ड्यूटी फ्री किया गया है, जिससे उपचार लागत कम हो सकती है।

लिथियम-आयन सेल और मोबाइल बैटरियां — इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा स्टोरेज के लिए जरूरी बैटरियों पर कस्टम ड्यूटी में कमी।

सोलर ग्लास तथा ऊर्जा संबंधी उपकरण — स्वच्छ ऊर्जा पर छूट, जिससे सोलर प्रोजेक्ट सस्ते होंगे।

अन्य सस्ती सेवाएँ

विदेश यात्रा से जुड़े खर्च — कुछ मामलों में टैरिफ/टैक्स में कटौती से महंगे खर्चों पर राहत।

विमानों का ईंधन और संबद्ध उपकरण — कस्टम ड्यूटी में राहत।

इन सभी बदलावों से आयातित सामानों और मैन्युफैक्चर किये जाने वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स पर उपयोगकर्ताओं को सस्ता अनुभव हो सकता है।

बजट में महंगी होने वाली चीजें

वहीं कुछ सेक्टरों में कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं:

महंगी शराब और स्क्रैप

शराब उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ी — शराब पर टैक्स बढ़ने से दुकानों में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।

स्क्रैप और खनिज सामग्री — इन पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है, जिससे उद्योगों में लागत बढ़ सकती है।

लक्ज़री और अन्य महंगे उत्पाद

कुछ विश्लेषकों के अनुसार लक्ज़री घड़ियाँ, हाई-एंड फुटवियर और डिज़ाइनर वस्त्रों पर ड्यूटी वृद्धि से उनकी कीमत में इजाफा संभव है। �

यह महंगाई उन वस्तुओं में दिखाई दे सकती है जो आयात पर अधिक निर्भर रहती हैं।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है — सस्ते इनपुट को बढ़ावा देकर भारत में निर्माण और निर्यात को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जबकि कुछ महंगे सेगमेंट में ड्यूटी बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को बचाया जा रहा है।

Union Budget 2026: दवाई, कपड़ा हुआ सस्ता तो शराब हुआ महंगा..जानिए बजट में सस्ती और महंगी चीजों की पूरी लिस्ट

Union Budget 2026-27: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को Union Budget 2026-27 पेश किया। यह उनके मोदी सरकार में लगातार नौवें बजट भाषण के रूप में आया है, जिसमें कस्टम ड्यूटी और टैक्स संबंधी कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

इस बार बजट में खास तौर पर कस्टम ड्यूटी में छूट और कुछ वस्तुओं पर टैक्स सुधार का ऐलान किया गया है, जिसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कौन-सी चीजें सस्ती होंगी और कौन-सी महंगी हो सकती हैं।

बजट में सस्ती होने वाली चीजें

रोजमर्रा के उत्पाद सस्ती होंगे

कपड़े और टेक्सटाइल उत्पाद — कस्टम ड्यूटी में कमी, इससे तैयार कपड़ों पर असर पड़ेगा।

लेदर आइटम (चमड़े के उत्पाद) — कस्टम ड्यूटी घटने से उत्पादों के दाम में राहत मिलने की संभावना।

सिंथेटिक फुटवियर — फुटवियर पर कस्टम ड्यूटी में कटौती।

स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी

कैंसर-शुगर की 17 दवाएं — इन्हें अब ड्यूटी फ्री किया गया है, जिससे उपचार लागत कम हो सकती है।

लिथियम-आयन सेल और मोबाइल बैटरियां — इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा स्टोरेज के लिए जरूरी बैटरियों पर कस्टम ड्यूटी में कमी।

सोलर ग्लास तथा ऊर्जा संबंधी उपकरण — स्वच्छ ऊर्जा पर छूट, जिससे सोलर प्रोजेक्ट सस्ते होंगे।

अन्य सस्ती सेवाएँ

विदेश यात्रा से जुड़े खर्च — कुछ मामलों में टैरिफ/टैक्स में कटौती से महंगे खर्चों पर राहत।

विमानों का ईंधन और संबद्ध उपकरण — कस्टम ड्यूटी में राहत।

इन सभी बदलावों से आयातित सामानों और मैन्युफैक्चर किये जाने वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स पर उपयोगकर्ताओं को सस्ता अनुभव हो सकता है।

बजट में महंगी होने वाली चीजें

वहीं कुछ सेक्टरों में कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं:

महंगी शराब और स्क्रैप

शराब उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ी — शराब पर टैक्स बढ़ने से दुकानों में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।

स्क्रैप और खनिज सामग्री — इन पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है, जिससे उद्योगों में लागत बढ़ सकती है।

लक्ज़री और अन्य महंगे उत्पाद

कुछ विश्लेषकों के अनुसार लक्ज़री घड़ियाँ, हाई-एंड फुटवियर और डिज़ाइनर वस्त्रों पर ड्यूटी वृद्धि से उनकी कीमत में इजाफा संभव है। �

