फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
“सिद्धार्थनगर में सड़कों पर उतरी महिलाओं का आक्रोश—आरक्षण की मांग को लेकर पुतला दहन, व्यवस्था को खुली चेतावनी”

मोहन चौराहे पर सैकड़ों महिलाओं का प्रदर्शन, ‘हक और हिस्सेदारी’ को लेकर तेज हुआ आंदोलन

Screenshot 20260430 162152


सिद्धार्थनगर जनपद के नौगढ़ क्षेत्र अंतर्गत मुहाना थाना इलाके के मोहन चौराहे पर सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। महिलाओं ने अपने अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग को लेकर नारेबाजी की और प्रतीकात्मक पुतला दहन कर अपना आक्रोश जताया।

मौके पर मौजूद दृश्य यह साफ संकेत दे रहा था कि यह प्रदर्शन केवल औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही मांगों के प्रति बढ़ती बेचैनी और असंतोष का परिणाम है।

नेतृत्व और भागीदारी

इस आंदोलन की अगुवाई

ब्लॉक प्रमुख रेनू मिश्रा,

महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष अरुण मिश्रा,

और नगर अध्यक्ष गायत्री मिश्रा ने की।

वहीं प्रदर्शन में शामिल प्रमुख महिलाओं में

किरन देवी, नीमा देवी, सूरजमती देवी, अनीता देवी, तारामती, सरोज देवी, उर्मिला देवी, मीना देवी, कमलावती देवी, सुभावती देवी, रामवती देवी, कलावती देवी, सुनीता, सुमन, गुड़िया, संगीता देवी, रंजन मौर्य, निरमा देवी, सत्यभामा, नेमा देवी, सुशीला देवी, रिंकी, रीता पांडे, बबीता देवी, पूनम देवी

की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम में

ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राजेश मिश्रा,

अजय गुप्ता,

मंडल महामंत्री वीरेंद्र कुमार,

और मंडल मंत्री करीम खान भी मौजूद रहे।

विरोध का तरीका और संदेश

महिलाओं ने सड़क पर उतरकर:

जोरदार नारेबाजी की

पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया

एकजुटता के साथ अपनी मांगों को रखा

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर उनकी मांगों को जल्द नहीं माना गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

महिला आरक्षण बिल—मुद्दे की जड़

जिस मुद्दे को लेकर यह प्रदर्शन हुआ, वह है महिला आरक्षण बिल।

बिल का उद्देश्य:

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना

महिलाओं को नीति निर्माण में भागीदारी देना

राजनीतिक क्षेत्र में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना

आक्रोश क्यों?

प्रदर्शनकारियों के अनुसार:

बिल के बावजूद जमीनी स्तर पर लागू करने में देरी

महिलाओं को तत्काल राजनीतिक अवसर नहीं मिल पा रहे

केवल घोषणा नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन की जरूरत

प्रशासनिक स्थिति

राहत की बात यह रही कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही। प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न हुआ और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।


सिद्धार्थनगर की सड़कों पर उतरी यह भीड़ अब एक साफ संदेश दे रही है—

महिलाएं अब केवल दर्शक नहीं, निर्णायक भूमिका चाहती हैं।

अगर उनकी आवाज अनसुनी रही, तो यह आंदोलन और तेज और व्यापक हो सकता है।

 

Views: 226

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: कोई भी कंटेंट कॉपी न करें, नहीं तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।