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घरों की रसोई सूनी, बाजारों में जल रहे घरेलू सिलेंडर!

मोहाना क्षेत्र में घरेलू गैस के कथित व्यावसायिक उपयोग पर उठे सवाल, जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर भी चर्चा तेज


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सिद्धार्थनगर | FT News Digital
एक ओर सरकार आम लोगों तक रसोई गैस की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सिद्धार्थनगर के मोहाना थाना क्षेत्र में बाजारों और सड़क किनारे लगने वाले फास्ट फूड ठेलों पर घरेलू गैस सिलेंडरों के कथित व्यावसायिक उपयोग को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता दिखाई दे रहा है।
चाट, चाउमीन, बर्गर और अन्य फास्ट फूड बेचने वाले कई ठेलों पर घरेलू गैस सिलेंडर खुलेआम उपयोग होते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले व्यवसायिक कार्यों के लिए कमर्शियल सिलेंडरों का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब लागत बचाने और अधिक मुनाफे के लालच में घरेलू सिलेंडरों का उपयोग बढ़ता जा रहा है।
लोगों का सवाल है कि जब घरेलू गैस सिलेंडर बड़े पैमाने पर बाजारों और ठेलों तक पहुंच रहे हैं, तो आखिर आम परिवारों की रसोई तक गैस समय पर कैसे पहुंचेगी? क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि कई बार सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ता है, जबकि बाजारों में घरेलू गैस धड़ल्ले से जलती दिखाई देती है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि घरेलू गैस के कथित अवैध व्यावसायिक उपयोग के पीछे कहीं न कहीं कालाबाजारी और नियमों की अनदेखी का खेल भी हो सकता है। लोगों का कहना है कि यदि गैस वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहा है। आखिर सड़क किनारे खुलेआम घरेलू सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की नजर अब तक इस ओर क्यों नहीं गई? क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, या फिर जांच और कार्रवाई में कहीं ढिलाई बरती जा रही है?
सुरक्षा के लिहाज से भी यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों के गैस सिलेंडरों का उपयोग किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो भविष्य में कोई बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन, पूर्ति विभाग और संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि घरेलू गैस के कथित व्यावसायिक उपयोग और संभावित कालाबाजारी की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि आम परिवारों की रसोई, सुरक्षा और जनहित से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

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