यह महंगाई उन वस्तुओं में दिखाई दे सकती है जो आयात पर अधिक निर्भर रहती हैं।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है — सस्ते इनपुट को बढ़ावा देकर भारत में निर्माण और निर्यात को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जबकि कुछ महंगे सेगमेंट में ड्यूटी बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को बचाया जा रहा है।

सिद्धार्थनगर में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का दर्शन, Brij Lal IPS हुए भावुक

सिद्धार्थनगर:
31 जनवरी 2026 को राय पिथौरा फोर्ट स्थित नेशनल म्यूजियम में जनपद के लिए एक गौरवपूर्ण और आध्यात्मिक पल देखने को मिला। पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान सांसद Brij Lal IPS (Retd) ने अपनी पत्नी सरोज जी के साथ भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का दर्शन किया।
इस म्यूजियम में प्रदर्शित वस्तुओं में सबसे बड़ा आकर्षण पिपरहवा (कपिलवस्तु) स्तूप से प्राप्त भगवान बुद्ध के अवशेष और रत्न हैं। पिपरहवा स्तूप की पहली खुदाई 1898 में विलियम क्लस्ट्रेन पे पे (पी पी साहब) ने की थी, और उस समय का एक हिस्सा विदेश ले जाया गया था। इसे उनकी तीसरी पीढ़ी 7 मई 2025 को हांगकांग में नीलाम करने जा रही थी।
Brij Lal IPS ने 5 मई 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नीलामी रोकने और रेलिक्स को भारत वापस लाने का आग्रह किया। इस प्रयास को उन्होंने अपनी पुस्तक “मेरा जीवन संघर्ष” में भी शामिल किया है। प्रधानमंत्री ने 13 मई 2025 को हस्ताक्षरित पत्र के माध्यम से उनके प्रयास की सराहना की थी। इस खबर को Times of India ने भी प्रकाशित किया था।
इसके बाद, 1972 में डॉ. के एम. श्रीवास्तव के नेतृत्व में दूसरी खुदाई हुई, जिसमें प्राप्त रेलिक्स आज म्यूजियम में प्रदर्शित हैं। Brij Lal IPS ने कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का दर्शन कर वे अत्यंत भावुक और अभिभूत हैं।
विलियम पे पे द्वारा निकाले गए पवित्र अवशेषों का विस्तृत विवरण Brij Lal IPS अगले दिन, 1 फरवरी 2026, को साझा करेंगे।
ॐ नमो बुद्धाय! बुद्धम शरणम् गच्छामी।

सिद्धार्थनगर महोत्सव में गूंजी उन्नत खेती और.. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही रहे मौजूद आत्मनिर्भर कृषि की आवाज

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर महोत्सव 2026 के चौथे दिन आयोजित रबी किसान मेला कृषि उन्नयन, नवाचार और किसान सशक्तिकरण का बड़ा मंच बना। कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने किसानों में उत्साह भर दिया।

कृषि मंत्री का भव्य स्वागत

रबी किसान मेले के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही उपस्थित रहे। उनके साथ सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान, नगर पालिका अध्यक्ष गोविन्द माधव, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन., सीडीओ बलराम सिंह, सीएमओ डॉ. रजत कुमार चौरसिया सहित कई अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मंत्री जी का बुके देकर स्वागत किया गया।

किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़”— कृषि मंत्री

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि गौतम बुद्ध की धरती से शांति और करुणा का संदेश पूरी दुनिया में गया है, और आज यही धरती कृषि प्रगति की मिसाल बन रही है। उन्होंने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था 11वें से दूसरे पायदान तक पहुंची

यूपी बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकला

कोरोना काल में किसानों ने अर्थव्यवस्था संभाली उन्नत तकनीक व वैज्ञानिक खेती अपनाना जरूरी उन्होंने कहा कि कालानमक चावल ओडीओपी में शामिल होने के बाद इसकी खेती 24,000 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। जिले में 19 एफपीओ सक्रिय हैं।

किसानों के लिए बड़े निर्देश

मंत्री ने जिलाधिकारी को शोहरतगढ़/बर्डपुर में दूसरी कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर के लिए भूमि चिन्हित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने बताया: 9.5 लाख कुंतल गेहूं बीज 50% अनुदान पर दिया गया। यूपी देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य बना। 2.60 लाख किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ। किसान फार्मर रजिस्ट्री जरूर कराएं।

दलहन–तिलहन और जैविक खेती पर जोर

मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे केवल धान-गेहूं तक सीमित न रहें, बल्कि दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद के उपयोग पर बल दिया गया।

सांसद जगदम्बिका पाल ने बताया कालानमक का गौरव

सांसद ने कहा कि कालानमक चावल जो विलुप्ति के कगार पर था, आज अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि:

पहले 2,000 हेक्टेयर में खेती, अब 18,000+ हेक्टेयर। 27 देशों के साथ समझौते से निर्यात आसान। सिद्धार्थनगर की पहचान अब कालानमक, मत्स्य और मखाना से

