मंगलवार को सिद्धार्थनगर में भक्ति का महासंगम, सुंदरकांड-महा रुद्राभिषेक के बाद प्रभु की इच्छा तक चला भंडारा

सुंदरकांड की भक्ति, महादेव का रुद्राभिषेक और फिर अन्नसेवा—प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग परिसर में मंगलवार का दिन श्रद्धा, सेवा और सनातन परंपरा के रंग में रंगा नजर आया। पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ भंडारा प्रभु की इच्छा तक चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
सिद्धार्थनगर। मंगलवार के पावन अवसर पर प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, सिद्धार्थनगर में सुंदरकांड पाठ एवं महा रुद्राभिषेक का धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के बीच संपन्न हुआ। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। देखते ही देखते आयोजन स्थल सेवा और प्रसाद वितरण का केंद्र बन गया तथा बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
सारांश
पूजा स्थल को पुष्पों और धार्मिक सजावट से आकर्षक रूप दिया गया था। सुंदरकांड पाठ, हवन-पूजन और महा रुद्राभिषेक में कर्मचारियों एवं उपस्थित लोगों ने सहभागिता की। धार्मिक अनुष्ठान के बाद भंडारे की सेवा शुरू हुई, जो आयोजकों की भावना के अनुसार प्रभु की इच्छा तक चलती रही। आयोजन में विभागीय कर्मचारियों के साथ अन्य सम्मानित ठेकेदारों और लोगों की भी सहभागिता रही।
भक्ति से सेवा तक पहुंची आस्था
मंगलवार को जब सुंदरकांड की पवित्र वाणी से वातावरण गूंजा और महादेव के रुद्राभिषेक में श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ सहभागिता की, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।
जय श्रीराम…
हर हर महादेव…
जय बजरंगबली…
के जयघोष के बीच पूजा-अर्चना और हवन का क्रम संपन्न हुआ।
धार्मिक अनुष्ठान के बाद आयोजन का स्वरूप सेवा में बदल गया। भंडारे में लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया। यहां भक्ति के साथ अन्नसेवा और सामूहिक सहभागिता का भाव भी दिखाई दिया।
कर्मचारियों और अन्य लोगों की रही सहभागिता
आयोजन में अधिशासी अभियंता कमल किशोर के साथ मनीष सिंह, नीरज पांडे, आरके मौर्य, वीरेंद्र कुमार, अनुराग यादव, अश्वनी गुप्ता, सोहन गुप्ता, यादवेंद्र यादव, गोपीचंद सिंह, विश्वास यादव, विनोद कुमार, ज्ञानेश्वर पांडे, सौरभ श्रीवास्तव, आदित्य श्रीवास्तव, चंद्रिका प्रसाद, सुधा, प्रेमशिला, आनंद मिश्रा, जलालुद्दीन, अवधेश मिश्रा, सिद्धार्थ सिंह, सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी, बृजेश दुबे, संतोष पोद्दार, अजीत सिंह, विकास सिंह, सत्य प्रकाश मिश्रा और राहुल दुबे सहित अन्य सम्मानित ठेकेदार एवं उपस्थित लोगों की सहभागिता रही।
सनातन परंपरा में सेवा का संदेश
भारतीय धार्मिक परंपरा में पूजा-अर्चना के साथ सेवा और अन्नदान को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। इस आयोजन में भी धार्मिक अनुष्ठान के बाद लोगों के बीच प्रसाद वितरण इसी सेवा भावना का हिस्सा रहा।
यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति से सेवा तक पहुंचती उस भावना की तस्वीर बना, जिसमें पूजा के बाद प्रसाद सबके लिए और सेवा सबके लिए दिखाई दी।
FT News Digital की टिप्पणी
आस्था जब मन में उतरती है तो उसका सबसे सुंदर रूप सेवा में दिखाई देता है।
मंगलवार के पावन दिन सुंदरकांड की भक्ति, महादेव के रुद्राभिषेक की श्रद्धा और उसके बाद भंडारे की अन्नसेवा—इन दृश्यों ने एक ऐसा वातावरण बनाया, जहां धार्मिक आस्था के साथ लोगों की सहभागिता भी दिखाई दी।
सनातन परंपरा की खूबसूरती यही है कि आराधना के साथ सेवा और प्रसाद के साथ अपनत्व का भाव जुड़ा रहता है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सेवा की भावना से जोड़ने की प्रेरणा दे सकते हैं।
भक्ति हो तो श्रीराम की…
श्रद्धा हो तो महादेव की…
शक्ति हो तो बजरंगबली की…
और भावना हो तो सेवा की।
जय श्रीराम।
हर हर महादेव।
जय बजरंगबली।
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