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संस्कार भारती की बाल गोकुलम एवं कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

 

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नन्हे-मुन्नों ने कृष्ण-राधा के मनमोहक रूप में सजकर मोहा मन, संस्कार और आध्यात्म से जोड़ने का दिया संदेश

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सिद्धार्थनगर। संस्कार भारती सिद्धार्थनगर इकाई की ओर से आयोजित बाल गोकुलम एवं कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में नगर के विभिन्न मोहल्लों से आए बच्चों ने कृष्ण और राधा के मनमोहक रूप में सज-धजकर उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। नन्हे बच्चों की आकर्षक वेशभूषा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।


भारतीय संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से बच्चों को जोड़ने की दिशा में संस्कार भारती सिद्धार्थनगर इकाई का बाल गोकुलम एवं कृष्ण रूप सज्जा कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा। अलग-अलग मोहल्लों से पहुंचे बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रूप में सजकर प्रतियोगिता में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के उत्साह के साथ अभिभावकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला।

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कार्यक्रम में पीयूष कुमार गुप्ता, आराध्या यादव, लावण्या सोनी, शौर्य राज, वैष्णवी, दिव्यांश, वेदांश, शाश्वत, देवांश, पर्व, आस्विक, वेदांत, अभिनव, राघव मिश्रा, सोना, युवराज, परिधि, अभिषेक, अनुष्का, प्रतिज्ञा, श्रेयांश, निष्ठा, दीपांशु सहित अन्य बच्चों ने कृष्ण एवं राधा के रूप में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का संचालन धीरज गुप्ता ने किया।


संस्कृति से संस्कार तक


बाल गोकुलम का उद्देश्य केवल बच्चों को धार्मिक पात्रों के रूप में सजाना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराना भी रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में संस्कारों की भूमिका पर जोर दिया।


मुख्य अतिथि ने बढ़ाया उत्साह


कार्यक्रम में संस्कार भारती के प्रांत उपाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों की प्रतिभागिता और कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।


वरिष्ठ पत्रकार संतोष श्रीवास्तव ने की आयोजन की सराहना


कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार संतोष श्रीवास्तव ने संस्कार भारती की गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को संस्कार, आध्यात्म और भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ ही समाज में सकारात्मक एवं अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में प्रेरित करते हैं।


अध्यक्ष ने संस्कार शिक्षा पर दिया जोर


संस्कार भारती के अध्यक्ष पवन कुमार जायसवाल ने बच्चों की संस्कार शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि माताओं को अपने बच्चों में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े नीतिवान, गुणवान, धैर्यवान और साहसी व्यक्तित्व के गुण विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।


बड़े स्वरूप में आयोजन का संकल्प


कार्यक्रम के सफल आयोजन से उत्साहित संस्कार भारती के महामंत्री गोविंद ओझा ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में बाल गोकुलम कार्यक्रम को और बड़े स्वरूप में आयोजित करने की बात कही।


कोषाध्यक्ष ने बच्चों को दिया संस्कार का संदेश


संस्कार भारती के कोषाध्यक्ष राम शरण ने बच्चों को संस्कारवान और नीतिमान बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संस्कार भारती बच्चों को संस्कार, आध्यात्म और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में निरंतर अपना योगदान दे रही है।


समापन पर जताया आभार


कार्यक्रम के अंत में शंभू गुप्ता ने आयोजन में शामिल सभी पदाधिकारियों, अतिथियों, अभिभावकों और बच्चों को बधाई दी तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए समापन की घोषणा की।


आयोजन में ये रहे मौजूद


कार्यक्रम में राणा प्रताप सिंह, संतोष श्रीवास्तव, गोविंद ओझा, आशीष त्रिपाठी, नितेश पांडे, रामशरण, मनोज भगवान, पत्रकार मालती देवी, सरिता पांडे, शुभम श्रीवास्तव, राजकमल जायसवाल, प्रदीप वर्मा, धीरेंद्र वर्मा, पंकज सिद्धार्थ, आशुतोष वर्मा, अभिषेक वर्मा, योगेश यादव, कल्पना त्रिपाठी, प्रतिभा जायसवाल, अनुराधा, रिचा, कमलेश, सनाया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


सारांश


बाल गोकुलम एवं कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता ने बच्चों की प्रतिभा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों की खूबसूरत झलक प्रस्तुत की। कृष्ण-राधा के रूप में सजे नन्हे प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया, वहीं वक्ताओं ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में संस्कार, आध्यात्म और नैतिक मूल्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।


टिप्पणी


बच्चों के बीच भारतीय संस्कृति और संस्कारों को सहज एवं रचनात्मक तरीके से पहुंचाने वाले ऐसे आयोजन केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहते। इनके माध्यम से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने, मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने और सामाजिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। संस्कार भारती का यह आयोजन इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया।

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