विधायक और भाजपा जिलाध्यक्ष का संबोधन

विधायक श्यामधनी राही ने कृषि यंत्रों पर अनुदान और किसान सम्मान निधि को किसानों के लिए वरदान बताया। जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान ने किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक किया।

स्टॉल भ्रमण और नवाचार

मंत्री जी ने सांसद व विधायक के साथ कालानमक चावल के स्टॉल का निरीक्षण किया। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में मखाना खेती व शोध कार्य का भी अवलोकन किया गया।

आशा संगिनियों और किसानों का सम्मान

तीन आशा संगिनियों को बेहतर कार्य के लिए सांकेतिक चेक व प्रशस्ति पत्र दिए गए। प्रगतिशील किसानों और स्टॉल लगाने वालों को भी सम्मानित किया गया।

प्रशासन की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट

कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी सहित जिला प्रशासन ने कृषि मंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

उपस्थित रहे अधिकारी

संयुक्त कृषि निदेशक, उप कृषि निदेशक राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, उपायुक्त उद्योग उदय प्रकाश सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

साध्वी प्रेम बाइसा मौत मामला: नौ सदस्यीय SIT की गहन जांच, इंजेक्शन और सोशल मीडिया विवाद पर उठे सवाल

विशेष रिपोर्ट: साध्वी प्रेम बाइसा मौत मामला – शुरुआत से आज तक का पूरा सच

जोधपुर / राजस्थान: नौ सदस्यीय SIT हर पहलू की गहन जांच कर रही है; पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही खुलेगा असली सच

घटना की पूरी कहानी — शुरुआत से अब तक
जोधपुर, राजस्थान –
23 वर्षीय साध्वी प्रेम बाइसा, जोधपुर के पारेऊ गांव की कथावाचिका और आध्यात्मिक वक्ता, की मौत 28 जनवरी 2026 को आश्रम में हुई।
शुरुआत में मौत स्वाभाविक स्वास्थ्य कारणों से मानी गई, लेकिन परिवार और अनुयायियों के संदेह के चलते मामला संदिग्ध बन गया।
साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ी और कई इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित किया गया। परिवार के सदस्यों ने शुरुआती दिनों में पोस्टमार्टम पर रोक लगाई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
घटना के शुरुआती चरण से ही सवाल उठने लगे कि क्या मौत स्वाभाविक थी या कोई बाहरी कारण मौजूद था।

SIT की जांच – पूरा अपडेट
राजस्थान सरकार ने मामला गंभीरता से लेते हुए 9 सदस्यीय SIT गठित की। टीम का नेतृत्व एसीपी छवि शर्मा कर रही हैं।
जांच के मुख्य बिंदु
परिवार और आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ
इंजेक्शन और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक/विसरा रिपोर्ट की पड़ताल
सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल रिकॉर्ड की पुष्टि
SIT ने अब तक जांच में पाया कि इंजेक्शन के बाद अचानक स्वास्थ्य बिगड़ना, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अस्पष्टता, और पिता के व्यवहार ने मामले को और जटिल बना दिया।

पहले उठे सवाल और आज तक का एंगल
मौत स्वाभाविक थी या किसी बाहरी वजह से हुई?
इंजेक्शन/चिकित्सा प्रक्रिया का क्या प्रभाव था?
आश्रम और अस्पताल के दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड सही हैं या नहीं?
पिता और परिवार के बयान कितना सुसंगत हैं?
सोशल मीडिया पोस्ट और पुराने ब्लैकमेल विवाद का क्या असर था?
SIT इन सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और कोई निष्कर्ष अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया।

इंसाफ़ और कानूनी सुरक्षा
अभी तक कोर्ट या पुलिस ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है।
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट ही तय करेगी कि मौत स्वाभाविक थी या अनप्राकृतिक।
खबर पूरी तरह सत्यापित और निष्पक्ष स्रोतों पर आधारित है।
भाषा और प्रस्तुति कानूनी जोखिम से सुरक्षित रखी गई है।
किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना अभी असमय होगा।

आज तक का सारांश
घटना: 28 जनवरी 2026, साध्वी प्रेम बाइसा की मौत
प्रारंभिक विवाद: पोस्टमार्टम और पिता का व्यवहार
SIT जांच: 9 सदस्यीय टीम, पूछताछ और फॉरेंसिक जाँच
इंजेक्शन और स्वास्थ्य एंगल
सोशल मीडिया और ब्लैकमेलिंग विवाद
आज तक: जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

निष्कर्ष
साध्वी प्रेम बाइसा की मौत सिर्फ़ व्यक्तिगत दुखद घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही, न्याय और समाज की सुरक्षा से जुड़ा मामला बन गया है।
SIT की जांच अभी जारी है और पोस्टमार्टम/फोरेंसिक रिपोर्ट निर्णायक होंगी।
इस खबर का धारदार हेडिंग बनाकर के दिन