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बाढ़ की त्रासदी के बीच नाव पर सवार होकर संगलदीप पहुंचे CDO, गांव का लिया जायजा

 

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राप्ती के उफान ने चारों तरफ से घेरा गांव, फसलें प्रभावित; 300 परिवारों को राशन किट, कटान रोधक कार्य और बांध सड़क निर्माण पर भी मंथन


सिद्धार्थनगर। राप्ती नदी के किनारे बसा विकासखंड जोगिया का संगलदीप गांव एक बार फिर बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ा तो पानी ने गांव को चारों तरफ से घेर लिया। खेतों में पानी पहुंचने से किसानों की फसलें प्रभावित हुईं, वहीं ग्रामीणों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर मुश्किलें बढ़ गईं।

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बाढ़ की इस गंभीर स्थिति के बीच प्रशासनिक अमला गांव की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह नाव पर सवार होकर संगलदीप पहुंचे और बाढ़ प्रभावित इलाके का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने गांव की भौगोलिक स्थिति, जलभराव, आवागमन और कटान रोधक कार्यों की स्थिति को करीब से देखा।

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इस दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, सदर विधायक श्यामधनी राही और उपजिलाधिकारी निखिल चक्रवर्ती समेत प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।


नाव बनी सहारा, तब गांव तक पहुंचा प्रशासन


संगलदीप की भौगोलिक स्थिति और चारों तरफ पानी होने के कारण मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह नाव पर सवार होकर गांव तक पहुंचे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बाढ़ के पानी से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति देखी और ग्रामीणों की समस्याओं को समझने का प्रयास किया।

 

यह तस्वीर बताती है कि बाढ़ के दौरान ग्रामीणों तक प्रशासन की पहुंच भी कितनी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।


300 परिवारों तक पहुंची राहत


बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए सदर विधायक श्यामधनी राही की देखरेख में संगलदीप के 300 परिवारों को राशन किट का वितरण किया गया।

 

राहत सामग्री वितरण के दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं भी सामने रखीं। कुछ ग्रामीणों ने राशन वितरण में परिवारों की संख्या को लेकर आपत्ति जताई।


ग्रामीणों की आपत्ति, विधायक का पक्ष भी सामने


कुछ ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष करीब 600 परिवारों को राशन वितरित किया गया था, जबकि इस बार 300 परिवारों को ही राशन किट दिए जाने की बात सामने आई है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव से बाहर बांध पर मकान बनाकर रहने वाले कुछ परिवारों को इस बार सूची में शामिल नहीं किया गया।

वहीं सदर विधायक श्यामधनी राही ने इस संबंध में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले वर्ष अमरिया का नाम भी सूची में शामिल था, जिसकी वजह से वितरण की संख्या अधिक थी। इस बार अलग व्यवस्था के तहत राशन वितरण किया जा रहा है।

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इस तरह राहत वितरण को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति और जनप्रतिनिधि की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण दोनों सामने आए हैं।

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बाढ़ से आगे स्थायी समाधान की जरूरत


संगलदीप की समस्या केवल मौजूदा बाढ़ तक सीमित नहीं है। हर वर्ष बाढ़ और जलभराव के दौरान गांव के लोगों को आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए गांव को सड़क से जोड़ने का मुद्दा भी निरीक्षण के दौरान प्रमुखता से सामने आया।

सदर विधायक श्यामधनी राही ने पूर्व जिलाधिकारी की ओर से भेजे गए प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद गांव की निकासी और आवागमन के लिए बांध सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

स्थायी सड़क बनने से बाढ़ के समय ग्रामीणों को होने वाली आवागमन की परेशानी को काफी हद तक कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


कटान रोधक कार्यों पर भी प्रशासन की नजर


निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने गांव में कराए गए कटान रोधक कार्यों की स्थिति का भी जायजा लिया।

उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर कटान रोधक कार्यों में सुधार की आवश्यकता है, वहां आवश्यक सुधार कराया जाएगा। बाढ़ का पानी कम होने के बाद कटान रोधक कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।


सारांश


संगलदीप में बाढ़ ने एक बार फिर ग्रामीण जीवन की मुश्किलों को सामने ला दिया है। राप्ती के उफान से गांव चारों तरफ से प्रभावित हुआ, खेतों में पानी पहुंचा और ग्रामीणों के आवागमन की चुनौती बढ़ी। ऐसे समय में प्रशासनिक अधिकारियों का नाव से गांव तक पहुंचना और मौके पर स्थिति का जायजा लेना राहत एवं निगरानी व्यवस्था की सक्रियता को दर्शाता है।

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300 परिवारों को राशन किट वितरण के साथ अब नजर इस बात पर है कि बाढ़ उतरने के बाद फसल क्षति, कटान रोधक कार्य और गांव को सड़क से जोड़ने के प्रस्ताव पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।


टिप्पणी | बाढ़ केवल पानी नहीं, व्यवस्था की परीक्षा भी है


संगलदीप की तस्वीर हर साल आने वाली बाढ़ की उस चुनौती को सामने रखती है, जिसमें कुछ समय के लिए पूरा गांव सड़क, खेत और सामान्य आवागमन से कटने लगता है। राहत सामग्री तत्काल जरूरत पूरी कर सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कटान नियंत्रण, सुरक्षित आवागमन और मजबूत सड़क व्यवस्था जरूरी है।

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शासन की मंशा के अनुरूप बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ उन कारणों पर भी काम करना जरूरी होगा, जिनकी वजह से हर वर्ष ग्रामीणों को इसी त्रासदी का सामना करना पड़ता है।

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अब ग्रामीणों की उम्मीद राहत से आगे बढ़कर स्थायी समाधान पर टिकी है।

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मौके पर मौजूद रहे


निरीक्षण एवं राहत वितरण के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, सदर विधायक श्यामधनी राही, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, उपजिलाधिकारी निखिल चक्रवर्ती, तहसीलदार अरविन्द नाथ पाण्डेय, नायब तहसीलदार अमित सिंह, क्षेत्राधिकारी विश्वजीत सौर्यन, क्षेत्रीय लेखपाल अमित पाण्डेय, धनंजय पाण्डेय, रमेश गुप्ता, सुबोध कांत गुप्ता, विजय यादव, विकास गुप्ता तथा ग्राम प्रधान अमरिया-संगलदीप अम्बिका यादव सहित अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे।

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साथ ही उसका बाजार थाना पुलिस भी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रही।

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रिपोर्ट: सद्दाम खान | FT NEWS DIGITAL

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