दो-तीन दिनों से घायल हालत में तड़प रहा बेजुबान बंदर, सूचना के बाद भी नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम; स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्थान: सेठ रामचंद्र साइकिल स्टोर, नगर पालिका परिषद क्षेत्र, सिद्धार्थनगर
मामला: घायल एवं अस्वस्थ बंदर
⏳ स्थिति: पिछले 2–3 दिनों से मौके पर पड़ा होने का स्थानीय लोगों का दावा
स्थानीय प्रयास: नागरिक भोजन, पानी और देखभाल कर रहे हैं
दावा: संबंधित विभाग को सूचना देने के बावजूद रेस्क्यू नहीं होने की बात
सिद्धार्थनगर नगर पालिका परिषद क्षेत्र स्थित सेठ रामचंद्र साइकिल स्टोर के पास एक घायल बंदर पिछले दो-तीन दिनों से अस्वस्थ अवस्था में पड़ा होने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने संबंधित विभाग को इसकी सूचना भी दी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची। फिलहाल आसपास के नागरिक ही मानवता का परिचय देते हुए बेजुबान जानवर की देखभाल कर रहे हैं।
विस्तृत समाचार
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका परिषद क्षेत्र में सेठ रामचंद्र साइकिल स्टोर के पास एक घायल बंदर पिछले दो-तीन दिनों से अस्वस्थ अवस्था में पड़ा हुआ है। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार बंदर काफी कमजोर दिखाई दे रहा है और स्वयं उठने-बैठने की स्थिति में भी नहीं है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि उन्होंने संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि सूचना के बावजूद समाचार लिखे जाने तक कोई रेस्क्यू टीम या उपचार दल मौके पर नहीं पहुंचा।
इस बीच आसपास के दुकानदार और नागरिक अपनी ओर से बंदर को भोजन और पानी उपलब्ध कराकर उसकी देखभाल करने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते चिकित्सकीय सहायता और रेस्क्यू नहीं मिला तो बेजुबान जानवर की जान को खतरा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग, पशुपालन विभाग तथा जिला प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर घायल बंदर का चिकित्सकीय परीक्षण, उपचार और सुरक्षित स्थान पर रेस्क्यू कराए जाने की मांग की है।
📋 सारांश
सेठ रामचंद्र साइकिल स्टोर के पास घायल बंदर पड़ा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार वह पिछले 2–3 दिनों से अस्वस्थ है।
नागरिक भोजन-पानी देकर उसकी देखभाल कर रहे हैं।
सूचना देने के बावजूद विभागीय टीम के न पहुंचने का स्थानीय लोगों का दावा।
वन विभाग और प्रशासन से तत्काल रेस्क्यू व उपचार की मांग।
जनहित में टिप्पणी
बेजुबान वन्यजीव भी प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। यदि कोई घायल वन्यजीव दिखाई दे तो उसका उपचार और रेस्क्यू प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर मौके पर टीम भेजें, घायल बंदर का चिकित्सकीय उपचार कराएं और आवश्यकता होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करें। इससे न केवल एक बेजुबान जीव का जीवन बचाया जा सकेगा, बल्कि आमजन का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।
यह समाचार मौके पर उपलब्ध तस्वीरों तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। समाचार में विभाग के प्रति कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। समाचार का उद्देश्य केवल जनहित में प्रशासन का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करना है।
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