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निषाद समाज के सम्मान की आवाज तेज, कथित गाली-गलौज के विरोध में कोतवाली पहुंचा समाज

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सिद्धार्थनगर। न्यूज चैनल पर मछली भोज को लेकर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता एवं निषाद समाज से जुड़े एक व्यक्ति के खिलाफ अयोध्या के एक महंत द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा और गाली-गलौज किए जाने के आरोप को लेकर निषाद समाज में आक्रोश सामने आया है। मामले को लेकर समाज के लोगों ने विधायक की अगुवाई में उसका बाजार कोतवाली पहुंचकर लिखित तहरीर सौंपते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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 क्या है पूरा मामला?

न्यूज चैनल पर मछली भोज को लेकर चर्चा के दौरान कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप।

निषाद समाज से जुड़े व्यक्ति को कथित रूप से अपमानित किए जाने का दावा।

मामले के विरोध में बड़ी संख्या में समाज के लोग कोतवाली पहुंचे।

थाना उसका बाजार में लिखित प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की गई।

तहरीर में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग का उल्लेख है।

शिकायतकर्ताओं ने कहा कि न्याय नहीं मिलने पर पुलिस अधीक्षक के समक्ष भी मामला रखा जाएगा।

महत्वपूर्ण: उपलब्ध दस्तावेज तहरीर/शिकायत है; इससे अपने आप मुकदमा दर्ज होना या आरोप सिद्ध होना साबित नहीं होता।

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निषाद समाज के सम्मान और कथित अपमान के मुद्दे पर सिद्धार्थनगर में आवाज तेज होती दिखाई दे रही है। गुरुवार को बड़ी संख्या में निषाद समाज के लोग उसका बाजार कोतवाली पहुंचे और कथित गाली-गलौज के मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को प्रार्थना पत्र सौंपा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि न्यूज चैनल पर मछली भोज से संबंधित चर्चा के दौरान निषाद समाज से जुड़े कांग्रेस प्रवक्ता के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। समाज ने इसे सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

पूरी खबर

मामला उस समय तूल पकड़ता दिखाई दिया जब न्यूज चैनल पर मछली भोज को लेकर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता एवं निषाद समाज से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ अयोध्या के एक महंत द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज किए जाने की बात सामने आई।

इसी आरोप को लेकर निषाद समाज के लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। समाज के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में लोगों ने विधायक की अगुवाई में थाना उसका बाजार पहुंचकर पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा।

प्रार्थना पत्र में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि किसी व्यक्ति या समाज का सार्वजनिक रूप से अपमान अथवा अभद्र भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

इस दौरान विनोद कुमार सहानी, लौकुश साहनी, अशोक कुमार, बृजभान यादव, सुनील यादव पहलवान, जुनैद आलम, गोविंद साहनी, गोधन साहनी, बीरबल साहनी, मनोज सहानी, पप्पू सहानी, राजकुमार सहानी और रामेश्वर सहानी समेत अन्य लोगों के नाम शिकायतकर्ताओं/समर्थकों के रूप में सामने आए हैं।

समाज की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति या किसी धर्म के विरुद्ध नहीं है, बल्कि कथित अपमान के मामले में सम्मान, निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो वे पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपनी शिकायत लेकर जाएंगे और नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।

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दस्तावेज क्या बताता है?

27 अगस्त 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र में थाना अध्यक्ष, उसका बाजार को संबोधित करते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में कथित गाली-गलौज को लेकर कार्रवाई के साथ सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मांग का भी उल्लेख है।

हालांकि, प्रार्थना पत्र दिया जाना और आरोप लगाया जाना जांच की शुरुआत है, आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं। मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं।

टिप्पणी | सम्मान की लड़ाई, लेकिन रास्ता संविधान का

किसी भी समाज की गरिमा और सम्मान महत्वपूर्ण है। यदि किसी सार्वजनिक मंच पर किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ वास्तव में अपमानजनक अथवा आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आरोप को फैसला न बनाया जाए। शिकायतकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और जिस व्यक्ति पर आरोप लगाए गए हैं, उसे भी अपना पक्ष रखने तथा निष्पक्ष जांच का अधिकार है।

निषाद समाज की ओर से सामने आया संदेश भी यही है कि विरोध संवैधानिक और कानूनी तरीके से किया जाएगा। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत है—आवाज बुलंद हो, लेकिन कानून की सीमा के भीतर।

रिपोर्टर एवं चैनल के लिए कानूनी सावधानी

यह समाचार उपलब्ध प्रार्थना पत्र, उसमें लगाए गए आरोपों और शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट में किसी आरोप को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा। एफआईआर दर्ज होने, गिरफ्तारी या आरोप सिद्ध होने की बात तभी लिखी जानी चाहिए जब उसका आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध हो।

निषाद समाज का संदेश:

“सम्मान से समझौता नहीं, न्याय की लड़ाई संविधान के रास्ते।”

 

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